{"_id":"58177b6f4f1c1bac31435b99","slug":"fireworks-burnt-50-million-in-pithoragarh","type":"story","status":"publish","title_hn":"पिथौरागढ़ में फूंके 50 लाख के पटाखे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पिथौरागढ़ में फूंके 50 लाख के पटाखे
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Mon, 31 Oct 2016 10:42 PM IST
विज्ञापन
पिथौरागढ़
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदूषण से वातावरण को बचाने की मुहिम का असर कहें या चीन निर्मित पटाखों का बहिष्कार इस बार दिवाली पर पटाखों की गूंज अन्य सालों की अपेक्षा धीमी रही। जिले में करीब 50 लाख के पटाखे फूटे। पिछले साल तक 60 से 70 लाख के पटाखे बिकते थे।
अन्य सालों दिवाली की शाम से ही आसमान में पटाकों की धमक दिखाई देने लगती थी। इस बार भी शाम होते ही पटाखे तो छूटे लेकिन उसकी धमक अन्य सालों की तरह नहीं थी। शाम छह बजे से शुरु हुआ पटाके फोडने का सिलसिला रात 10 बजे तक जारी रहा, लेकिन पटाखों की गूंज बता रही थी कि सोशियल मीडिया और अन्य माध्यमों से पटाखों का प्रयोग न करने की अपील काम करती दिखाई दे रही थी।
पटाखा बाजार में शाम 4 बजे के बाद सन्नाटा पसर गया था। हालांकि दिवाली के पहले रोज छोटी दिवाली को पटाखा बाजार में लोगों की खूब भीड़ दिखी। पटाखा का प्रयोग कम होने के पीछे बढ़ती महंगाई और आम आदमी की पहुंच से पटाखों के दूर होने को भी कारण माना जा रहा है।
विज्ञापन
जिले में अन्य सालों 60 से 70 लाख के पटाखे बिकते थे। जिला मुख्यालय के साथ ही गंगोलीहाट, बेड़ीनाग, थल, डीडीहाट, नाचनी, अस्कोट, जौलजीबी, मदकोट, मुनस्यारी, धारचूला, कनालीछीना में दिवाली की धूम रही। पटाखा बाजार
विज्ञापन
अन्य सालों दिवाली की शाम से ही आसमान में पटाकों की धमक दिखाई देने लगती थी। इस बार भी शाम होते ही पटाखे तो छूटे लेकिन उसकी धमक अन्य सालों की तरह नहीं थी। शाम छह बजे से शुरु हुआ पटाके फोडने का सिलसिला रात 10 बजे तक जारी रहा, लेकिन पटाखों की गूंज बता रही थी कि सोशियल मीडिया और अन्य माध्यमों से पटाखों का प्रयोग न करने की अपील काम करती दिखाई दे रही थी।
विज्ञापन
पटाखा बाजार में शाम 4 बजे के बाद सन्नाटा पसर गया था। हालांकि दिवाली के पहले रोज छोटी दिवाली को पटाखा बाजार में लोगों की खूब भीड़ दिखी। पटाखा का प्रयोग कम होने के पीछे बढ़ती महंगाई और आम आदमी की पहुंच से पटाखों के दूर होने को भी कारण माना जा रहा है।
विज्ञापन
जिले में अन्य सालों 60 से 70 लाख के पटाखे बिकते थे। जिला मुख्यालय के साथ ही गंगोलीहाट, बेड़ीनाग, थल, डीडीहाट, नाचनी, अस्कोट, जौलजीबी, मदकोट, मुनस्यारी, धारचूला, कनालीछीना में दिवाली की धूम रही। पटाखा बाजार