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सहस्त्रचंडी महायज्ञ का भंडारे के साथ समापन
ब्यूरो/अमर उजाला, गंगोलीहाट
Updated Wed, 24 May 2017 10:40 PM IST
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गंगोलीहाट में सहस्त्रचंडी के समापन पर भंडारे का प्रसाद लेते लोग
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्ध शक्तिपीठ हाट कालिका के दरबार में विश्व कल्याण के लिए आयोजित सहस्त्रचंडी महायज्ञ एवं श्रीमद् देवी भागवत कथा महायज्ञ का समापन बुधवार को पूर्णाहुति और विशाल भंडारे के साथ हो गया है। दस दिन तक चले इस महायज्ञ में हजारों श्रद्धालुओं ने मां का आशीर्वाद प्राप्त किया। चामुंडा, वैष्णवी देवी, क्षमा देवी, शीतला देवी, अंबिका देवी, मुक्तेश्वर, शैलेश्वर, वाणेश्वर, कांतेश्वर महादेव समेत तमाम पौराणिक मंदिरों में बुधवार सुबह पंडितों ने पूजा-अर्चना की।
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बुधवार सुबह से ही सिद्ध शक्तिपीठ हाट कालिका का दरबार भक्तिमय हो गया था। मुख्य यजमान डा. रनवीर रावल और उनकी पत्नी प्रमिला रावल ने देवी पूजन, मंडप पूजन, पूर्वांग पूजन, आचार्य एवं ब्राह्मण पूजन, वरण और पुस्तक पूजन किया। 108 ब्राह्मणों ने मंदिर परिसर में चंडी पाठ (दुर्गासप्तसती) किया। आचार्य मनोज पांडे ने प्रवचन दिए। महायज्ञ के पारायण और पूर्णाहुति के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, इसमें हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। सहस्त्रचंडी महायज्ञ के दौरान दस दिनों तक मंदिर में चहल पहल रही। आसपास के गांवों के अलावा पिथौरागढ़, बेड़ीनाग, अल्मोड़ा, बागेश्वर, हल्द्वानी से भी भक्त इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
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सहस्त्रचंडी के समापन पर संत पूजन भी हुआ
महाकाली दरबार में सहस्त्रचंडी के समापन अवसर पर संत पूजन का विशेष कार्यक्रम हुआ। कन्या पूजन के बाद महंत चेतन गिरी, महंत केशव गिरी, बलदेव गिरी, सारस्वत गिरी के अलावा अन्य संतों का पूजन किया गया। बड़ी संख्या में संत लोग सहस्त्रचंडी कार्यक्रम में शामिल हुए थे।
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वर्ष 2001 के बाद सहस्त्रचंडी महायज्ञ हुआ
महाकाली मंदिर में 2001 के बाद इस बार सहस्त्रचंडी महायज्ञ हुआ। जानकारों के अनुसार 1936 में भी यहां पर सहस्त्रचंडी महायज्ञ हुआ था। उसके बाद आगे भी कुछ वर्षों बाद लोग यह आयोजन करते रहे। 1936 के बाद यहां पांचवां आयोजन रहा। 1976, 1984, 2001 में भी सहस्त्रचंडी महायज्ञ हुए।
5000 लोगों के लिए चार क्विंटल आटे का प्रसाद
सहस्त्रचंडी महायज्ञ के समापन पर 5000 लोगों के लिए चार क्विंटल आटे का प्रसाद तैयार हुआ। गंगोलीहाट के रावल परिवारों ने सुबह तीन बजे से प्रसाद बनाना शुरू किया। अपरान्ह चार बजे तक लोग प्रसाद ग्रहण करते रहे।