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कैलास यात्रियों का पहला दल वापस पिथौरागढ़ पहुंचा
ब्यूरो/अमर उजाला, डीडीहाट
Updated Wed, 01 Jul 2015 10:44 PM IST
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कैलास मानसरोवर की यात्रा पूरी कर प्रथम दल के सदस्य बुधवार को आईटीबीपी सातवीं वाहिनी मुख्यालय मिर्थी में कुछ देर रुकने के बाद पिथौरागढ़ पहुंच गए। यात्री बृहस्पतिवार को जागेश्वर धाम होते हुए दिल्ली को लौट जाएंगे। प्रथम दल के 56 यात्रियों को वापस लौटना था, लेकिन दो यात्री बीमार हो जाने से गुंजी में रुके हैं। एक यात्री अशोक कुमार रणछोड़दास गुंजी से छोटा कैलास की यात्रा को निकल गए हैं।
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प्रथम दल के सभी यात्रियों में अपनी एक साथी दिल्ली निवासी वीना गुप्ता की मौत का बेहद गम है। यात्रियों का कहना है कि तिब्बत में प्रवेश के बाद भी यात्रियों को स्वास्थ्य की सुविधा मिलनी चाहिए। दिल्ली जाकर सभी यात्री विदेश मंत्रालय के सामने इस मुद्दे को रखने वाले हैं।
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प्रथम दल में शामिल यात्री आज अपराह्न करीब चार बजे आईटीबीपी मिर्थी पहुंचे। यात्रियों ने कहा कि यदि तिब्बती क्षेत्र में चिकित्सा की सही सुविधा होती तो वीना गुप्ता को बचाया जा सकता था। एक यात्री नारायण वेणु गोपाल ने कहा कि तिब्बत में चार किलोमीटर बर्फ में सफर करना बेहद कष्टकारक है। यात्री शालू जैन ने कहा कि यात्रा के समापन पर एक महिला यात्री के साथ हुआ हादसा कभी नहीं भूल पाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि लिपुलेख के पास वीना गुप्ता को चिकित्सा सुविधा मिल जाती तो शायद वह बच जातीं।
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दिल्ली निवासी यात्री अंजना शर्मा ने कहा कि वह तिब्बत में यात्रियों को मेडिकल सुविधा दिलाने की मांग विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय से करेंगी। अन्य यात्रियों ने भी इसी तरह की बात की। आईटीबीपी के सेनानी केदार सिंह रावत ने यात्रियों का स्वागत किया। आज दल के सदस्य पिथौरागढ़ में रात्रि विश्राम करेंगे।
पहली बार चीन सरकार ने दिया प्रतीक चिन्ह
धारचूला (पिथौरागढ़)। कैलास मानसरोवर की यात्रा पूरी कर लौटे प्रथम दल के सदस्यों को पहली बार चीन की ओर से प्रतीक चिन्ह भेंट किया गया। हर यात्री को अलग से एक बैग भी दिया गया। बैग में कंबल, टार्च, पानी की बोतल, जैकेट, चश्मा, तौलिया जैसी सामग्री रखी गई थी। यात्रा पूरी कर लौट रहे हर सदस्य को यह सामान मिला।