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प्रवाह रुका तो निचले इलाकों में मच सकती है तबाही

Tue, 31 Jul 2018 10:50 PM IST
कालिका रावल/अमर उजाला, पिथौरागढ़
कालिका रावल/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Tue, 31 Jul 2018 10:50 PM IST
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If the flow stops, it can hit the lower areas.
नामिक जाने के लिए उफनते धारापानी रौली को पार करने की मजबूरी - फोटो : अमर उजाला

नामिक और हीरामणि ग्लेशियर में लगातार हो रही बारिश से हिमालय से निकलने वाली रामगंगा उफान पर है। नदी के कटाव से लगातार भूस्खलन हो रहा है। नामिक ग्लेशियर से निकलने वाली रामगंगा पूर्वी में मलबा समा रहा है। इससे समय-समय पर रामगंगा में तालाब बन रहे हैं। कई घंटे तक नदी का प्रवाह रुक रहा है। अधिक मात्रा मलबा नदी में गिरा और प्रवाह पूरी तरह रुका तो निचले इलाकों में तबाही मच सकती है।

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गोगिना के पास रामगंगा नदी में लगातार भूस्खलन हो रहा है। रामगंगा में तालाब बन रहे हैं, फिर तेज बहाव में बह जा रहे हैं। ज्यादा मात्रा में भूस्खलन हुआ तो नदी का प्रवाह रुक सकता है। अस्थायी तालाब से एक साथ पानी की निकासी हुई तो पैदल रास्ते और झूलापुल को नुकसान होगा, तल्लाजोहार के नाचनी समेत कई इलाकों के लिए खतरा उत्पन्न हो जाएगा। इन इलाकों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है।
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नामिक को जोड़ने वाले दोनों रास्ते क्षतिग्रस्त
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिले से नामिक गांव को जोड़ने वाले दोनों रास्ते क्षतिग्रस्त हैं। इससे नामिक के 124 परिवार मुसीबत में हैं। पिथौरागढ़ जिले के बिर्थी से 27 किमी और बागेश्वर जिले के गोगिना से 7 किमी किमी की दूरी पर स्थित नामिक के लोग दो जुलाई की आपदा से प्रभावित हैं। बिर्थी से नामिक जाने वाले रास्ते पर पड़ने वाली धारापानी रौली (गाड़) उफान पर है। रौली में लोगों को एक-दूसरे का हाथ पकड़कर जाना पड़ रहा है। गोगिना वाले रास्ते पर लोनिवि ने मजदूर लगाकर लोगों के आवागमन के लिए रास्ता खोला है, लेकिन दोनों रास्तों से घोड़े, खच्चर नहीं चल पा रहे हैं।
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सितंबर तक का राशन तो है, अन्य सामान की किल्लत
पिथौरागढ़। नामिक में सितंबर तक का सरकारी राशन तो है, लेकिन जरूरी सामान की किल्लत पैदा हो गई है। लोगों को दैनिक उपभोग की वस्तुओं के लिए जान जोखिम में डालकर बागेश्वर जिले के शामा और पिथौरागढ़ के मुनस्यारी, नाचनी आना पड़ रहा है। घोड़े-खच्चरों के लिए रास्ता न होने से लोगों की मुसीबत और बढ़ गई है।


नदी में पट रहे मलबे पर ध्यान देने की जरूरत
पिथौरागढ़। नामिक की प्रधान तुलसी जेम्याल कहती हैं कि नदी में पट रहे मलबे की ओर ध्यान देने की जरूरत है। झूलापुल और पैदल रास्ते को बचाने के लिए त्वरित कदम उठाने की आवश्यकता है। धारापानी रौली हर साल मुसीबत बनती है, इस स्थान पर पुलिया का निर्माण होना चाहिए।

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