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Pithoragarh News: कुलागाड़ में बेली ब्रिज बनाने का काम शुरू, तीन दिन में वाहन चलने की संभावना
Mon, 14 Sep 2026 11:19 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Mon, 14 Sep 2026 11:19 PM IST
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धारचूला (पिथौरागढ़)। आदि कैलाश यात्रा मार्ग के कुलागाड़ में ध्वस्त हुए बेली ब्रिज बनाने का काम शुरू हो गया है। दो-तीन में कुलागाड़ में वाहनों की आवाजाही शुरू होने की उम्मीद है।
सोमवार को बीआरओ की टीम ने पुल के लिए दो एबटमेंट का निर्माण करने के बाद 130 फीट लंबा बेली ब्रिज बनाना शुरू कर दिया। बीआरओ के कमांडर कर्नल प्रशांत सिंह और 67 आरसीसी ग्रिफ के ईई चंद्र गुप्त के नेतृत्व में दो जेसीबी के साथ 25 से अधिक श्रमिकों की टीम पुल निर्माण के कार्य में लगी है। सोमवार को एसडीएम धारचूला आशीष जोशी ने कुलागाड़ में निर्माण कार्य का निरीक्षण कर प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि मौसम का साथ मिला तो दो से तीन दिन में कुलागाड़ में वाहनों की आवाजाही शुरू होने की संभावना है।
लोहा का गाडर लगाने से मिल रही राहत
धारचूला। बीआरओ ने ग्रामीणों की आवाजाही कुछ सुगम बनाने के लिए सोमवार को कुला गाड़ में लोहे का गाडर लगा दिया, जिससे लोगों को कुछ राहत मिल रही है। सोमवार को एनडीआरएफ, एसएसबी के जवानों ने लगभग 300 ग्रामीणों को सुरक्षित आर-पार करवाया।
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पुल निर्माण स्थल पर गिरे बोल्डर, श्रमिकों ने भागकर बचाई जान
धारचूला। कुलागाड़ में सोमवार दोपहर पुल निर्माण स्थल के ऊपर की पहाड़ी से बोल्डर गिरने से अफरा-तफरी मच गई। बोल्डर गिरने से निर्माण कार्य में जुटे श्रमिकों को मौके से भागकर जान बचानी पड़ी। बोल्डर ब्रिज के कुछ गाडरों से टकराए। इसमें ज्यादा नुकसान होने की सूचना नहीं है। कुलागाड़ में तैनात एक पुलिस कर्मी के अनुसार बोल्डर छोटे होने से नुकसान नहीं हुआ। बता दें कि भूस्खलन और बोल्डर गिरने से कुलागाड़ में पांचवीं बार बेली ब्रिज ध्वस्त हुआ है। वहीं आदि कैलाश और चीन सीमा को जोड़ने वाली तवाघाट-गुंजी रोड तीसरे दिन भी नहीं खुल पाई। इस रोड पर मल घाट और गस्कू में मलबा हटाने का काम रुक-रुककर हो रही बारिश और बोल्डर गिरने से बाधित हो रहा है, जिससे 65 आरसीसी ग्रिफ के कर्मचारियों को सड़क खोलने में दिक्कत आ रही है। सड़क नहीं खुलन से 50 से अधिक वाहन दोनों ओर फंसे हैं।
-- -कोट-- --
बेली ब्रिज के लिए कुलागाड़ में जिस जगह एबटमेंट बनाया गया है, उसके ऊपर की पहाड़ी पर कई बोल्डर अटके हैं, जो तेज बारिश में ब्रिज को कभी भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में पहले सुरक्षा उपाय करने और कुला गाड़ से लेकर गधेरे के मुख्य स्रोत तक भू वैज्ञानिक सर्वे करने की जरूरत है।
केशर सिंह धामी, ग्रामीण, रांथी
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सोमवार को बीआरओ की टीम ने पुल के लिए दो एबटमेंट का निर्माण करने के बाद 130 फीट लंबा बेली ब्रिज बनाना शुरू कर दिया। बीआरओ के कमांडर कर्नल प्रशांत सिंह और 67 आरसीसी ग्रिफ के ईई चंद्र गुप्त के नेतृत्व में दो जेसीबी के साथ 25 से अधिक श्रमिकों की टीम पुल निर्माण के कार्य में लगी है। सोमवार को एसडीएम धारचूला आशीष जोशी ने कुलागाड़ में निर्माण कार्य का निरीक्षण कर प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि मौसम का साथ मिला तो दो से तीन दिन में कुलागाड़ में वाहनों की आवाजाही शुरू होने की संभावना है।
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लोहा का गाडर लगाने से मिल रही राहत
धारचूला। बीआरओ ने ग्रामीणों की आवाजाही कुछ सुगम बनाने के लिए सोमवार को कुला गाड़ में लोहे का गाडर लगा दिया, जिससे लोगों को कुछ राहत मिल रही है। सोमवार को एनडीआरएफ, एसएसबी के जवानों ने लगभग 300 ग्रामीणों को सुरक्षित आर-पार करवाया।
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पुल निर्माण स्थल पर गिरे बोल्डर, श्रमिकों ने भागकर बचाई जान
धारचूला। कुलागाड़ में सोमवार दोपहर पुल निर्माण स्थल के ऊपर की पहाड़ी से बोल्डर गिरने से अफरा-तफरी मच गई। बोल्डर गिरने से निर्माण कार्य में जुटे श्रमिकों को मौके से भागकर जान बचानी पड़ी। बोल्डर ब्रिज के कुछ गाडरों से टकराए। इसमें ज्यादा नुकसान होने की सूचना नहीं है। कुलागाड़ में तैनात एक पुलिस कर्मी के अनुसार बोल्डर छोटे होने से नुकसान नहीं हुआ। बता दें कि भूस्खलन और बोल्डर गिरने से कुलागाड़ में पांचवीं बार बेली ब्रिज ध्वस्त हुआ है। वहीं आदि कैलाश और चीन सीमा को जोड़ने वाली तवाघाट-गुंजी रोड तीसरे दिन भी नहीं खुल पाई। इस रोड पर मल घाट और गस्कू में मलबा हटाने का काम रुक-रुककर हो रही बारिश और बोल्डर गिरने से बाधित हो रहा है, जिससे 65 आरसीसी ग्रिफ के कर्मचारियों को सड़क खोलने में दिक्कत आ रही है। सड़क नहीं खुलन से 50 से अधिक वाहन दोनों ओर फंसे हैं।
बेली ब्रिज के लिए कुलागाड़ में जिस जगह एबटमेंट बनाया गया है, उसके ऊपर की पहाड़ी पर कई बोल्डर अटके हैं, जो तेज बारिश में ब्रिज को कभी भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में पहले सुरक्षा उपाय करने और कुला गाड़ से लेकर गधेरे के मुख्य स्रोत तक भू वैज्ञानिक सर्वे करने की जरूरत है।
केशर सिंह धामी, ग्रामीण, रांथी