{"_id":"62001efa0c8db567e474d322","slug":"demand-for-ganai-gangoli-block-pithoragarh-news-hld452986194","type":"story","status":"publish","title_hn":"इस बार विधानसभा चुनाव में गणाई ब्लॉक का मुद्दा काफूर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इस बार विधानसभा चुनाव में गणाई ब्लॉक का मुद्दा काफूर
विज्ञापन
Demand For Ganai Gangoli Block
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुंदन मेहता
गणाई गंगोली (पिथौरागढ़)। हर चुनाव में राष्ट्रीय पार्टियां गणाई गंगोली विकासखंड का मुद्दा प्रमुखता से उठाती हैं। 1987 में तत्कालीन सीएम एनडी तिवारी ने इसकी घोषणा की थी। इस बार के चुनाव में यह मुद्दा पूरी तरह से गायब है।
70 की दशक से चली आ रही गणाई विकासखंड बनाने की मांग आज तक भी पूरी नहीं हो पाने से लोग मायूस तो हैं ही, आक्रोशित भी हैं। बागेश्वर-अल्मोड़ा जिले की सीमा से लगे गणाई गंगोली से गंगोलीहाट ब्लॉक मुख्यालय आने जाने में 70 से 80 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। इस वजह से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
गणाई गंगोली की भौगोलिक विषमताओं को देखते हुए वर्ष 1970 से गणाई गंगोली को अलग ब्लॉक बनाने की मांग उठ रही है। इस मांग को लेकर लोगों ने लंबे समय तक आंदोलन भी किया। बकायदा संघर्ष समिति का भी गठन किया गया लेकिन आज तक कुछ भी नहीं हो सका। पिछले चुनावों तक राजनीतिक दल ब्लाक बनाने का आश्वासन देते थे लेकिन इस बार यह मुद्दा पूरी तरह गायब है।
विज्ञापन
सभी दल उठा चुके हैं मांग
गणाईगंगोली (पिथौरागढ़)। भाजपा-कांग्रेस के साथ ही अन्य दल भी अलग विकासखंड की मांग को उठा चुके हैं। निवर्तमान विधायक मीना गंगोला, पूर्व ज्येष्ठ उपप्रमुख श्याम सिंह पथनी, फकीर राम ग्वासिकोटी, गोकुल गंगोला, अशोक बोरा, हीरा सिंह बोरा, गोविंद भारती, स्व. चंद्र सिंह बिष्ट, स्व. हीरा बल्लभ उपाध्याय, स्व. राजेंद्र बाणी, स्व.फकीर राम, स्व.गोपाल राम समेत क्षेत्र के अन्य सामाजिक कार्यकर्ता भी आंदोलन के हिस्सा रहे हैं।
गणाई गंगोली को विकासखंड बनाने के लिए बड़े-बड़े आंदोलन किए मगर कुछ भी नहीं हुआ। हर चुनाव में ब्लॉक का मुद्दा रहता था लेकिन इस बार किसी भी पार्टी ने अपने एजेंडे में इसे शामिल नहीं किया, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। - श्याम सिंह पथनी, पूर्व ज्येष्ठ उपप्रमुख, गंगोलीहाट।
पहली बार ऐसा हुआ है कि राजनीतिक दल इस मुद्दे को भूल गए हैं। लगता है इस बार पार्टियों ने कुछ नया सोच रखा है। उम्मीद है कि जीतने के बाद जन प्रतिनिधि विकासखंड का मुद्दा जरूरी सदन में उठाएंगे। - अंजलि भैंसोड़ा, सामाजिक कार्यकर्ता, गणाई।
विज्ञापन
गणाई गंगोली (पिथौरागढ़)। हर चुनाव में राष्ट्रीय पार्टियां गणाई गंगोली विकासखंड का मुद्दा प्रमुखता से उठाती हैं। 1987 में तत्कालीन सीएम एनडी तिवारी ने इसकी घोषणा की थी। इस बार के चुनाव में यह मुद्दा पूरी तरह से गायब है।
70 की दशक से चली आ रही गणाई विकासखंड बनाने की मांग आज तक भी पूरी नहीं हो पाने से लोग मायूस तो हैं ही, आक्रोशित भी हैं। बागेश्वर-अल्मोड़ा जिले की सीमा से लगे गणाई गंगोली से गंगोलीहाट ब्लॉक मुख्यालय आने जाने में 70 से 80 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। इस वजह से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन
गणाई गंगोली की भौगोलिक विषमताओं को देखते हुए वर्ष 1970 से गणाई गंगोली को अलग ब्लॉक बनाने की मांग उठ रही है। इस मांग को लेकर लोगों ने लंबे समय तक आंदोलन भी किया। बकायदा संघर्ष समिति का भी गठन किया गया लेकिन आज तक कुछ भी नहीं हो सका। पिछले चुनावों तक राजनीतिक दल ब्लाक बनाने का आश्वासन देते थे लेकिन इस बार यह मुद्दा पूरी तरह गायब है।
विज्ञापन
सभी दल उठा चुके हैं मांग
गणाईगंगोली (पिथौरागढ़)। भाजपा-कांग्रेस के साथ ही अन्य दल भी अलग विकासखंड की मांग को उठा चुके हैं। निवर्तमान विधायक मीना गंगोला, पूर्व ज्येष्ठ उपप्रमुख श्याम सिंह पथनी, फकीर राम ग्वासिकोटी, गोकुल गंगोला, अशोक बोरा, हीरा सिंह बोरा, गोविंद भारती, स्व. चंद्र सिंह बिष्ट, स्व. हीरा बल्लभ उपाध्याय, स्व. राजेंद्र बाणी, स्व.फकीर राम, स्व.गोपाल राम समेत क्षेत्र के अन्य सामाजिक कार्यकर्ता भी आंदोलन के हिस्सा रहे हैं।
गणाई गंगोली को विकासखंड बनाने के लिए बड़े-बड़े आंदोलन किए मगर कुछ भी नहीं हुआ। हर चुनाव में ब्लॉक का मुद्दा रहता था लेकिन इस बार किसी भी पार्टी ने अपने एजेंडे में इसे शामिल नहीं किया, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। - श्याम सिंह पथनी, पूर्व ज्येष्ठ उपप्रमुख, गंगोलीहाट।
पहली बार ऐसा हुआ है कि राजनीतिक दल इस मुद्दे को भूल गए हैं। लगता है इस बार पार्टियों ने कुछ नया सोच रखा है। उम्मीद है कि जीतने के बाद जन प्रतिनिधि विकासखंड का मुद्दा जरूरी सदन में उठाएंगे। - अंजलि भैंसोड़ा, सामाजिक कार्यकर्ता, गणाई।