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जान लेने पर तुले बोल्डर से दूसरे बोल्डर ने बचाया

Thu, 28 Feb 2019 10:36 PM IST
kamlesh kamlesh ब्यूरो/ अमर उजाला , पिथौरागढ़।
ब्यूरो/ अमर उजाला , पिथौरागढ़। Published by: kamlesh kamlesh Updated Thu, 28 Feb 2019 10:36 PM IST
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jaan lene par tule botar se doosare botar ne turant kaam kiya
पिथौरागढ़ के मटेला के पास सड़क पर गिरा बोल्डर। - फोटो : पिथौरागढ़
 दो पल की भी देरी होती तो विशालकाय बोल्डर बस को एक हजार मीटर गहरी खाई में धकेल देता। यह किसी चमत्कार से कम नहीं है कि पत्थर के टकराने के बाद खाई की ओर झुक रही बस का रुख एक और पत्थर के टकराने से पलट गया।
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मटेला बैंड पर पहाड़ी से गिरा एक बोल्डर बस से टकराया। बोल्डर के टकराते ही बस खाई की ओर झुक गई और ऊपर की ओर सीटों में बैठे यात्री दूसरे यात्रियों के ऊपर गिर गए। इसी बीच पहाड़ी से लुढ़का एक और बोल्डर बस के पिछले हिस्से में टकराया जिससे खाई में पलट रही बस वापस सड़क की ओर मुड़ गई। इस बीच चालक ने बस को भी नियंत्रित कर लिया। इस हिसाब से देखें तो यात्री दूसरे बोल्डर के टकराने के कारण बच गए। यात्री खुद भी स्वीकार कर रहे हैं कि अगर यह दूसरा बोल्डर बस से न टकराया होता तो बस खाई में गिर जाती।
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बोल्डरों के टकराने से बस की सीटों और खिड़की के कांच से टकराने के कारण कई यात्रियों के सिर और माथे में गहरी चोटें आईं। लखनऊ जा रहे एक यात्री आनंद सिंह ने बताया कि यदि बस के पिछले हिस्से में दूसरा बोल्डर नहीं टकराता और चालक ने हिम्मत नहीं दिखाई होती तो दो पल के भीतर ही 33 यात्रियों से भरी बस एक हजार मीटर गहरी खाई में चली जाती। सुनीता सहित अन्य महिला यात्रियों ने कहा कि बोल्डर गिरने के बाद भी बड़ा हादसा टल गया यह किसी चमत्कार से कम नहीं है।
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यात्री बोले ऐसा लगा जैसे अंतिम सफर
पिथौरागढ़। बोल्डर गिरने के कारण हुए हादसे से कई यात्री इतना सहमें कि सफर छोड़ कर वापस ही लौट गए।
बोल्डर गिरने से घायल यात्रियों ने कहा कि बोल्डर गिरने के बाद जोर का धमाका हुआ। जब बस खाई की ओर झुकी तो लगा कि यह उनका अंतिम सफर होने वाला है लेकिन ईश्वर ने उन्हें बचा लिया। परिचालक राकेश कुमार ने बताया कि बोल्डर बस से टकराने पर जोर का धमाका हुआ। इसके बाद सभी यात्री चीखने चिल्लाने लगे। उनका सिर भी बस की खिड़की से टकराया इससे एक बार तो वह भी कुछ समय के लिए सुधबुध खो बैठे थे। फेरी लगाने वाले सिद्धार्थनगर निवासी निरहू ने बताया कि वह हादसे का मंजर नहीं भूल पा रहे हैं। जब बस खाई को पलटने लगी तो लगा कि यह उनका अंतिम सफर है लेकिन किसी चमत्कार से सभी यात्री सुरक्षित बच गए। इसके अलावा बहराइच और लखीमपुर खीरी से मजदूरी करने के बाद घरों को लौट रहे मजदूरों के चेहरों पर भी हादसे के बाद मौत का खौफ था। दस यात्री तो वापस ही लौट गए।
 
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