फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   court order of Consumer Forum Pithauragarh

वाद के निस्तारण में देरी पर जिला उपभोक्ता आयोग ने जताया खेद

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 04 Apr 2021 11:47 PM IST
विज्ञापन
court order of Consumer Forum Pithauragarh
court order of Consumer Forum Pithauragarh
पिथौरागढ़। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक मामले में वाद निस्तारण में देरी के लिए वादी से क्षमा मांगी। राज्य में संभवत: यह पहला मामला है। जब वाद के निस्तारण में देरी पर उपभोक्ता आयोग ने खेद जताया हो।
विज्ञापन

जिले के नगथल गांव निवासी प्रवीण कुमार की कार 22 सितंबर 2010 को घर लौटते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। प्रवीण ने कार पर दो लाख रुपये का व्यक्तिगत बीमा लिया था। दुर्घटना में शत-प्रतिशत अक्षम होने के कारण वह तब बीमा क्लेम नहीं कर सके।
विज्ञापन

उन्होंने अप्रैल 2011 में बीमा कंपनी यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस लिमिटेड में बीमा क्लेम के लिए प्रार्थना पत्र दिया। जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने बीमा कंपनी के स्थानीय कार्यालय को नोटिस भेजा।
विज्ञापन
विज्ञापन

इस पर उन्हें बीमा जारी करने वाली कंपनी के कुरुक्षेत्र कार्यालय से संपर्क करने को कहा गया। जब उन्होंने कुरुक्षेत्र कार्यालय को नोटिस भेजा तो वहां से कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद प्रवीण ने उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया।
इस मामले में सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष एवं जिला जज डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा और सदस्य चंचल सिंह बिष्ट ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को आदेश दिया कि वह परिवादी प्रवीण को दो लाख रुपयेे एवं इस राशि पर परिवाद योजित करने के दिन से अंतिम भुगतान तक सात प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज भी अदा करे। इसके अतिरिक्त पांच हजार रुपये मानसिक कष्ट और पांच हजार वाद व्यय के रूप में भी परिवादी को अदा करने के निर्देश दिए।
10 वर्ष की किस्तों के हिसाब से पूरी राशि देने के निर्देश
पिथौरागढ़। जिला उपभोक्ता आयोग ने स्वधन ग्रुप इंश्योरेंस मास्टर पॉलिसी मामले की सुनवाई भी की।
मामले के अनुसार, सुशील खत्री ने भारतीय स्टेट बैंक की नाकोट शाखा में एसबीआई स्वधन ग्रुप इंश्योरेंस मास्टर पॉलिसी के तहत 10 वर्ष के लिए पालिसी की थी। इसकी प्रीमियम राशि प्रतिवर्ष 599 रुपये थी।
परिवादी को बताया गया था कि पॉलिसी की किस्त खाते से स्वत: ही कट जाएगी। जब परिपक्वता राशि लेने बैंक गया तो बैंक की ओर से 50 हजार के स्थान पर केवल 2212 रुपये ही खाते में डाले गए। कारण पूछने पर बैंक प्रबंधक ने बताया कि बैंक की शाखा कंप्यूटरीकृत हो रही थी। इस कारण किस्तें नहीं कट पाईं। ऐसे में राशि का भुगतान नहीं किया जा सकता है।

सुशील खत्री ने एसबीआई नाकोट और एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस के विरुद्ध मामले को उपभोक्ता आयोग में रखा। मामले में सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष एवं जिला जज डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने एसबीआई नाकोट और शाखा प्रबंधक एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस पिथौरागढ़ को आदेशित किया कि वे परिवादी को दस वर्ष की किस्तें 559 रुपये के हिसाब से पूर्ण राशि दें। इसके अतिरिक्त परिवादी को पांच हजार मानसिक कष्ट और पांच हजार वाद व्यय के रूप में भी अदा करने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed