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धौलाकोट सड़क : अब पेड़ काटने का मामला सामने आया
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Mon, 07 Dec 2015 10:35 PM IST
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मेरा गांव मेरी सड़क योजना के तहत 35 लाख रुपये की लागत से धौलाकोट के लिए बन रहे मार्ग पर अब सड़क निर्माण के दौरान पेड़ काटने का मामला सामने आया है। इसके अलावा सड़क में नेपाली मजदूरों के काम करने के मामले को दबाने के प्रयास शुरू हो गए हैं।
50 प्रतिशत धनराशि मनरेगा और 50 प्रतिशत धनराशि राज्यांश से सड़क निर्माण में खर्च हो रही है। वहीं, नेपाली मजदूरों को सड़क निर्माण के काम में लगाने से चर्चा में आई यह निर्माणधीन सड़क अब बगैर अनुमति के पेड़ों के कटान को लेकर विवादों में घिर गई है। लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण के नाम पर बेतहाशा पेड़ काटे गए हैं, जिसके लिए ब्लाक के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। ग्राम पंचायत की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। उधर, पेड़ कटान के मामले में वन रेंजर केआर टम्टा ने माना है कि वन भूमि की स्वीकृति नहीं ली गई है। शिकायत आती है तो पड़ताल की जाएगी।
वहीं बीडीओ कैलाश चंद्र जोशी ने सोमवार को मौके का मुआयना किया। उनका कहना था कि नेपाली मजदूरों से विकासखंड कार्यालय का कोई वास्ता नहीं है। इस काम का भुगतान ब्लाक कार्यालय से नहीं होगा। यह लोग अपने खेत की दीवार लगा रहे थे। विकासखंड कार्यालय को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राज्यांश की धनराशि से हो रहे काम में नेपाली मजदूर भी काम कर सकते हैं। फिर उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण का काम 16 नवंबर से काम बंद है। कुल मिलाकर ब्लाक कार्यालय अपनी नाकामी छुपाने के प्रयास में जुट गया है। सीडीओ विनोद गिरी गोस्वामी ने प्रकरण में विधिक कार्रवाई अमल में लाने की बात कही है। देखना है कि मेरा गांव मेरी सड़क को लेकर मचा बवाल किस मुकाम पर जाकर थमता है।
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50 प्रतिशत धनराशि मनरेगा और 50 प्रतिशत धनराशि राज्यांश से सड़क निर्माण में खर्च हो रही है। वहीं, नेपाली मजदूरों को सड़क निर्माण के काम में लगाने से चर्चा में आई यह निर्माणधीन सड़क अब बगैर अनुमति के पेड़ों के कटान को लेकर विवादों में घिर गई है। लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण के नाम पर बेतहाशा पेड़ काटे गए हैं, जिसके लिए ब्लाक के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। ग्राम पंचायत की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। उधर, पेड़ कटान के मामले में वन रेंजर केआर टम्टा ने माना है कि वन भूमि की स्वीकृति नहीं ली गई है। शिकायत आती है तो पड़ताल की जाएगी।
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वहीं बीडीओ कैलाश चंद्र जोशी ने सोमवार को मौके का मुआयना किया। उनका कहना था कि नेपाली मजदूरों से विकासखंड कार्यालय का कोई वास्ता नहीं है। इस काम का भुगतान ब्लाक कार्यालय से नहीं होगा। यह लोग अपने खेत की दीवार लगा रहे थे। विकासखंड कार्यालय को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राज्यांश की धनराशि से हो रहे काम में नेपाली मजदूर भी काम कर सकते हैं। फिर उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण का काम 16 नवंबर से काम बंद है। कुल मिलाकर ब्लाक कार्यालय अपनी नाकामी छुपाने के प्रयास में जुट गया है। सीडीओ विनोद गिरी गोस्वामी ने प्रकरण में विधिक कार्रवाई अमल में लाने की बात कही है। देखना है कि मेरा गांव मेरी सड़क को लेकर मचा बवाल किस मुकाम पर जाकर थमता है।
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