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थल के बालेश्वर मंदिर की छत टपकने लगी

Tue, 03 Feb 2015 12:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Tue, 03 Feb 2015 12:07 AM IST
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he roof of the temple was dripping ground Balasore

बारहवीं सदी में बने थल के बालेश्वर मंदिर के मुख मंडल भाग की मरम्मत न होने से इसकी छत बारिश में टपकती रहती है। करीब ढाई वर्ष पहले मंदिर के पास स्थित आम के पेड़ का एक हिस्सा टूटकर गिरने से मंदिर को नुकसान पहुंचा था। मंदिर के मुख्य छत्र की तो पुरातत्व विभाग ने मरम्मत कर दी है। उसमें लगी 12वीं सदी की लकड़ियों को बदल दिया गया है, लेकिन पेड़ टूटने से क्षतिग्रस्त हिस्से की अब तक मरम्मत नहीं हो पाई है। मंदिर के पुजारियों का कहना है कि यदि छत लगातार टपकती रही तो वह किसी भी समय गिर सकती है। इससे मंदिर को खतरा हो सकता है।

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बताया गया है कि 2013 में आपदा के समय मंदिर के पास स्थित आम का पेड़ की एक बड़ी टहनी टूटकर मंदिर के अग्र भाग (मुख मंडल) में गिर गई थी। इस मामले की जानकारी मंदिर के पुजारियों और स्थानीय लोगों ने पुरातत्व विभाग को दे दी थी, क्योंकि मंदिर के संरक्षण की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग के पास है। पुरातत्व विभाग के कहने पर वन निगम ने जुलाई 2014 में आम के पेड़ के शेष हिस्से को काटने के लिए घन लगाया था, लेकिन अब तक पेड़ को काटा नहीं गया है।

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इधर, पुजारी कृष्णानंद भट्ट ने बताया कि बारिश के समय मंदिर के एक हिस्से में पानी टपकने लगता है। लगातार पानी रिसने से लकड़ी सड़ जाएगी और छत के गिरने का खतरा रहेगा। उन्होंने तत्काल आम का पेड़ हटाने और छत की मरम्मत की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस धरोहर को बचाने के लिए गंभीरता से प्रयास होने चाहिए।
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मरम्मत का काम जल्दी शुरू होगा
थल। पुरातत्व विभाग अल्मोड़ा के अन्वेषण अधिकारी डा. सीएस चौहान का कहना है कि मंदिर की शेष छत की मरम्मत का काम जल्दी शुरू किया जाएगा। मंदिर की स्थिति का निरीक्षण किया जा चुका है। अब जल्दी ही मरम्मत के लिए धनराशि मिल जाएगी और काम शुरू कर दिया जाएगा।

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