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आत्महत्या के लिए उकसाने के दोषी को तीन साल की कैद
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Wooden gavel and books on wooden table, law concept
- फोटो : Court-00000.jpg
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पिथौरागढ़। जिला सत्र न्यायाधीश डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने महिला को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में दोषी को तीन वर्ष के कारावास और दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अर्थदंड नहीं देने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
थल क्षेत्र की एक विधवा महिला ने अगस्त 2018 में रामगंगा नदी में कूदकर आत्महत्या कर ली थी। महिला का शव एक माह बाद टनकपुर बैराज के पास से बरामद हुआ था। मृतका के घर में एक सुसाइड नोट मिला था, जिसमें महिला ने लेजम गोल निवासी राजेंद्र कुमार उर्फ राजू राम पर जबरन शारीरिक संबंध बनाने और वीडियो व फोटो बनाकर सार्वजनिक करने के कारण आत्महत्या करने के लिए मजबूर होने का आरोप लगाया था।
मृतका के परिजनों की तहरीर के आधार पर थल थाने में केस दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया। मामला जिला सत्र न्यायालय में चला। अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता प्रमोद पंत ने मामले की पैरवी करते हुए दस गवाह परीक्षित कराए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिला सत्र न्यायाधीश डॉ.ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने राजेंद्र कुमार उर्फ राजू राम को भारतीय दंड संहिता की धारा-306 के तहत तीन वर्ष के कारावास और दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा से दंडित किया।
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अर्थदंड की राशि पीड़िता के बच्चों को प्रतिकर के रूप में दी जाएगी। सत्र न्यायाधीश डॉ.ज्ञानेंद्र शर्मा ने कहा है कि प्रतिकर की राशि पर्याप्त नहीं है, इसलिए उन्होंने मृतका के दोनों नाबालिग बच्चों को प्रतिकर दिलाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव को इस प्रकरण को अगली बैठक में रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने दोनों नाबालिग बच्चों के सामाजिक, आर्थिक परिवेश और जिस स्कूल में वे पढ़ते हैं उसकी जानकारी भी बैठक में रखने के लिए कहा है।
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थल क्षेत्र की एक विधवा महिला ने अगस्त 2018 में रामगंगा नदी में कूदकर आत्महत्या कर ली थी। महिला का शव एक माह बाद टनकपुर बैराज के पास से बरामद हुआ था। मृतका के घर में एक सुसाइड नोट मिला था, जिसमें महिला ने लेजम गोल निवासी राजेंद्र कुमार उर्फ राजू राम पर जबरन शारीरिक संबंध बनाने और वीडियो व फोटो बनाकर सार्वजनिक करने के कारण आत्महत्या करने के लिए मजबूर होने का आरोप लगाया था।
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मृतका के परिजनों की तहरीर के आधार पर थल थाने में केस दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया। मामला जिला सत्र न्यायालय में चला। अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता प्रमोद पंत ने मामले की पैरवी करते हुए दस गवाह परीक्षित कराए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिला सत्र न्यायाधीश डॉ.ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने राजेंद्र कुमार उर्फ राजू राम को भारतीय दंड संहिता की धारा-306 के तहत तीन वर्ष के कारावास और दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा से दंडित किया।
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अर्थदंड की राशि पीड़िता के बच्चों को प्रतिकर के रूप में दी जाएगी। सत्र न्यायाधीश डॉ.ज्ञानेंद्र शर्मा ने कहा है कि प्रतिकर की राशि पर्याप्त नहीं है, इसलिए उन्होंने मृतका के दोनों नाबालिग बच्चों को प्रतिकर दिलाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव को इस प्रकरण को अगली बैठक में रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने दोनों नाबालिग बच्चों के सामाजिक, आर्थिक परिवेश और जिस स्कूल में वे पढ़ते हैं उसकी जानकारी भी बैठक में रखने के लिए कहा है।