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Pithoragarh News: पंचाचूली क्षेत्र में काली दिखने लगीं हिमालय की पर्वत श्रृंखलाएं

Fri, 15 Nov 2024 10:51 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Fri, 15 Nov 2024 10:51 PM IST
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Himalayan mountain ranges started appearing black in Panchachuli area
पिथौरागढ़। सीमांत जिले के हिमालयी क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां बढ़ी हैं लेकिन इसके दुष्परिणाम भी सामने आ रहे हैं। मानवीय दखल बढ़ने से बर्फ पिघलने की रफ्तार तेज हो गई है। बर्फ से लकदक रहने वाली पंचाचूली की पर्वत श्रृंखलाएं काली नजर आने लगी हैं। ऐसे में पर्यावरणविद और वैज्ञानिक भी चिंतित हैं। संवाद
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1985 से 2000 तक दो से तीन गुना बढ़ी बर्फ पिघलने की रफ्तार

पिथौरागढ़। जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयन पर्यावरण संस्थान अल्मोड़ा के निदेशक प्रो. सुनील नौटियाल ने अब तक हुए शोधों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 1985 से 2000 तक हिमालय और ग्लेशियरों में बर्फ पिघलने की रफ्तार दो से तीन गुना बढ़ी है। बताया कि 40 साल में हिमालयी क्षेत्रों में 440 अरब टन बर्फ पिघल चुकी है जो वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा रही है।
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बर्फबारी के बाद वास्तविक स्वरूप में लौटेगा हिमालय

वैज्ञानिकों ने हिमालयी क्षेत्रों में बर्फ पिघलने की रफ्तार बढ़ने पर चिंता जताई है। हालांकि जाड़ों का मौसम शुरू होने पर उनमें थोड़ी राहत भी है। उनके मुताबिक जाड़ों में अच्छी बर्फबारी होने की संभावना है। ऐसे में काली पड़ चुकीं हिमालय की श्रृंखलाओं में बर्फबारी होने से ये फिर से अपने वास्तविक स्वरूप में लौटेंगी।
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आदि कैलाश और कैलाश दर्शन को एक वर्ष में पहुंचे 28 हजार से अधिक यात्री

सीमांत जिले में आदि कैलाश और मानसरोवर दर्शन यात्रा शुरू होने से पर्यटन गतिविधियां तेजी से बढ़ीं हैं। आदि कैलाश और कैलाश दर्शन के लिए बीते एक वर्ष में ही 28 हजार से अधिक यात्री हिमालयी क्षेत्रों में पहुंचे हैं। यह सिलसिला जारी है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक हिमालयी क्षेत्रों में मानवीय दखल यहां के पर्यावरण असंतुलन की बड़ी वजह है। हिमालय के नजदीक वाहन पहुंचने, इनसे निकलने वाले कार्बन और बढ़ते मानवीय दखल से तापमान में बढ़ोतरी के साथ पर्यावरण भी परिवर्तित हो रहा है। नतीजतन, हिमालय श्रृंखलाओं में तेजी से बर्फ पिघल रही है। आदि कैलाश के नजदीक विश्व प्रसिद्ध पंचाचूली की हिमालयी श्रृंखलाओं के काला दिखने के पीछे भी यही वजह है। इन श्रृखंलाओं में बर्फ पिघलने से काली पहाड़ियां और पठार साफ नजर आ रहे हैं। संवाद

कोट

पर्यावरण असंतुलन पूरे विश्व की समस्या है। निश्चित तौर पर हिमालयी क्षेत्रों में मानवीय दखल बढ़ने से इसके गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं। हिमालयी श्रृंखलाओं के वजूद को बचाने के लिए विश्व स्तर पर प्रयास करने की जरूरत है। बर्फ पिघलने से ही पर्वत श्रृंखलाएं काली नजर आ रही हैं। भविष्य में बर्फबारी होने से ये अपने वास्तविक स्वरूप में लौटेंगी। - प्रो. सुनील नौटियाल, निदेशक, जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयन पर्यावरण संस्थान, अल्मोड़ा।
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