फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   Dolly became support, system made me poor

डोली हो गई सहारा: ग्रामीणों को सिस्टम ने बना दिया बेचारा, अस्पताल पहुंचने के लिए करना पड़ा सुबह का इंतजार

Fri, 08 Nov 2024 03:12 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़
अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़ Updated Fri, 08 Nov 2024 03:12 PM IST
सार

सड़क न होने से क्वीटी के रुईसपाटा गांव की बीमार महिला को परिजन और ग्रामीण बदहाल रास्तों के बीच डोली के सहारे देर रात मुख्य सड़क तक ही पहुंचा सके। अस्पताल पहुंचने के लिए उसे अगली सुबह का इंतजार करना पड़ा और उसने दर्द से कराहते हुए रात काटी।

विज्ञापन
Dolly became support, system made me poor
बीमार महिला को डोली से लाते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पहाड़ों में जीवन पहाड़ से कम नहीं है। सड़क न होने से क्वीटी के रुईसपाटा गांव की बीमार महिला को परिजन और ग्रामीण बदहाल रास्तों के बीच डोली के सहारे देर रात मुख्य सड़क तक ही पहुंचा सके। अस्पताल पहुंचने के लिए उसे अगली सुबह का इंतजार करना पड़ा और उसने दर्द से कराहते हुए रात काटी।

विज्ञापन


रुईसपाटा गांव की भागीरथी देवी का स्वास्थ्य बीते बुधवार को अचानक बिगड़ गया। वह पेट दर्द से तड़प उठी। ग्रामीणों की मदद से परिजन उसे रात में ही डोली के सहारे लेकर उपचार के रवाना हुए। बदहाल रास्तों में खतरे के बीच ग्रामीणों को उसे चार किमी दूर मुख्य सड़क तक पहुंचाने में चार घंटे लगे। जिला मुख्यालय पहुंचाने के लिए वाहन नहीं मिल सके तो बीमार के साथ ही परिजनों को क्वीटी में ही रात बितानी पड़ी। किसी के घर में आशियाना खोजा गया और सभी सुबह होने का इंतजार करते रहे। ऐसे में बीमार महिला को दर्द से कराहते हुए रात बितानी पड़ी। सुबह हुई तो परिजन उसे वाहन से पांच घंटे के सफर के बाद 85 किमी दूर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे और तब जाकर उसे उपचार नसीब हुआ। पीएमएस डॉ. जेएस नबियाल ने कहा कि महिला का उपचार चल रहा है।
विज्ञापन


तेजम अस्पताल बना है रेफर सेंटर
क्वीटी और नाचनी क्षेत्र के लोगों के उपचार के लिए तेजम में खोले गए पीएचसी में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। विशेषज्ञ न होने से मरीजों को रेफर करना अस्पताल प्रबंधन की मजबूरी है। यही कारण रहा कि बीमार महिला को परिजन पीएचसी नहीं ले गए। परिजनों का कहना है कि यदि बीमार को पीएचसी ले जाया जाता तो उसे रेफर ही किया जाता। ऐसे में उसे जिला अस्पताल पहुंचाने का निर्णय लिया गया। पीएचसी में न तो जांच की सुविधा है और न बेहतर उपचार की।
विज्ञापन
विज्ञापन


डोली के सहारे अस्पताल जा रही गर्भवती का हुआ नदी किनारे प्रसव
इस वर्ष की शुरुआत में रुईसपाटा की एक गर्भवती को डोली के सहारे प्रसव के लिए अस्पताल लाया जा रहा था। गांव और मुख्य सड़क के बीच में जाकुला नदी किनारे गर्भवती ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। बेहतर सुविधाएं न होने से एक नवाजात की मौके पर ही मौत हो गई। प्रधान मुन्नी देवी, ग्रामीण जगदीश सिंह मेहता ने बताया कि घटना के चर्चा में आने से पीएमजीएसवाई ने तुरंत गांव को सड़क से जोड़ने के दावे किए थे जो अब तक हवाई साबित हुए हैं। कहा कि ग्रामीणों का दर्द सरकारी मशीनरी को नहीं दिख रहा है।

रुईसापाटा गांव को सड़क से जोड़ने के लिए क्या कार्यवाही हुई है इसकी जानकारी ली जाएगी। सड़क निर्माण के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे।
- मनमोहन बिजवाल, ईई, पीएमजीएसवाई, धारचूला।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed