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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   Jamir Fruit in Pithauragarh

जामिर गांव से ही गायब हुआ नींबू प्रजाति का प्रसिद्ध जामिर फल

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 07 Jan 2021 10:48 PM IST
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Jamir Fruit in Pithauragarh
जामीर का फल। - फोटो : PITHORAGARH
अस्कोट (पिथौरागढ़)। जामिर फल औषधीय गुणों से युक्त है। इसके लिए प्रख्यात डीडीहाट विकासखंड का जामिर गांव में जामिर फल के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। 30 साल पहले गांव में बहुतायत में जामिर का उत्पादन होता था। यहां की मिट्टी से जामिर की खुशबू की महक आती थी, लेकिन पिछले 10 साल से जामिर का फल ढूंढने से भी मिलना मुश्किल हो गया है।
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जमतड़ी गांव का जामिर तोक तीस साल पहले जामिर फल के नाम से जाना जाता था। क्षेत्र में बहुतायत में जामिर फल होने के कारण लोगों ने इस क्षेत्र का नाम जामिर रख दिया। गांव के लोग जामिर फल बेचकर जीवनयापन करते थे। औषधीय गुणों से भरपूर होने के कारण अधिकतर परिवार इसका रस निकालने के बाद इसका काढ़ा बनाकर बेचते थे, लेकिन पिछले दस सालों में ग्रामीणों के इस फल को नजर लग गई है। संरक्षण के अभाव और पेड़ों को रोग लगने के कारण जामिर फल अपनी अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। अब क्षेत्र में मात्र दस पेड़ ही बचे हैं। खूटा, जमतड़ी, अस्कोट, बगड़ीहाट में जामिर फल होता था।
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पेट के कीड़े मारने में रामबाण
अस्कोट (पिथौरागढ़) नींबू प्रजाति का जामिर फल पेट के कीड़े मारने में रामबाण है। अस्पताल न होने के कारण पहले लोग घरों में जामिर फल के रस का उपयोग कीड़े मारने में करते थे। सर्दियों में खासकर शहद और घी लगाकर सेवन करते थे। जामिर से तैयार काढ़े का चटनी में प्रयोग किया जाता है। काढ़ा लंबे समय तक सुरक्षित रहता है। इसका बॉटनिकल नाम साइटरस जाम भेरी और वैज्ञानिक नाम साइथस आका नैनसिस है।
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चूक और नींबू की पौध तो उपलब्ध है। जामिर की पौध उपलब्ध नहीं है। अगर ग्रामीण इसके उत्पादन को इच्छुक हैं तो जामिर की पौध उपलब्ध कराई जाएगी।
- बाला सिंह, सचल दल प्रभारी, वन विभाग, अस्कोट।
जामिर का रस पेट के कीड़े मारने में कारगर साबित होता है। जामिर का रस मनुष्य और जानवरों पर समान असर करता है। सौंदर्य प्रसाधन के उत्पादों में भी इसका उपयोग होता है। इसका संरक्षण करना जरूरी है।

- डॉ. डमर सिंह बोनाल, आयुर्वेदिक चिकित्सक।
पहले क्षेत्र में बहुतायत में जामिर का उत्पादन होता था। चटनी, आचार में इसका बहुतायत उपयोग होता है। पहले पेट में कीड़े होने पर लोग इसी के काढ़े का प्रयोग करते थे। सर्दियों में भी इसका प्रयोग फायदेमंद है।
- गोविंद सिंह भंडारी, पूर्व प्रधान, जमतड़ी ग्राम।
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