{"_id":"5b92c320867a557fee0258ba","slug":"141536344864-pithoragarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"असामाजिक तत्वों के खिलाफ नहीं हो पाई कार्रवाई","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
असामाजिक तत्वों के खिलाफ नहीं हो पाई कार्रवाई
Updated Fri, 07 Sep 2018 11:57 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिथौरागढ़। चंपावत में हुई तिहरे हत्याकांड के बावजूद सीमांत की पुलिस और जिला प्रशासन नींद से नहीं जागा है। अलबत्ता जिला बदर की कार्रवाई में अब डीएम कोर्ट से तेजी जरूर आई है।
पुलिस विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 में नौ असामाजिक तत्वों के खिलाफ जिला बदर के लिए डीएम को रिपोर्ट भेजी गई। यह मामला अभी लटका है। डीएम की ओर से इस मामले में अब सुनवाई में तेजी आई है। इनके अलावा नेपाल के 11 ऐसे असामाजिक तत्व हैं, जिनकी पुलिस को तलाश है। इनके खिलाफ एनडीपीएस, मारपीट आदि के मामले यहां दर्ज हैं।
पुलिस कार्यालय के रीडर मोहन चंद्र का कहना है कि इनकी धरपकड़ के लिए सीमावर्ती थानों से लगातार संपर्क किया जा रहा है। सीमा पर तैनात प्रहरियों से भी जानकारी ली जा रही है। अधिकतर का नाम-पता गलत होने से दिक्कत हो रही है। पिथौरागढ़ जिले की नेपाल से लगती खुली सीमा है। इसका आपराधिक तत्व आसानी से फायदा उठाते हैं। गांवों में बुजुर्ग ही अधिक रह गए हैं। ऐसे में अंदेशा है कि आपराधिक तत्व कभी भी किसी बड़ी घटना को अंजाम दे सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
पुलिस विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 में नौ असामाजिक तत्वों के खिलाफ जिला बदर के लिए डीएम को रिपोर्ट भेजी गई। यह मामला अभी लटका है। डीएम की ओर से इस मामले में अब सुनवाई में तेजी आई है। इनके अलावा नेपाल के 11 ऐसे असामाजिक तत्व हैं, जिनकी पुलिस को तलाश है। इनके खिलाफ एनडीपीएस, मारपीट आदि के मामले यहां दर्ज हैं।
विज्ञापन
पुलिस कार्यालय के रीडर मोहन चंद्र का कहना है कि इनकी धरपकड़ के लिए सीमावर्ती थानों से लगातार संपर्क किया जा रहा है। सीमा पर तैनात प्रहरियों से भी जानकारी ली जा रही है। अधिकतर का नाम-पता गलत होने से दिक्कत हो रही है। पिथौरागढ़ जिले की नेपाल से लगती खुली सीमा है। इसका आपराधिक तत्व आसानी से फायदा उठाते हैं। गांवों में बुजुर्ग ही अधिक रह गए हैं। ऐसे में अंदेशा है कि आपराधिक तत्व कभी भी किसी बड़ी घटना को अंजाम दे सकते हैं।
विज्ञापन