{"_id":"59076ac14f1c1b5a4644220a","slug":"disaster-victim-seeks-a-gutter-land","type":"story","status":"publish","title_hn":"बस्तड़ी के आपदा पीड़ित ने मांगी एक नाली जमीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बस्तड़ी के आपदा पीड़ित ने मांगी एक नाली जमीन
ब्यूरो/ अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Mon, 01 May 2017 10:35 PM IST
विज्ञापन
पिथौरागढ़ में डीएम से मिलने पहुंचे बस्तड़ी के आपदा प्रभावित।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सोमवार को जिलाधिकारी सी रविशंकर ने सुबह दस बजे से दूरदराज इलाकों से आने वालों की समस्याओं को सुना। कई प्रकार की समस्याओं को लेकर लोग पहुंचे। इनमें बस्तड़ी के आपदा पीड़ित भी थे। 30 जून 2016 की रात आपदा से तबाह हुए बस्तड़ी गांव के लोगों की समस्या अब तक हल नहीं हो पाई हैं।
कई परिवार ऐसे हैं जिनको अब तक मकान बनाने के लिए सुरक्षित जगह नहीं मिल पाई है। डीएम ने इन लोगों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए अधीनस्थ अधिकारियों से कहा है कि प्राथमिकता से समाधान किया जाए।
बस्तड़ी के आपदा पीड़ित केशवदत्त भट्ट 55 किलोमीटर का सफर तय कर सोमवार को सुबह करीब 10.30 बजे डीएम कार्यालय पहुंच गए। कुछ ही मिनटों में डीएम ने उनको मिलने के लिए अपने चैंबर में बुला लिया।
विज्ञापन
केशव दत्त ने बताया कि 30 जून 2016 की आपदा से उनका आवासीय मकान ध्वस्त हो गया। मकान में रखा सारा सामान, संपत्ति नष्ट हो गई। घटना के अगले दिन एक जुलाई को केशव दत्त अपने परिवार समेत जीआईसी सिंघाली में बनाए गए आपदा राहत कैंप में रहने को आ गए।
तब से उनका परिवार इसी कैंप में रुका हुआ है। केशव दत्त ने बताया कि बस्तड़ी की जमीन को भूवैज्ञानिकों ने रहने लायक नहीं बताया है। उनके पास गांव से हटकर थोड़ी सी जमीन थी तो वह सड़क निर्माण के दौरान कट गई है। वह अपने लिए नया मकान बनाना चाहते हैं। इसके लिए वन पंचायत की सुरक्षित जमीन का चयन किया गया है। उन्होंने कहा है कि यदि वन पंचायत में एक नाली जमीन मिल जाती तो वहां पर अपने लिए आशियाना बना लेते। उनको यकीन है कि डीएम के निर्देश के बाद उनको मकान बनाने के लिए जमीन मिल जाएगी।
विज्ञापन
कई परिवार ऐसे हैं जिनको अब तक मकान बनाने के लिए सुरक्षित जगह नहीं मिल पाई है। डीएम ने इन लोगों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए अधीनस्थ अधिकारियों से कहा है कि प्राथमिकता से समाधान किया जाए।
विज्ञापन
बस्तड़ी के आपदा पीड़ित केशवदत्त भट्ट 55 किलोमीटर का सफर तय कर सोमवार को सुबह करीब 10.30 बजे डीएम कार्यालय पहुंच गए। कुछ ही मिनटों में डीएम ने उनको मिलने के लिए अपने चैंबर में बुला लिया।
विज्ञापन
केशव दत्त ने बताया कि 30 जून 2016 की आपदा से उनका आवासीय मकान ध्वस्त हो गया। मकान में रखा सारा सामान, संपत्ति नष्ट हो गई। घटना के अगले दिन एक जुलाई को केशव दत्त अपने परिवार समेत जीआईसी सिंघाली में बनाए गए आपदा राहत कैंप में रहने को आ गए।
तब से उनका परिवार इसी कैंप में रुका हुआ है। केशव दत्त ने बताया कि बस्तड़ी की जमीन को भूवैज्ञानिकों ने रहने लायक नहीं बताया है। उनके पास गांव से हटकर थोड़ी सी जमीन थी तो वह सड़क निर्माण के दौरान कट गई है। वह अपने लिए नया मकान बनाना चाहते हैं। इसके लिए वन पंचायत की सुरक्षित जमीन का चयन किया गया है। उन्होंने कहा है कि यदि वन पंचायत में एक नाली जमीन मिल जाती तो वहां पर अपने लिए आशियाना बना लेते। उनको यकीन है कि डीएम के निर्देश के बाद उनको मकान बनाने के लिए जमीन मिल जाएगी।