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ब्लैक कार्बन के कारण लगातार बढ़ रहा है धरती का तापमान
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पिथौरागढ़। ब्लैक कार्बन बढ़ने के कारण धरती का तापमान लगातार बढ़ रहा है। ब्लैक कार्बन बढ़ने से ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। पर्यावरण में ब्लैक कार्बन बढ़ने का मुख्य कारण जंगलों की आग, धुआं, खुले में कूड़ा जलाना, गाड़ियों से निकलने वाला दूषित धुआं है।
बर्फीले क्षेत्रों में 217 पर क्यूबिक मीटर में ब्लैक कार्बन है। इस कारण ग्लेशियर लगातार बढ़ रहे हैं। ग्लेशियरों के पिघलने से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में छोटी-छोटी झीले बन जा रहीं हैं। झीलों के बढ़ने से प्राकृतिक आपदाओं का भी खतरा है। हाल ही जारी रिपोर्ट में विश्व बैंक ने कहा कि तेजी से बढ़ रहे ब्लैक कार्बन के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं।
जिला प्रशासन ने कुछ साल पूर्व रई स्थित यक्षावती नदी को संरक्षित करने की मुहिम चलाई थी। इसके लिए नदी क्षेत्र में वन विभाग के सहयोग से पौधरोपण अभियान भी चलाया था। इनमें से अधिकतर पौधे सूख चुके हैं। यक्षावती नदी में वर्ष 2016 में सिंचाई विभाग को मिनी डैम, जल संवर्धन, संरक्षण, पेयजल के लिए शासन से एक करोड़ छियासठ लाख रुपये की स्वीकृति मिली थी।
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अवैज्ञानिक तरीके से हो रहा विकास ला सकता है तबाही
पिथौरागढ़। कई जगह हो रहे अवैज्ञानिक विकास कार्य किए जा रहे हैं, उससे बड़ी तबाही भी हो सकती है। टनकपुर-पिथौरागढ़ बारहमासी सड़क के नाम पर लाखों पेड़ों को काट दिया गया। पहाड़ियों का कटान अवैज्ञानिक तरीके से किया गया। इस कारण हर बरसात में सड़क बंद हो जाती है। बारहमासी सड़क का मलबा सरयू नदी में डाला गया। इससे नदियों का प्रवाह प्रभावित हुआ है। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण तवाघाट-नाभीढांग सड़क का मलबा काली नदी में डाला गया है। इससे कई स्थानों पर छोटी-छोटी झीलें बन रहीं हैं। गुंजी-ज्योलिंगकांग सड़क के निर्माण के दौरान कुटी यांगती नदी में सड़क का मलबा डाल दिया गया है। इससे भी नदी का प्रवाह प्रभावित हुआ है।
पर्यावरण में ब्लैक कार्बन बढ़ने से लगातार बदलाव हो रहा है। ब्लैक कार्बन सौर ऊर्जा को ट्रैप कर रहा है। इस कारण तापमान बढ़ रहा है। इस कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और ग्लोबल वार्मिंग का खतरा बढ़ रहा है।
- डॉ. जेसी कुनियाल, विभागाध्यक्ष पर्यावरण आकलन परिवर्तन केंद्र, जीबी संस्थान, अल्मोड़ा।
लगातार हो रहे निर्माण कार्य के कारण वनस्पति का दोहन होता जा रहा है। अगर छोटे-बड़े गाड़ गधेरों का संरक्षण समय रहते नहीं किया गया तो भविष्य में बड़ा संकट पैदा हो सकता है।
मन्नू मटवाल (डफाली) हरेला सोसाइटी
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बर्फीले क्षेत्रों में 217 पर क्यूबिक मीटर में ब्लैक कार्बन है। इस कारण ग्लेशियर लगातार बढ़ रहे हैं। ग्लेशियरों के पिघलने से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में छोटी-छोटी झीले बन जा रहीं हैं। झीलों के बढ़ने से प्राकृतिक आपदाओं का भी खतरा है। हाल ही जारी रिपोर्ट में विश्व बैंक ने कहा कि तेजी से बढ़ रहे ब्लैक कार्बन के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं।
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जिला प्रशासन ने कुछ साल पूर्व रई स्थित यक्षावती नदी को संरक्षित करने की मुहिम चलाई थी। इसके लिए नदी क्षेत्र में वन विभाग के सहयोग से पौधरोपण अभियान भी चलाया था। इनमें से अधिकतर पौधे सूख चुके हैं। यक्षावती नदी में वर्ष 2016 में सिंचाई विभाग को मिनी डैम, जल संवर्धन, संरक्षण, पेयजल के लिए शासन से एक करोड़ छियासठ लाख रुपये की स्वीकृति मिली थी।
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अवैज्ञानिक तरीके से हो रहा विकास ला सकता है तबाही
पिथौरागढ़। कई जगह हो रहे अवैज्ञानिक विकास कार्य किए जा रहे हैं, उससे बड़ी तबाही भी हो सकती है। टनकपुर-पिथौरागढ़ बारहमासी सड़क के नाम पर लाखों पेड़ों को काट दिया गया। पहाड़ियों का कटान अवैज्ञानिक तरीके से किया गया। इस कारण हर बरसात में सड़क बंद हो जाती है। बारहमासी सड़क का मलबा सरयू नदी में डाला गया। इससे नदियों का प्रवाह प्रभावित हुआ है। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण तवाघाट-नाभीढांग सड़क का मलबा काली नदी में डाला गया है। इससे कई स्थानों पर छोटी-छोटी झीलें बन रहीं हैं। गुंजी-ज्योलिंगकांग सड़क के निर्माण के दौरान कुटी यांगती नदी में सड़क का मलबा डाल दिया गया है। इससे भी नदी का प्रवाह प्रभावित हुआ है।
पर्यावरण में ब्लैक कार्बन बढ़ने से लगातार बदलाव हो रहा है। ब्लैक कार्बन सौर ऊर्जा को ट्रैप कर रहा है। इस कारण तापमान बढ़ रहा है। इस कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और ग्लोबल वार्मिंग का खतरा बढ़ रहा है।
- डॉ. जेसी कुनियाल, विभागाध्यक्ष पर्यावरण आकलन परिवर्तन केंद्र, जीबी संस्थान, अल्मोड़ा।
लगातार हो रहे निर्माण कार्य के कारण वनस्पति का दोहन होता जा रहा है। अगर छोटे-बड़े गाड़ गधेरों का संरक्षण समय रहते नहीं किया गया तो भविष्य में बड़ा संकट पैदा हो सकता है।
मन्नू मटवाल (डफाली) हरेला सोसाइटी