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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   Driblue species of Seabuckthorn will be planted in high Himalayan forest panchayats in pithoragarh

Pithoragarh: उच्च हिमालयी वन पंचायतों में रोपा जाएगा ड्रिब्लू प्रजाति का सीबकथोर्न, पांच हजार पौधे लगाए जाएंगे

Mon, 28 Apr 2025 03:47 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़
अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़ Published by: हीरा मेहरा Updated Mon, 28 Apr 2025 03:47 PM IST
सार

धारचूला की ऊंचाई वाली वन पंचायतों में उच्च प्रजाति का सीबकथोर्न लगाया जाएगा। इससे भविष्य में क्षेत्र के किसानों को रोजगार उपलब्ध होगा। 

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Driblue species of Seabuckthorn will be planted in high Himalayan forest panchayats in pithoragarh
हिमाचल के कुल्लू में सीबकथोर्न के प्रशिक्षण के दौरान वैज्ञानिकों के साथ किसान। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विकासखंड धारचूला की ऊंचाई वाली वन पंचायतों में उच्च प्रजाति का सीबकथोर्न (वन चूक) लगाया जाएगा। इससे भविष्य में क्षेत्र के किसानों को रोजगार भी उपलब्ध होगा। वन विभाग पिथौरागढ़ के सहयोग से हिमाचल प्रदेश से 5000 वन चूक के पौधे लाए गए हैं, जिन्हें विभिन्न वन पंचायतों में लगाया जाएगा।

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प्रभागीय वनाधिकारी आशुतोष सिंह ने बताया कि 21 से 27 अप्रैल तक धारचूला विकास खंड के 14 कृषक एवं विभागीय कर्मचारियों को हिमाचल में विभिन्न जगहों पर प्रशिक्षण दिलाया गया। गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान के क्षेत्रीय केंद्र मौहल, कुल्लू में इंजीनियर आरके सिंह ने कृषकों को सीबकथोर्न की उपयोगिता, संरक्षण एवं मूल्य वृद्धि, कृषिकरण की जानकारी दी। संस्थान की वैज्ञानिक सरला ने सीबकथोर्न के माध्यम से किसानों की आजीविका को मजबूत बनाने का प्रशिक्षण दिया।

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कृषि विवि की केंद्रीय शाखा कुकुमसेरी (उदयपुर) में कृषकों को सीबकथोर्न की पौधशाला स्थापना की जानकारी दी गई। केलांग के पास सीबकथोर्न के पौधरोपण एवं कृषिकरण का प्रदर्शन करते हुए इसकी उपयोगिता, विपणन के बारे में बताया गया। खंगसार के प्रगतिशील कृषक अमर सिंह ठाकुर ने अपने बाग का भ्रमण कराते हुए पांच हजार पौध उपलब्ध कराई। टीम का नेतृत्व वैज्ञानिक डॉ. विजय प्रसाद भट्ट ने किया। प्रशिक्षण में वालिंग, बोन, नागलिंग एवं चल के सरपंच सुरेश नपच्याल, विक्रम धामी, वन रक्षक सागर मेहरा आदि शामिल रहे।

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हिमालयी संजीवनी है सीबकथोर्न
प्रभागीय वनाधिकारी आशुतोष सिंह ने बताया कि सीबकथोर्न उच्च शिखरीय क्षेत्रों में पर्यावरणीय एवं औषधीय दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण पौधा है। इसे हिमालय की संजीवनी के नाम से भी जाना जाता है। राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड की ओर से संचालित इस परियोजना के तहत सीबकथोर्न का वृहद स्तर पर वृक्षारोपण, उत्पादन एवं विपणन करने के उद्देश्य से कृषकों को राज्य के बाहर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सीबकथोर्न की ड्रिल्बू (उच्च किस्म) की प्रजाति है। इसमें फलों का आकार बड़ा एवं उत्पादन जंगली किस्म के सापेक्ष अधिक होता है।

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