{"_id":"15e799217cadb8930dc6f2b9a3695579","slug":"interest-among-its-own-bid-talk-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आपस में अपनी ही बोली में बात करेंगे शौका ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आपस में अपनी ही बोली में बात करेंगे शौका
ब्यूरो/अमर उजाला,पिथौरागढ़
Updated Sun, 07 Feb 2016 10:17 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जोहारी शौकाओं के वार्षिक सम्मेलन में तय किया गया कि हर शौका आपस में सिर्फ अपनी ही बोली में बातचीत करेगा। शौकाओं की बोली कुमाऊंनी से मिलती है। उसमें थोड़ा सा स्थानीय पुट आ जाता है।
विभिन्न महकमों में ऊंचे पदों में कार्यरत जोहार के शौकाओं की संख्या पिथौरागढ़ नगर में भी बहुत अधिक है। वह हर साल एक सम्मेलन का आयोजन करते हैं और एक दूसरे के बारे में जानकारी हासिल करते हैं। जो नए लोग शहर में आते हैं उनका स्वागत किया जाता है।
इस मौके पर कहा गया कि चाहे आजीविका के लिए किसी महकमे में काम क्यों न करना पड़े लेकिन अपनी संस्कृति, समाज, बोली के संरक्षण के प्रति सजग रहना होगा। कहा गया कि शौका समाज के लोग देशसेवा में भी बढ़चढ़कर भागीदारी कर रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में सभी लोगों ने बेहतर मुकाम हासिल किया है। चंडाक में आयोजित सम्मेलन में कहा गया कि नई पीढ़ी को अपनी बोली से परिचित कराया जाए ताकि यह लुप्त न होने पाए।
विज्ञापन
कोशिश की जाए कि घर में भी सभी लोग अपनी बोली में ही बातचीत करें। सम्मेलन में भारी संख्या में महिलाएं, बच्चे तथा अन्य लोग उपस्थित थे। इनके बीच रस्साकस्सी, कुर्सी दौड़ प्रतियोगिता कराई गई। बाद में प्रतियोगियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बहादुर सिंह धर्मशक्तू, प्रेम सिंह जंगपांगी, महेश धर्मशक्तू, भूपनेश बृजवाल, नारायण सिंह मर्तोलिया, गजेंद्र मपवाल, लक्ष्मण मपवाल, सोबन सिंह धर्मशक्तू, जानकी धर्मशक्तू, बसंती टोलिया, लक्ष्मी जंगपांगी समेत भारी संख्या में लोग मौजूद थे।
विज्ञापन
विभिन्न महकमों में ऊंचे पदों में कार्यरत जोहार के शौकाओं की संख्या पिथौरागढ़ नगर में भी बहुत अधिक है। वह हर साल एक सम्मेलन का आयोजन करते हैं और एक दूसरे के बारे में जानकारी हासिल करते हैं। जो नए लोग शहर में आते हैं उनका स्वागत किया जाता है।
विज्ञापन
इस मौके पर कहा गया कि चाहे आजीविका के लिए किसी महकमे में काम क्यों न करना पड़े लेकिन अपनी संस्कृति, समाज, बोली के संरक्षण के प्रति सजग रहना होगा। कहा गया कि शौका समाज के लोग देशसेवा में भी बढ़चढ़कर भागीदारी कर रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में सभी लोगों ने बेहतर मुकाम हासिल किया है। चंडाक में आयोजित सम्मेलन में कहा गया कि नई पीढ़ी को अपनी बोली से परिचित कराया जाए ताकि यह लुप्त न होने पाए।
विज्ञापन
कोशिश की जाए कि घर में भी सभी लोग अपनी बोली में ही बातचीत करें। सम्मेलन में भारी संख्या में महिलाएं, बच्चे तथा अन्य लोग उपस्थित थे। इनके बीच रस्साकस्सी, कुर्सी दौड़ प्रतियोगिता कराई गई। बाद में प्रतियोगियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बहादुर सिंह धर्मशक्तू, प्रेम सिंह जंगपांगी, महेश धर्मशक्तू, भूपनेश बृजवाल, नारायण सिंह मर्तोलिया, गजेंद्र मपवाल, लक्ष्मण मपवाल, सोबन सिंह धर्मशक्तू, जानकी धर्मशक्तू, बसंती टोलिया, लक्ष्मी जंगपांगी समेत भारी संख्या में लोग मौजूद थे।