{"_id":"5b3519d24f1c1bc57b8b49c0","slug":"kailash-became-idol-educating-villagers-on-mushroom-farming","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रेरणास्रोत बन गए खेला के कैलाश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रेरणास्रोत बन गए खेला के कैलाश
अमर उजाला ब्यूरो पिथौरागढ़।
Updated Thu, 28 Jun 2018 10:54 PM IST
विज्ञापन
धारचूला के खेला गांव में दिया जा रहा मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लगन और मेहनत हो तो रोजगार के लिए सरकार का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा। इसी दिशा में कदम बढ़ाए हैं, धारचूला के खेला गांव के कैलाश सिंह धामी ने। धामी ने मशरूम उत्पादन का प्रयोग किया, जो सफल रहा। आज वह गांव के 25 लोगों को मशरूम उत्पादन से जोड़ चुके हैं।
धारचूला से 16 किमी की दूरी पर स्थित खेला गांव में रोजगार के कोई साधन का अभाव और सरकारी उपेक्षा के चलते युवा कैलाश सिंह धामी ने मशरूम से रोजगार तलाशने की दिशा में कदम बढ़ाए।
उन्होंने मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लिया और मार्च 2018 में उन्होंने मशरूम उत्पादन का काम शुरू किया। पहले ही प्रयास में वह दो किलो मशरूम उत्पादन करने में सफल रहे। इसके बाद वह 20 किलो मशरूम के बीज लाए और 50 किलो मशरूम का उत्पादन किया। कैलाश ने बताया कि धारचूला बाजार में ही 200 रुपये किलो मशरूम बिक जा रहा है।
विज्ञापन
उनका कहना है कि रोजगार के साधन न होने से गांव से पलायन बढ़ रहा है। गांव में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए वह लोगों को मशरूम उत्पादन से जोड़ रहे हैं। अब तक 25 लोगों को मशरूम उत्पादन से जोड़ चुके हैं, जिनमें 2 पूर्व सैनिक, 4 शिक्षित बेरोजगार और 19 बेरोजगार लोग हैं। प्रशिक्षक प्रमोद सिंह बिष्ट लोगों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दे रहे हैं। कहते हैं कि समूह बनाकर मशरूम उत्पादन को पंख लगाए जाएंगे। मशरूम से चिप्स, अचार बनाया जाएगा। समूह के पंजीकरण में बलुवाकोट की परिवर्तन संस्था सहयोग कर रही है।
मशरूम उत्पादन के लिए गौशाला का जीर्णोद्धार
मशरूम उत्पादन के लिए कैलाश धामी ने गांव के एक पुराने गौशाला का जीर्णोद्धार कराया। एक पिट का निर्माण किया गया। तापमान मापने के लिए यंत्र लगाया गया। पॉलिथीन बैग, भूसा, रसायन की व्यवस्था की। पंतनगर से मशरूम का बीज मंगाया।
विज्ञापन
धारचूला से 16 किमी की दूरी पर स्थित खेला गांव में रोजगार के कोई साधन का अभाव और सरकारी उपेक्षा के चलते युवा कैलाश सिंह धामी ने मशरूम से रोजगार तलाशने की दिशा में कदम बढ़ाए।
विज्ञापन
उन्होंने मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लिया और मार्च 2018 में उन्होंने मशरूम उत्पादन का काम शुरू किया। पहले ही प्रयास में वह दो किलो मशरूम उत्पादन करने में सफल रहे। इसके बाद वह 20 किलो मशरूम के बीज लाए और 50 किलो मशरूम का उत्पादन किया। कैलाश ने बताया कि धारचूला बाजार में ही 200 रुपये किलो मशरूम बिक जा रहा है।
विज्ञापन
उनका कहना है कि रोजगार के साधन न होने से गांव से पलायन बढ़ रहा है। गांव में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए वह लोगों को मशरूम उत्पादन से जोड़ रहे हैं। अब तक 25 लोगों को मशरूम उत्पादन से जोड़ चुके हैं, जिनमें 2 पूर्व सैनिक, 4 शिक्षित बेरोजगार और 19 बेरोजगार लोग हैं। प्रशिक्षक प्रमोद सिंह बिष्ट लोगों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दे रहे हैं। कहते हैं कि समूह बनाकर मशरूम उत्पादन को पंख लगाए जाएंगे। मशरूम से चिप्स, अचार बनाया जाएगा। समूह के पंजीकरण में बलुवाकोट की परिवर्तन संस्था सहयोग कर रही है।
मशरूम उत्पादन के लिए गौशाला का जीर्णोद्धार
मशरूम उत्पादन के लिए कैलाश धामी ने गांव के एक पुराने गौशाला का जीर्णोद्धार कराया। एक पिट का निर्माण किया गया। तापमान मापने के लिए यंत्र लगाया गया। पॉलिथीन बैग, भूसा, रसायन की व्यवस्था की। पंतनगर से मशरूम का बीज मंगाया।