{"_id":"67082049d973ac04ef092bd4","slug":"cultural-programmme-in-district-pithoragarh-news-c-230-1-shld1024-118926-2024-10-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pithoragarh News: को तुम श्यामल गौर शरीरा, क्षत्रिय रूप फिरहुं वन वीरा..","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pithoragarh News: को तुम श्यामल गौर शरीरा, क्षत्रिय रूप फिरहुं वन वीरा..
Fri, 11 Oct 2024 12:13 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 11 Oct 2024 12:13 AM IST
विज्ञापन
पिथौरागढ़। टकाना की रामलीला में सूर्पनखा का रावण दरबार में प्रवेश, मारीच का कपट मृग बनकर पंचवटी में जाना और सीता का राम को मृग लाने को कहना, मारीच का वध, सीता का लक्ष्मण काे राम की खोज में भेजना, लक्ष्मण के जाते ही रावण का जोगी वेश में पहुंचकर सीता का हरण करना, जटायु-रावण युद्ध, राम-लक्ष्मण का वन में मिलना, शबरी उद्धार, सुग्रीव का हनुमान को भेजना, हनुमान का ब्राह्मण रूप में राम से मिलने तक के दृश्यों का मंचन किया गया। हनुमान श्रीराम से परिचय लेते हुए कहते हैं, को तुम श्यामल गौर शरीरा, क्षत्रिय रूप फिरहुं वन वीरा..। इसके बाद श्रीराम अपना परिचय देते हैं।
रामलीला के मुख्य अतिथि पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संघ के संरक्षक जगत सिंह खाती थे। उन्होंने सभी से भगवान राम के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया। पिथौरागढ़ सदर की सातवें दिन की रामलीला में बाली सुग्रीव युद्ध का मंचन किया गया। लीला के मंचन की शुरुआत सीता खोज से शुरू हुई। इसके बाद वन-वन भटकते प्रभु राम का मतंग मुनि के आश्रम पहुंचना, प्रभु राम के शबरी के जूठे बेर खाना, शबरी का प्रभु राम को किसकिंदा नरेश बानर राज सुग्रीव से मैत्री के लिए कहना, राम-हनुमान की भेंट, हनुमान का लंका जाने तक के दृश्यों का मंचन किया गया।
विज्ञापन
रामलीला के मुख्य अतिथि पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संघ के संरक्षक जगत सिंह खाती थे। उन्होंने सभी से भगवान राम के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया। पिथौरागढ़ सदर की सातवें दिन की रामलीला में बाली सुग्रीव युद्ध का मंचन किया गया। लीला के मंचन की शुरुआत सीता खोज से शुरू हुई। इसके बाद वन-वन भटकते प्रभु राम का मतंग मुनि के आश्रम पहुंचना, प्रभु राम के शबरी के जूठे बेर खाना, शबरी का प्रभु राम को किसकिंदा नरेश बानर राज सुग्रीव से मैत्री के लिए कहना, राम-हनुमान की भेंट, हनुमान का लंका जाने तक के दृश्यों का मंचन किया गया।
विज्ञापन