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Pithoragarh News: वर्ष 2024 तक लिपुलेख सड़क पर फर्राटा भरेंगे वाहन

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 26 Dec 2022 11:52 PM IST
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Indo-China Border Road in lipulekh
चीन सीमा के लिए बन रही है तवाघाट-लिपुलेख सड़क। संवाद - फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़। चीन सीमा तक बन रही तवाघाट-लिपुलेख सड़क का चौड़ीकरण और डामरीकरण का कार्य अंतिम चरण में है। बीआरओ सीमा तक सड़क कनेक्टिविटी देने के बाद अब सड़क पर नाली निर्माण, डामरीकरण, सुरक्षा दीवार और संकरे स्थानों पर सड़क चौड़ीकरण कार्य कर रहा है। वर्ष 2024 तक तवाघाट से लिपुलेख तक सड़क पूरी तरह पक्की हो जाएगी। सड़क के पक्का होने के बाद सुरक्षा एजेंसियों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों को इसका फायदा मिलेगा।
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पर्यटन गतिविधियां बढ़ने से सीमांत के लोगों की आय भी बढ़ रही है। बीआरओ सड़क कनेक्टिविटी का कार्य पूरा करने के बाद सड़क को चौड़ा और पक्का कर रहा है। बीआरओ ने इस सड़क में सबसे दुर्गम माने जाने वाली छियालेख की चढ़ाई में डामरीकरण का कार्य लगभग पूरा कर लिया है। इसी चढ़ाई में वाहनों की आवाजाही में दिक्कत होती थी। डामरीकरण होने के बाद वाहन आसानी से चल रहे हैं। बीआरओ के सूत्रों के अनुसार बीआरओ वर्ष 2024 तक तवाघाट से लिपुलेख तक सड़क का चौड़ीकरण और डामरीकरण सहित अन्य कार्य पूरा कर लेगा। इसके बाद चीन सीमा तक भारत की पहुंच आसान हो जाएगी।
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दो साल पहले पूरा हुआ था सड़क निर्माण
बीआरओ ने वर्ष 2020 तवाघाट-लिपुलेख सड़क कनेक्टिविटी का कार्य पूरा कर लिया था। इसके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सड़क का शुभारंभ किया था। सड़क कनेक्टिविटी पूरी होने के बाद सीमांत में पर्यटन गतिविधियां बढ़ीं हैं। यहां आदि कैलाश, ओम पर्वत, कालापानी मंदिर के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग जा रहे हैं। वर्ष 2022 में छह हजार से ज्यादा इनरलाइन परमिट जारी किए गए थे जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी ज्यादा है।
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आसान नहीं हैं उच्च हिमालयी क्षेत्र में सड़क निर्माण
पिथौरागढ़। बीआरओ ने विषम भौगोलिक परिस्थितियों का सामना कर तवाघाट-लिपुलेख सड़क का निर्माण कार्य पूरा किया है। सर्दियों में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में तापमान मानइस 30 डिग्री तक पहुंच जाता है। इसके बाद भी बीआरओ शीतकाल में चीन सीमा पर कनेक्टिविटी बनाए रखता है।

सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है सड़क
पिथौरागढ़। चीन सीमा तक बनी सड़क सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इसे नेपाल सीमा के समानांतर बनाया गया है। त्रिकोणीय अंतरराष्ट्रीय सीमा की इस सड़क से क्षेत्र में तैनात आईटीबीपी, एसएसबी, भारतीय सेना के जवानों को सीमा तक आवागमन आसान होगा और साजोसामान पहुंचाने में भी मदद मिलेगी। सड़क न होने के कारण पहले यह काम घोड़े-खच्चरों से लिया जाता था। धारचूला से अंतिम सीमा क्षेत्र तक पहुंचने में सात दिन का समय लगता था।
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