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जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने बचाई जान
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Fri, 01 Sep 2017 10:40 PM IST
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जिला अस्पताल में बीमार चंदर राम की मदद करता चिकित्साकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
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गंभीर रूप से बीमार एक युवक को उसके परिजन जिला अस्पताल में छोड़कर घर चल दिए। बिना किसी तीमारदार के अस्पताल में पड़े इस युवक को लावारिस मानते हुए अस्पताल के डॉक्टरों ने मानवीय धर्म निभाया और उसका ऑपरेशन किया। यह युवक अब स्वस्थ है।
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राईआगर निवासी धन राम अपने बीमार बेटे चंदर राम (32) को 24 अगस्त को जिला अस्पताल लेकर आए। जिला अस्पताल के वरिष्ठ सर्जन डा. लाल सिंह बोरा ने चंदर राम को देखने के बाद कहा कि उसकी पेट की आंत फट गई है और मल तथा पेशाब बंद हो गई है। इसी कारण उसके पेट में दर्द हो रहा है। यदि तत्काल चंदर राम का ऑपरेशन नहीं किया गया तो जान खतरे में आ सकती है। इतना सुनते ही धन राम अस्पताल से घर के लिए निकल गए और बेटे को अस्पताल में ही छोड़ दिया। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने चंदर राम के पिता और पत्नी से संपर्क साधा तथा ऑपरेशन के समय अस्पताल में मौजूद रहने को कहा, लेकिन इन दोनों ने अस्पताल आने से मना कर दिया। बाद में डा. बोरा ने यह मामला मुख्य चिकित्साधीक्षक डा. केएस मेहता को बताया।
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डा. मेहता अवकाश पर थे, इसलिए उन्होंने मुख्य चिकित्साधीक्षक का काम देख रहे डा. केसी भट्ट से कहा कि वह मरीज की यथासंभव मदद करें। डा. बोरा और निश्चेतक डा. एचएस कौशिक ने करीब तीन घंटे के ऑपरेशन के बाद चंदर राम को स्वस्थ कर दिया है। डा. बोरा ने कहा कि अब मरीज को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं है। कुछ दिन अस्पताल में रखने के बाद उसे छुट्टी दी जाएगी। जरूरत पड़ी तो चंदर राम को घर तक छोड़ने की भी व्यवस्था की जाएगी। चंदर राम ने जिला अस्पताल के डॉक्टरों के इस व्यवहार की सराहना की है।
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