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डायलिसिस के लिए तकनीशियन तो तैनात, लेकिन वेतन का फंसा पेंच
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जिला अस्पताल।
- फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। जिला अस्पताल में संचालित डायलिसिस यूनिट में तकनीशियन की तैनाती तो हो गई है। अभी तैनात किए गए तकनीशियन के लिए वेतन की व्यवस्था नहीं हो पाया है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग उसके वेतन जुटा रहा है। विभाग की ओर से इसके लिए एनएचएम को पत्र लिखा है।
जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट अगस्त में शुरू हो गई थी। मरीजों की परेशानियों को देखते हुए विभाग की ओर से यहां तकनीशियन की तैनाती भी कर दी है, जबकि यहां तकनीशियन का पद स्वीकृत नहीं है। ऐसे में तैनात तकनीशियन को वेतन देने में दिक्कत आ रही है। स्वास्थ्य विभाग के पास विभिन्न मदों में आने वाला बजट तय होता है। इससे पूर्व डायलिसिस के मरीजों का उपचार तीन माह का प्रशिक्षण प्राप्त एक डॉक्टर कर रहे थे, लेकिन तकनीशियन न होने के कारण कई बार डायलिसिस करने परेशानी हुई। इसको देखते हुए नवंबर में हल्द्वानी से आए डायलिसिस के तकनीशियन का स्वास्थ्य टीम ने ट्रायल लिया। पास होने पर उनकी तैनाती भी की गई। तैनात तकनीशियन डायलिसिस भी कर रहे हैं, लेकिन अभी उनके लिए वेतन की व्यवस्था नहीं हो पाई है।
मरीजों ने मंत्री के सामने भी रखा जा चुका है मामला
पिथौरागढ़। डायलिसिस यूनिट शुरू होने के कुछ समय बाद डायलिसिस का आरओ खराब हो गया था। इससे यूनिट में डायलिसिस बंद हो गया था। आरओ खराब होने और तकनीशियन के न होने के चलते मरीजों को दो से तीन बार डायलिसिस लोहाघाट में करानी पड़ी थी। डायलिसिस मरीज पूर्व पालिका उपाध्यक्ष रोबिन सिंह ने कुमाऊं आयुक्त और जिले के प्रभारी मंत्री के सामने भी तकनीशियन की तैनाती का मामला रखा था।
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जनप्रतिनिधियों को स्वास्थ्य सेवाओं से कोई लेना देना नहीं
पिथौरागढ़। कांग्रेस जिलाध्यक्ष त्रिलोक महर ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को इस तरफ ध्यान देना चाहिए, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर न जनप्रतिनिधि और न शासन, प्रशासन चिंतित है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को किसी भी मद से तकनीशियन के वेतन का भुगतान करना चाहिए।
डायलिसिस यूनिट में तकनीशियन का पद स्वीकृत नहीं है। इसके चलते उन्हें वेतन देने में दिक्कत आ रही है। उनके वेतन के लिए एनएचएम को पत्र भेजा गया है। उम्मीद है जल्द ही वेतन की स्वीकृति मिल जाएगी।
- डॉ. एचसी पंत, सीएमओ पिथौरागढ़।
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जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट अगस्त में शुरू हो गई थी। मरीजों की परेशानियों को देखते हुए विभाग की ओर से यहां तकनीशियन की तैनाती भी कर दी है, जबकि यहां तकनीशियन का पद स्वीकृत नहीं है। ऐसे में तैनात तकनीशियन को वेतन देने में दिक्कत आ रही है। स्वास्थ्य विभाग के पास विभिन्न मदों में आने वाला बजट तय होता है। इससे पूर्व डायलिसिस के मरीजों का उपचार तीन माह का प्रशिक्षण प्राप्त एक डॉक्टर कर रहे थे, लेकिन तकनीशियन न होने के कारण कई बार डायलिसिस करने परेशानी हुई। इसको देखते हुए नवंबर में हल्द्वानी से आए डायलिसिस के तकनीशियन का स्वास्थ्य टीम ने ट्रायल लिया। पास होने पर उनकी तैनाती भी की गई। तैनात तकनीशियन डायलिसिस भी कर रहे हैं, लेकिन अभी उनके लिए वेतन की व्यवस्था नहीं हो पाई है।
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मरीजों ने मंत्री के सामने भी रखा जा चुका है मामला
पिथौरागढ़। डायलिसिस यूनिट शुरू होने के कुछ समय बाद डायलिसिस का आरओ खराब हो गया था। इससे यूनिट में डायलिसिस बंद हो गया था। आरओ खराब होने और तकनीशियन के न होने के चलते मरीजों को दो से तीन बार डायलिसिस लोहाघाट में करानी पड़ी थी। डायलिसिस मरीज पूर्व पालिका उपाध्यक्ष रोबिन सिंह ने कुमाऊं आयुक्त और जिले के प्रभारी मंत्री के सामने भी तकनीशियन की तैनाती का मामला रखा था।
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जनप्रतिनिधियों को स्वास्थ्य सेवाओं से कोई लेना देना नहीं
पिथौरागढ़। कांग्रेस जिलाध्यक्ष त्रिलोक महर ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को इस तरफ ध्यान देना चाहिए, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर न जनप्रतिनिधि और न शासन, प्रशासन चिंतित है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को किसी भी मद से तकनीशियन के वेतन का भुगतान करना चाहिए।
डायलिसिस यूनिट में तकनीशियन का पद स्वीकृत नहीं है। इसके चलते उन्हें वेतन देने में दिक्कत आ रही है। उनके वेतन के लिए एनएचएम को पत्र भेजा गया है। उम्मीद है जल्द ही वेतन की स्वीकृति मिल जाएगी।
- डॉ. एचसी पंत, सीएमओ पिथौरागढ़।