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कैलाश मानसरोवर यात्रियों का पहला जत्था 13 जून को पहुंचेगा धारचूला
Fri, 07 Jun 2019 11:01 PM IST
kamlesh kamlesh
ब्यूरो/ अमर उजाला , पिथौरागढ़।
ब्यूरो/ अमर उजाला , पिथौरागढ़।
Published by: kamlesh kamlesh
Updated Fri, 07 Jun 2019 11:01 PM IST
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उच्च हिमालयी क्षेत्र में बर्फ हटाते आईटीबीपी के जवान।
- फोटो : पिथौरागढ़
कैलाश मानसरोवर यात्रियों का पहला दल 13 जून को आधार शिविर धारचूला पहुंचेगा। अगले दिन यात्री नजंग तक वाहनों से यात्रा करेंगे। इसके बाद 14 किमी का पैदल सफर तय कर बूंदी पहुंचेंगे। नाभीढांग से लिपुलेख तक का यात्रा मार्ग अभी तीन फुट बर्फ से ढका हुआ है। सीमा सुरक्षा बल को उम्मीद है कि यात्रा शुरू होने से पहले ही बर्फ हटा ली जाएगी।
पहले यात्री दल में 18 यात्री शामिल हैं। कुमाऊं मंडल विकास निगम के महाप्रबंधक अशोक जोशी ने बताया कि यात्रा पूर्व निर्धारित मार्ग से ही होगी। नजंग से बूंदी तक का यात्रा मार्ग को दुरुस्त किया जा रहा है। बूंदी, गुंजी, कालामुनि, नाभीढांग और ज्योलिंगकांग में पर्यटक आवास गृहों को ठीक करने का काम किया जा रहा है। आवास गृहों की मरम्मत के साथ ही पानी की आपूर्ति सुचारु करने के लिए कर्मचारी लगे हैं। जल संस्थान के जूनियर अभियंता मौके पर हैं।
इस बार की कैलाश मानसरोवर यात्रा को पैदल मार्ग से ही संचालित करने का इरादा जताया जा रहा है। महाप्रबंधक ने बताया कि बेहद विपरीत परिस्थितियों में ही विदेश मंत्रालय से हवाई सेवा के लिए अनुरोध किया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही थी कि उच्च हिमालयी क्षेत्र गुंजी से लिपुलेख पास तक यात्रियों को वाहन की सुविधा मिल पाएगी, लेकिन यह संभव नहीं हो पाया है।
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उच्च हिमालयी क्षेत्र में यात्रियों की सुरक्षा आईटीबीपी के हवाले हैं। आईटीबीपी के डीआईजी एपीएस निंबाडिया ने बताया कि नाभीढांग से लिपुलेख तक तीन से चार फुट तक बर्फ पड़ी है। जवान बर्फ को हटाकर रास्ता बनाने में जुटे हैं। यात्रा शुरू होने तक उच्च हिमालयी क्षेत्र के सभी रास्तों को ठीक कर लिया जाएगा।
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पहले यात्री दल में 18 यात्री शामिल हैं। कुमाऊं मंडल विकास निगम के महाप्रबंधक अशोक जोशी ने बताया कि यात्रा पूर्व निर्धारित मार्ग से ही होगी। नजंग से बूंदी तक का यात्रा मार्ग को दुरुस्त किया जा रहा है। बूंदी, गुंजी, कालामुनि, नाभीढांग और ज्योलिंगकांग में पर्यटक आवास गृहों को ठीक करने का काम किया जा रहा है। आवास गृहों की मरम्मत के साथ ही पानी की आपूर्ति सुचारु करने के लिए कर्मचारी लगे हैं। जल संस्थान के जूनियर अभियंता मौके पर हैं।
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इस बार की कैलाश मानसरोवर यात्रा को पैदल मार्ग से ही संचालित करने का इरादा जताया जा रहा है। महाप्रबंधक ने बताया कि बेहद विपरीत परिस्थितियों में ही विदेश मंत्रालय से हवाई सेवा के लिए अनुरोध किया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही थी कि उच्च हिमालयी क्षेत्र गुंजी से लिपुलेख पास तक यात्रियों को वाहन की सुविधा मिल पाएगी, लेकिन यह संभव नहीं हो पाया है।
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उच्च हिमालयी क्षेत्र में यात्रियों की सुरक्षा आईटीबीपी के हवाले हैं। आईटीबीपी के डीआईजी एपीएस निंबाडिया ने बताया कि नाभीढांग से लिपुलेख तक तीन से चार फुट तक बर्फ पड़ी है। जवान बर्फ को हटाकर रास्ता बनाने में जुटे हैं। यात्रा शुरू होने तक उच्च हिमालयी क्षेत्र के सभी रास्तों को ठीक कर लिया जाएगा।