फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   In May-June house forced to leave shop, Yarasagambu

मई-जून में घर, दुकान छोड़ने पर मजबूर कर देता है यारसागंबू

Wed, 10 May 2017 10:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मदकोट
ब्यूरो/अमर उजाला, मदकोट Updated Wed, 10 May 2017 10:41 PM IST
विज्ञापन
In May-June house forced to leave shop, Yarasagambu
यारसागंबू निकासी सीजन के चलते मदकोट बाजार में पसरा सन्नाटा - फोटो : amar ujala

कीड़ाजड़ी के नाम से मशहूर बहुमूल्य हिमालयी जड़ी यारसागंबू के विदोहन की नीति राज्य गठन के 17 साल बाद भी नहीं बनी है। इस कारण कीड़ाजड़ी के विदोहन पर रोक है। इसके लेनदेन पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद हर साल मई और जून के महीने में कीड़ाजड़ी सीमांत के लोगों को घर, दुकान छोड़ने पर मजबूर कर देती है। यारसागंबू के सीजन में कई गांव खाली हो जाते हैं। युवा, अधेड़ उम्र के लोग महिलाओं, बच्चों समेत कीड़ाजड़ी की खोज में निकल जाते हैं। एक बार फिर कीड़ाजड़ी के कारण सीमांत के गांवों, बाजारों में सन्नाटा पसर गया है। घरों में सिर्फ बुजुर्ग रह गए हैं।

विज्ञापन


यौन दुर्बलता दूर करने के साथ ही गठिया और बात के रोग में कारगर बताई जाने वाली यारसागंबू हिमालयी क्षेत्र में बर्फ पिघलने के बाद मई से जून अंत तक मिलता है। इस बार भी मदकोट क्षेत्र के बोना, तोमिक, गोल्फा, रिंगू, चुलकोट, फाफा, बादनीधार, उच्चैती, धुरातोली, निर्तोली, गैला, वल्थी, मदकोट, जोशा, गांधीनगर, मीणीटुंडी, चौना, इमला समेत कई गांवों के लोग घरों में बुजुर्गों को छोड़कर कीड़ाजड़ी के दोहन के लिए निकल गए हैं। मदकोट क्षेत्र की 8000 आबादी में से करीब 5000 लोग कीड़ाजड़ी ढूंढने जा चुके हैं। मदकोट कस्बे में राशन, खाने, रहने के होटल समेत करीब 150 व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं। कीड़ाजड़ी के कारण 60 से 70 प्रतिशत दुकानें बंद पड़ी हैं।
विज्ञापन


यारसागंबू पंचाचूली पर्वतमाला के पास सेलापानी और कठप नामक बुग्याल में पाया जाता हैं। वहां पहुंचने के लिए 30 किमी की दूरी दो दिन में तय हो पाती है। 30 किमी दूर जिम्बा ग्लेशियर (छिपलाकेदार) भी दो दिन में लोग पहुंचते हैं। रालम ग्लेशियर में भी यारसागंबू पाया जाता है। रालम पहुंचने के लिए 40 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। तीन दिन का समय वहां पहुंचने में लगता है। लोग वहां टेंट लगाकर जड़ी की खोज करते हैं। कीड़ा जड़ी लाने वाले लोग बताते हैं कि 50, 100 से 700 जड़ी तक लोग ढूंढ लेते हैं। चोरीछिपे जड़ी को बेचा जाता है। एक जड़ी खुले में 100 से 500 रुपये तक बिक जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यहां रोक, चीन में होती है खुली बिक्री
पिथौरागढ़। इस राज्य में कीड़ाजड़ी के विदोहन की कोई नीति नहीं है। वर्ष 2012-13 में शासन ने मुनस्यारी तहसील में वन पंचायतों के माध्यम से कीड़ाजड़ी का दोहन कराया। उसके बाद दोहन की कोई व्यवस्था सरकार नहीं करा पाई। चीन में कीड़ाजड़ी प्रतिबंधित नहीं है। वहां आम दुकानों में कीड़ाजड़ी बिकती है। इससे वहां यौन रोग की दवा के साथ ही गठिया, बात और अन्य दवाएं बनाई जाती हैं। व्यापारी दिनेश सिंह बताते हैं कि तिब्बत के तकलाकोट, ल्हासा, चीन के बीजिंग आदि स्थानों पर कीड़ाजड़ी की खुली बिक्री होती है। चीन में भारतीय मुद्रा में 20 लाख रुपये किलो कीड़ाजड़ी बिकती है।

क्या है यारसागंबू
पिथौरागढ़। हिमालयी क्षेत्र में पाया जाने वाला यारसा गंबू भी एक कवक है। तिब्बत में यारसा गंबू को जाड़े का कीड़ा कहा जाता है। यह फेफड़े की कार्य विधि बढ़ाने के साथ-साथ शुक्राणुजनित रोगों के लिए फायदेमंद बताया गया है। यह काले रंग का तंतुकार कवक है, जो 3200 से 4000 मीटर की ऊंचाई वाले इलाकों में पाया जाता है। यारसा गंबू के चर्चा में आने के बाद इस पर गहन शोध हुए हैं। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय पिथौरागढ़ के जंतु विज्ञान विभाग के प्रवक्ता डा. सीएस नेगी के अध्ययन के अनुसार वसंत ऋतु की समाप्ति के समय कवक का तंतुजाल लार्वा को संक्रमित करता है तथा ग्रीष्मऋतु शुरू होते ही कवक लार्वा को मृत करने के बाद शीर्ष भाग से बाहर निकलता है। ऐसा लगता है जैसे कोई घास उगी है। इसी कारण स्थानीय लोग यारसा गंबू को कीड़ा घास कहते हैं।


यारसागंबू की निकासी के लिए फिलहाल कोई नीति नहीं बनी है। कुछ साल पहले ट्रायल के तौर पर मुनस्यारी में वन पंचायतों को दोहन का अधिकार दिया गया था, जो अब नहीं है। शासन स्तर पर नीति बनाने की दिशा में मंथन चल रहा है। -एके श्रीवास्तव, उप प्रभागीय वनाधिकारी, पिथौरागढ़।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed