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Pithoragarh News: ट्रॉमा सेंटर नहीं, जिला अस्पताल और उसका इमरजेंसी कक्ष है गंभीर घायलों का तात्कालिक सहारा

Sat, 17 Oct 2026 12:00 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Sat, 17 Oct 2026 12:00 AM IST
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It is not a trauma center, but rather the district hospital and its emergency room that serve as the immediate recourse for the seriously injured
पिथौरागढ़। नेपाल और चीन की सीमा से लगे सीमांत जनपद में सरकारी ट्रॉमा सेंटर का नितांत अभाव है। बस जिला अस्पताल और उसका इमरजेंसी कक्ष ही जिले की पांच लाख की आबादी के लिए ट्रॉमा सेंटर की तरह काम कर रहा है, जिसमें गंभीर, जानलेवा और आपातकालीन चोटों से पीड़ित मरीजों का उपचार किया जाता है। यहां उपचार संभव न होने पर मरीजों को 220 किलोमीटर दूर हल्द्वानी या फिर अन्य हायर सेंटर रेफर करना ही एकमात्र रास्ता है।
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सीमांत जिले में ट्रॉमा सेंटर सिर्फ घोषणाओं तक सीमित रहा है। आपात स्थिति में जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों से रेफर होने वाले मरीज जिला अस्पताल पहुंचते हैं। धारचूला, मुनस्यारी, डीडीहाट और बेड़ीनाग के दूरदराज क्षेत्रों से कई मरीज ऐसे होते हैं जो कई घंटे के सफर के बाद आपातकालीन स्थिति में सीधे जिला अस्पताल ही लाए जाते हैं। अनेक बार स्थिति ऐसी होती है कि मरीज अस्पताल में ओपीडी समय खत्म होने के बाद या रात में पहुंचते हैं। अत्यधिक गंभीर स्थिति होने पर प्राथमिक उपचार के बाद मरीजों को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में एंबुलेंस बुक कर मरीज को हल्द्वानी, बरेली, ऋषिकेश या फिर दिल्ली ले जाना परिवार की मजबूरी बन जाता है। इन हालात में अक्सर रास्ते में मरीज की जान का खतरा बना रहता है और कई मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। जो मरीज किसी तरह हायर सेंटर पहुंच गए तो उन्हें समय पर उपचार न मिलने से रिकवरी करने में काफी मुश्किल होती है। ऐसे में इलाज का खर्च और बढ़ जाता है।
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ट्रॉमा सेंटर की लंबे समय से की जा रही मांग

जिले में राज्य गठन के बाद से ट्रॉमा सेंटर की मांग की जा रही है। हाल के दिनों में सीनियर सिटीजन वेलफेयर सोसाइटी और अन्य स्थानीय संगठनों ने भी अस्पताल प्रशासन से मिलकर जिला मुख्यालय में अत्याधुनिक ट्रॉमा सेंटर की स्थापना करने की मांग उठाई। लोगों ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं या किसी अन्य घटना में गंभीर रूप से घायलों को अक्सर रेफर करने के हालात के कारण उनकी जान पर बन आती है। स्वास्थ्य विभाग ने साल 201 में बेड़ीनाग में 12 बेड के ट्रॉमा सेंटर का प्रस्ताव शासन को भेजा था, लेकिन आज तक यह सेंटर अस्तित्व में नहीं आया।
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सीएम का वादा भी नहीं उतरा धरातल पर

बीते दो साल में विभिन्न सड़क दुर्घटनाओं में घायल 120 लोगों को ट्रॉमा सेंटर के अभाव में रेफर कर दिया गया। इनमें से 15 घायलों ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। आपदा की दृष्टि से संवेदनशील इस सीमांत जनपद में राज्य गठन के 26 साल बाद भी ट्रॉमा सेंटर बनाने के प्रयास नहीं हुए। अप्रैल 2017 में भ्रमण पर पिथौरागढ़ आए तत्कालीन मुख्यमंत्री ने जनता दरबार में शामिल होकर ट्रॉमा सेंटर खोलने का दावा कर डेढ़ करोड़ रुपये मंजूर करने का वादा किया, लेकिन आज तक वह वादा धरातल पर नहीं उतर पाया।


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जिला अस्पताल में उपलब्ध विशेषज्ञों और सुविधाओं से गंभीर रूप से घायल मरीजों का हर संभव उपचार किया जाता है। मेडिकल कॉलेज में क्रिटिकल केयर सेंटर स्थापित होने पर यह समस्या काफी हद तक दूर होगी और घायलों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर उपचार मिल सकेगा। -सीएमओ, डॉ. जेएस चुफाल सीएमओ पिथौरागढ़
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