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Pithoragarh News: पहाड़ियों पर अटके बोल्डरों से झांक रही है मौत
Sat, 13 Jun 2026 10:57 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sat, 13 Jun 2026 10:57 PM IST
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मुनस्यारी सड़क पर नागीमल की पहाड़ी पर इस तरह अटके हैं बोल्डर। संवाद
पिथौरागढ़। सीमांत की सड़कों पर सुरक्षात्मक उपाय कर आवाजाही सुगम बनाने के साथ ही दुर्घटनाओं को रोकने के दावे परवान नहीं चढ़ पा रहे हैं। जिले के प्रमुख हाईवे सहित ग्रामीण सड़कों पर पहाड़ियों पर अटके बोल्डर इसका प्रमाण हैं। सामरिक और पर्यटन की दृष्टि से प्रमुख सड़कों पर अटके बोल्डर मौत बनकर झांक रहे हैं। ये बोल्डर कब काल बनकर गिर जाएं कोई पता नहीं है। पहले से ही अनियोजित तरीके से सड़कों का निर्माण करने से पहाड़ियां कमजोर हो गई हैं जो हल्की बारिश में भी दरकती हैं। मानसून काल नजदीक है। ऐसे में कमजोर पहाड़ियों पर अटके बोल्डर सीमांत जिले के लोगों के लिए मुसीबत खड़ी करने के साथ बड़ी दुर्घटना का भी कारण बन सकते हैं। संवाद न्यूज एजेंसी ने सड़कों के किनारे अटके खतरा बने बोल्डरों की पड़ताल की। पेश है इस पर एक रिपोर्ट। संवाद
घाट-पिथौरागढ़ ऑलवेदर सड़क पर आवाजाही नहीं है सुरक्षित
सीमांत की लाइफलाइन घाट-पिथौरागढ़ हाईवे का करोड़ों रुपये खर्च ऑलवेदर सड़क के रूप में विस्तार हुआ। सालों बाद भी इस सड़क पर कमजोर हो चुकी पहाड़ियों का दरकना बंद नहीं हो सका है। अब भी दिल्ली बैंड, घाट बैंड, गुरना सहित कई स्थानों पर कमजोर पहाड़ियों के ऊपर हजारों बोल्डर अटके हैं जो मौत बनकर झांक रहे हैं। घाट बैंड के पास हजारों टन मलबा डंप है और इसके ऊपर बड़े-बड़े बोल्डर अटके हैं। हल्की बारिश में भी मलबा और बोल्डर गिरने से आवाजाही बाधित हो रही है। मानसून काल में यदि बोल्डरों की बारिश हुई तो ये किसी बड़ी घटना का कारण बन सकते हैं। दिल्ली बैंड में भी पहाड़ी पर कई बोल्डर अटके हैं इन्हें अब तक नहीं हटाया जा सका है। संवाद
दारमा और व्यास घाटी को जोड़ने वाले हाईवे पर काल बनकर गिर रहे हैं बोल्डर
दारमा और व्यास घाटी, आदि कैलाश के साथ ही चीन सीमा को जोड़ने वाले पिथौरागढ़-लिपुलेख और सोबला-ढाकर सड़क पर पहाड़ी पर अटके बोल्डर काल बनकर गिर रहे हैं। सोबला-ढाकर सड़क पर पंगबावे के पास आए दिन बोल्डरों की बौछार हो रही है और पंचाचूली दर्शन के लिए पहुंचे यात्री जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं। बीते शुक्रवार ही इस स्थान पर बोल्डर गिरने से जीप में सवार दो लोगों को काल के गाल में समाना पड़ा। पलेटा, ढूसाखान, गुडौली, लखनपुर आदि स्थानों पर भी अटके बोल्डर हल्की हलचल में सड़क पर गिर रहे हैं।
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थल-मुनस्यारी सड़क पर भी खतर नहीं है कम
थल-मुनस्यारी सड़क पर्यटन के साथ ही सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस सड़क पर नागीमल, रातीगाड़, हरड़िया आदि स्थानों पर खतरनाक पहाड़ियां हैं जहां बोल्डर अटके हैं। बीते वर्ष नागीमल की पहाड़ी से बोल्डर गिरने से आधी सड़क का नामोनिशान मिट गया इससे 13 दिन से अधिक समय तक आवाजाही ठप रही।
बंगापानी में पहाड़ी से बोल्डर गिरने से दो लोगों की हो चुकी है मौत
पर्यटन नगरी मुनस्यारी के साथ ही चीन सीमा को जोड़ने वाली जौलजीबी-मुनस्यारी सड़क पर बंगापानी मुख्य बाजार के ऊपर वर्ष 2015 में पहाड़ी से गिरे बोल्डर की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई। एक भारी-भरकम बोल्डर दुकान के भीतर घुस गया था। तब से आए दिन पहाड़ी से बोल्डरों के गिरने का सिलसिला जारी है। अब भी व्यापारी और स्थानीय लोग दहशत के साए में रहने के लिए मजबूर हैं।
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घाट-पिथौरागढ़ ऑलवेदर सड़क पर आवाजाही नहीं है सुरक्षित
सीमांत की लाइफलाइन घाट-पिथौरागढ़ हाईवे का करोड़ों रुपये खर्च ऑलवेदर सड़क के रूप में विस्तार हुआ। सालों बाद भी इस सड़क पर कमजोर हो चुकी पहाड़ियों का दरकना बंद नहीं हो सका है। अब भी दिल्ली बैंड, घाट बैंड, गुरना सहित कई स्थानों पर कमजोर पहाड़ियों के ऊपर हजारों बोल्डर अटके हैं जो मौत बनकर झांक रहे हैं। घाट बैंड के पास हजारों टन मलबा डंप है और इसके ऊपर बड़े-बड़े बोल्डर अटके हैं। हल्की बारिश में भी मलबा और बोल्डर गिरने से आवाजाही बाधित हो रही है। मानसून काल में यदि बोल्डरों की बारिश हुई तो ये किसी बड़ी घटना का कारण बन सकते हैं। दिल्ली बैंड में भी पहाड़ी पर कई बोल्डर अटके हैं इन्हें अब तक नहीं हटाया जा सका है। संवाद
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दारमा और व्यास घाटी को जोड़ने वाले हाईवे पर काल बनकर गिर रहे हैं बोल्डर
दारमा और व्यास घाटी, आदि कैलाश के साथ ही चीन सीमा को जोड़ने वाले पिथौरागढ़-लिपुलेख और सोबला-ढाकर सड़क पर पहाड़ी पर अटके बोल्डर काल बनकर गिर रहे हैं। सोबला-ढाकर सड़क पर पंगबावे के पास आए दिन बोल्डरों की बौछार हो रही है और पंचाचूली दर्शन के लिए पहुंचे यात्री जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं। बीते शुक्रवार ही इस स्थान पर बोल्डर गिरने से जीप में सवार दो लोगों को काल के गाल में समाना पड़ा। पलेटा, ढूसाखान, गुडौली, लखनपुर आदि स्थानों पर भी अटके बोल्डर हल्की हलचल में सड़क पर गिर रहे हैं।
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थल-मुनस्यारी सड़क पर भी खतर नहीं है कम
थल-मुनस्यारी सड़क पर्यटन के साथ ही सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस सड़क पर नागीमल, रातीगाड़, हरड़िया आदि स्थानों पर खतरनाक पहाड़ियां हैं जहां बोल्डर अटके हैं। बीते वर्ष नागीमल की पहाड़ी से बोल्डर गिरने से आधी सड़क का नामोनिशान मिट गया इससे 13 दिन से अधिक समय तक आवाजाही ठप रही।
बंगापानी में पहाड़ी से बोल्डर गिरने से दो लोगों की हो चुकी है मौत
पर्यटन नगरी मुनस्यारी के साथ ही चीन सीमा को जोड़ने वाली जौलजीबी-मुनस्यारी सड़क पर बंगापानी मुख्य बाजार के ऊपर वर्ष 2015 में पहाड़ी से गिरे बोल्डर की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई। एक भारी-भरकम बोल्डर दुकान के भीतर घुस गया था। तब से आए दिन पहाड़ी से बोल्डरों के गिरने का सिलसिला जारी है। अब भी व्यापारी और स्थानीय लोग दहशत के साए में रहने के लिए मजबूर हैं।