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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   Construction of buildings with greenery also gulped

भवनों के निर्माण के साथ हरियाली भी लील गए

Sat, 12 Dec 2015 10:15 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Sat, 12 Dec 2015 10:15 PM IST
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1980 के बाद पिथौरागढ़ ने शहरीकरण के क्षेत्र में कदम रखा तो लोगों ने सबसे पहले इसकी हरियाली को समाप्त करने का ही काम किया। जिस स्थान पर पिथौरागढ़ शहर बसा है वहां पर पहले उपजाऊ खेत हुआ करते थे। पांडेगांव, खड़कोट, कुमौड़, लुंठ्यूड़ा गांव के लोग इनमें धान की खेती करते थे। पिथौरागढ़ के आसपास सटे इलाकों में भी धान की खेती होती थी। शायद तभी अंग्रेज इतिहासकार एटकिंशन ने इसे राइस बाउल (धान का कटोरा) नाम दिया था। यह राइस बाउल अब कंकरीट के जंगल में तब्दील हो गया है। इस समय पिथौरागढ़ नगर में हरियाली पांच प्रतिशत भी नहीं बची है। यहां खड़िक के बड़े बड़े पेड़ कहां चले गए इसका किसी को पता नहीं है। छोटे फलदार पेड़ों को भी लोगों ने मकान बनाने के लिए समाप्त कर दिया। इसके विकल्प के तौर पर लोगों ने यह भी कोशिश नहीं की कि हरियाली को छोटे पौधों से बचाया जाए।

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पिथौरागढ़ को स्मार्ट सिटी का दर्जा दिलाने की कोशिश हो रही है। जब यह शहर बसने लगा तो किसी ने भी यहां मास्टर प्लान लागू कराने का प्रयास नहीं किया। जब शहर पूरी तरह अव्यवस्थित तरीके से बस गया तो शहरी विकास मंत्रालय ने यहां पर मास्टर प्लान लागू कराने का आदेश दिया। तब पालिका के पास एक ही चारा बचता है कि नए मोहल्लों में मास्टर प्लान के मानक लागू किए जाएं। अभी तक कहीं पर मास्टर प्लान के हिसाब से सुविधाओं का विस्तार नहीं हुआ है। यदि मास्टर प्लान लागू हो जाता तो कम से कम नगर के 30 फीसदी हिस्से में हरियाली अनिवार्य रूप से मौजूद रहती।
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शहरीकरण ने खत्म किए पानी के स्रोत
नगर क्षेत्र में पहले पानी के 15 से ज्यादा पानी के प्राकृतिक स्रोत थे। इनमें से 80 फीसदी स्रोत सूख गए हैं। जो स्रोत बचे हैं उनका पानी पीने लायक नहीं है। अब नगर की संपूर्ण आबादी की निर्भरता जल संस्थान की योजना पर रह गई है। जमीन की नमी का स्तर लगातार कम हो रहा है। नगर क्षेत्र में सब्जी और फसल तैयार करने लायक जलवायु नहीं रह गई है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति समाप्त हो चुकी है।
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हरियाली बचाने की सोचें लोग
पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान चलाने वाले डा. पीतांबर अवस्थी का कहना है कि लोगों को सबसे पहले हरियाली बचाने का प्रयास करना चाहिए। घर के पास उपलब्ध खेतों में फूलों के पौधों का रोपण करें। घर के आसपास छोटे फलदार पौध लगाएं। उन्होंने कहा कि किसी खास आयोजन के समय घर के पास एक पौधा रोपने की प्रवृत्ति लोगों को विकसित करनी होगी। तभी शहर की सुंदरता बच पाएगी।

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