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कम हिमपात के कारण सूखने लगी कीड़ा जड़ी
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Tue, 10 May 2016 10:22 PM IST
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यारसागंबू की खोज करते ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
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यारसागंबू खोजने के लिए छिपलाकेदार, चर्थी बुग्याल, जिंबा ग्लेशियर, पंचाचूली बेस कैंप समेत अन्य इलाकों में बड़ी संख्या में लोग पहुंच तो गए हैं, लेकिन इस बार उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कम हिमपात होने के कारण यारसागंबू का कवक सूखा मिल रहा है। अब इन स्थानों पर पहुंचे लोग प्री-मानसून की बारिश के इंतजार में हैं, ताकि कवक नमी के कारण जमीन से बाहर आए और उसे खोदने में आसानी हो।
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मई प्रथम सप्ताह से यारसागंबू की खोज के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग बुग्यालों में जाते हैं। इस बार मौसम की विचित्रता के कारण पहले ही यह आशंका जताई जा रही थी कि इसका असर यारसागंबू के उत्पादन पर पड़ेगा। बताया गया कि यारसागंबू के कवक अधिकांश इलाकों में सूखी हालत में हैं। सूखी हुई यारसागंबू को निकालने से कोई फायदा नहीं होगा। कुछ कवक पानी की कमी से जमीन के अंदर ही सूख गए हैं। लोगों का कहना है कि इस बार यारसागंबू पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पा रहा है। हालांकि सैकड़ों की संख्या में लोग बुग्यालों में पहुंच चुके हैं।
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उन्होंने अपने कैंप लगा लिए हैं। वह बुग्यालों में टोह ले रहे हैं। यारसागंबू कम मिलने के कारण सभी को भटकना पड़ रहा है। अभी लोग जून के अंत तक बुग्यालों में रहेंगे और यारसागंबू की खोज जारी रखेंगे। बारिश होने पर कवक के जमीन से बाहर निकलने की उम्मीद है।
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मौसम में बदलाव से हुआ ऐसा
पिथौरागढ़। उच्च हिमालयी क्षेत्रों के बारे में जानकारी रखने वाले मोनाल संस्था के सचिव सुरेंद्र पंवार का कहना है कि इस बार यारसागंबू कम मात्रा में मिलेगा। हिमालयी क्षेत्रों में जमीन की नमी कम हो गई है। ग्लेशियरों के आसपास बर्फ की मात्रा कम है। इस कारण लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मौसम में आए बदलाव का असर यारसागंबू के उत्पादन पर भी पड़ रहा है।
गोल्फा के बुग्यालों में घुसे बाहरी लोग
मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। गोल्फा की प्रधान गंगोत्री देवी ने डीएम और एसडीएम को ज्ञापन भेजकर उनकी वन पंचायत को आवंटित क्षेत्र में बाहरी लोगों के घुसने की जानकारी दी है। कहा कि पिछले साल भी गोल्फा के लोगों को यारसागंबू की निकासी नहीं करने दी गई। बाहरी क्षेत्रों से अवैध रूप से घुस आने वाले लोग मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। प्रधान ने कहा कि एक सप्ताह पहले सूचना देने पर भी प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया है। बाहरी लोगों की दहशत के कारण गांव के लोग यारसागंबू की खोज के लिए बुग्यालों में नहीं जा पा रहे हैं।