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Pithoragarh News: अस्पताल ने प्रसव कराने से खड़े किए हाथ, आफत में डाली जान
Wed, 12 Feb 2025 11:17 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Wed, 12 Feb 2025 11:17 PM IST
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झूलाघाट (पिथौरागढ़)। सीमांत जिले में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाएं गर्भवतियों की जान पर भारी पड़ रही हैं। अस्पतालों में प्रसव कराने की सुविधा न होने या प्रसव कराने से स्वास्थ्यकर्मियों के हाथ खड़े कर देने से गर्भवतियों को हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है। इससे उनकी जान खतरे में पड़ रही है। वहीं, एंबुलेंस में कम सुविधाओं में सुरक्षित प्रसव हो जा रहा है। ऐसा ही एक मामला झूलाघाट पीएचसी में सामने आया। यहां एक गर्भवती को प्रसव के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। जिला मुख्यालय पहुंचने से पहले ही एंबुलेंसकर्मियों ने सुरक्षित प्रसव कराकर अस्पताल प्रशासन को आईना दिखाया है।
गेठीगाड़ा निवासी सुरेंद्र सिंह की पत्नी कौशल्या देवी को प्रसव पीड़ा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र झूलाघाट पहुंचाया गया। स्टाफ की कमी बताकर यहां तैनात स्वास्थ्यकर्मियों ने उसका प्रसव कराने से इन्कार करते हुए उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया। परिजन उसे 108 एंबुलेंस में जिला मुख्यालय लेकर जा रहे थे। बिण में सैन्य अस्पताल के पास उसकी तबीयत बिगड़ गई। ऐसे में एंबुलेंसकर्मियों ने जच्चा-बच्चा की जान बचाने के लिए गर्भवती का प्रसव कराने की जिम्मेदारी उठाई।
ईएमटी शिव सागर और चालक दीपक चंद्र ने गर्भवती का सुरक्षित प्रसव कराकर जच्चा-बच्चा की जान बचाते हुए स्वास्थ्य विभाग को आईना दिखाया। दोनों को महिला अस्पताल में भर्ती किया गया है। स्वास्थ्यकर्मियों के मुताबिक दोनों स्वस्थ हैं।
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नेपाल से भी आते हैं मरीज
पीएचसी झूलाघाट में नेपाल की गर्भवतियां भी प्रसव कराने आती हैं। अधिकतर गर्भवतियों को स्टाफ की कमी का हवाला देकर हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। इससे उनकी जान पर बन आती है। अस्पताल में प्रसव न होने पर स्थानीय लोगों में खासा आक्रोश है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को सीमांत क्षेत्र के अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ की तैनाती करनी चाहिए।
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गेठीगाड़ा निवासी सुरेंद्र सिंह की पत्नी कौशल्या देवी को प्रसव पीड़ा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र झूलाघाट पहुंचाया गया। स्टाफ की कमी बताकर यहां तैनात स्वास्थ्यकर्मियों ने उसका प्रसव कराने से इन्कार करते हुए उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया। परिजन उसे 108 एंबुलेंस में जिला मुख्यालय लेकर जा रहे थे। बिण में सैन्य अस्पताल के पास उसकी तबीयत बिगड़ गई। ऐसे में एंबुलेंसकर्मियों ने जच्चा-बच्चा की जान बचाने के लिए गर्भवती का प्रसव कराने की जिम्मेदारी उठाई।
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ईएमटी शिव सागर और चालक दीपक चंद्र ने गर्भवती का सुरक्षित प्रसव कराकर जच्चा-बच्चा की जान बचाते हुए स्वास्थ्य विभाग को आईना दिखाया। दोनों को महिला अस्पताल में भर्ती किया गया है। स्वास्थ्यकर्मियों के मुताबिक दोनों स्वस्थ हैं।
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नेपाल से भी आते हैं मरीज
पीएचसी झूलाघाट में नेपाल की गर्भवतियां भी प्रसव कराने आती हैं। अधिकतर गर्भवतियों को स्टाफ की कमी का हवाला देकर हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। इससे उनकी जान पर बन आती है। अस्पताल में प्रसव न होने पर स्थानीय लोगों में खासा आक्रोश है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को सीमांत क्षेत्र के अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ की तैनाती करनी चाहिए।