{"_id":"583dab5f4f1c1b9345de608e","slug":"fields-in-the-line-of-work-and-bank","type":"story","status":"publish","title_hn":"खेतों का काम छोड़कर बैंक की लाइन में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खेतों का काम छोड़कर बैंक की लाइन में
राजेश पंगरिया/अमर उजाला, झूलाघाट
Updated Tue, 29 Nov 2016 09:52 PM IST
विज्ञापन
गौरीहाट में ग्रामीण बैंक के आगे लगी लोगों की कतार
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नेपाल सीमा से सटे गौरीहाट कस्बा और उससे लगे गांवों के लोग नोटबंदी से खासी परेशानी में हैं। इलाके के ज्यादातर लोग खेतीबाड़ी से आजीविका चलाते हैं, लेकिन आठ नवंबर के बाद खेतों में काम के बजाए उनको पैसों के लिए बैंकों में लाइन लगानी पड़ रही है। मंगलवार सुबह नौ बजे से ही गांवों के लोग एकमात्र ग्रामीण बैंक की शाखा के सामने लाइन लगाकर खड़े हो गए। चार या पांच घंटे की इंतजारी के बाद लोगों को दो हजार रुपए मिल रहे हैं। आगे बैंक से पैसा कब मिलेगा कहा नहीं जा सकता।
विज्ञापन
नोटबंदी के बाद लोगों की जीवनशैली बदल सी गई है। खेतों में सूखा है तो जेब भी सूखी ही चल रही है। बड़ा सामान खरीदने या ज्यादा रकम वाला कोई बड़ा काम करने की तो लोग सोच तक नहीं रहे हैं। 1000 और 500 के पुराने नोट लोगों ने पहले ही बैंक में जमा करा दिए, लेकिन बैंक से उस अनुपात में भुगतान नहीं मिल पा रहा है। अक्सर चहल-पहल से भरे रहने वाले गौरीहाट कस्बे की बाजार में सुनसानी है। गांव के लोग खरीदारी के लिए नहीं आ रहे हैं। जो भी भीड़ है वह बैंक के आगे ही है। मंगलवार सुबह 11.30 बजे बैंक में कैश समाप्त हो गया। भुगतान के लिए खड़े लोग इसी इंतजार में रहे कि शायद कैश आएगा तो उनको भुगतान मिल सकता है।
विज्ञापन
सरकार द्वारा 500 और 1000 के नोट बंद करने और बैंकों में नए नियम लागू होने के बाद सीमांत कस्बे गौरीहाट के किसान, व्यापारी और विवाह वाले लोग परेशान हैं। कस्बे में उत्तराखंड ग्रामीण बैंक की एक ही शाखा है। मजिरकांडा, भटेड़ी, गैारीहाट, बिषखोली, बड़ालू, गैना, विपुल, खरक्यूड़ा सहित दर्जनों गांवों के लोग इसी बैंक पर निर्भर हैं। इन गांवों में अधिकांश लोग खेतीबाड़ी कर रोजगार चलाते हैं। बैंक की इस शाखा में 5000 से अधिक खाते हैं। नोटबंदी के बाद बैंक के पास कैश न होने की वजह से एक्सचेंज नहीं हो पाया। जिन लोगों के खाते थे, उन्होंने पुराने नोट खातों में जमा करा दिए और काउंटर से भुगतान लेने लगे। व्यापार संघ उपाध्यक्ष नरेंद्र धारियाल का कहना है कि गांवों में हालत बेहद खराब है।
विज्ञापन
अभी किसी को नहीं मिल रहा कर्ज
गौरीहाट ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक अजय सिंह टोलिया ने बताया कि काम ज्यादा होने की वजह से किसी को भी कर्ज नहीं दिया जा रहा है। शादी-विवाह वाले परिवार वालों को कार्ड दिखाकर 24000 रुपए तक दिए जा रहे हैं। फिलहाल बैंक लोगों को काम चलाने भर की ही रकम दे रहा है।
खाद और बीज के लिए लोग परेशान
गौरीहाट निवासी नारायन सिंह ने कहा कि नोटबंदी के कारण गांव के किसान परेशान हैं। बैंक से सिर्फ 2000 रुपए का एक नोट मिल रहा है। कैश समाप्त होते ही बैंक का शटर गिर जा रहा है। छोटी बाजार होने की वजह से बड़ा नोट तोड़ने की दिक्कत आ रही हैं। किसान के पास पैसा न होने की वजह से बीज, खाद आदि नहीं खरीद पा रहे हैं। बैंकों से इस समय किसानों को कर्ज भी नहीं मिल पा रहा है।
आगे समस्या और विकट होगी
गौरीहाट निवासी मोहन सिंह ने कहा कि किसान हमेशा से ही सरकार के नए निर्देशों का शिकार हुआ है। खेतों में बुवाई का समय आ रहा है। बैंकों के सख्त नियमों से गांव के लोग परेशान हैं। ग्रामीण क्षेत्र का बैंक होने की वजह से यहां कैश कम आ रहा है। समस्या आगे और विकट होगी। लोगों को सबसे पहले पैसा चाहिए।