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Pithoragarh News: सड़कों पर नई बसें दौड़ीं तो पुरानी वर्कशॉप में हो गईं खड़ीं
Sat, 14 Dec 2024 11:23 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sat, 14 Dec 2024 11:23 PM IST
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पिथौरागढ़। सीमांत जिले में चालक और परिचालकों की कमी निगम और यात्रियों पर भारी पड़ी है। सड़कों पर पांच साल बाद नई बसें तो दौड़ी लेकिन चालकों की कमी से पुरानी बसें वर्कशॉप में खड़ी हो गई हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है 28 पुरानी बसों को चलाने के चालक नहीं हैं और इन्हें वर्कशॉप में खड़ी करना पड़ा है। ऐसे में सड़कों से बसें गायब होने से यात्री बेबस हैं।
दरअसल पिथौरागढ़ डिपो को पांच साल बाद 28 नई बसें मिलीं हैं। अब डिपो के बेड़े में 86 बसें हैं। पहले से ही डिपो चालकों और परिचालकों की कमी से जूझ रहा है। डिपो में चालकों के 80 तो परिचालकों के 30 पद रिक्त हैं।
ऐसे में नई बसों में चालक और परिचालक तैनात करने से पुरानी 28 बसें वर्कशॉप में खड़ी हो गई हैं। चालकों की कमी से डिपो के लिए इनका संचालन करना मुश्मिल हो गया है। बसों के वर्कशॉप में खड़ी होने से इनकी सड़कों पर कमी हो गई हैं इसकी मार यात्री सह रहे हैं। मजबूरन उन्हें टैक्सी के सहारे सफर करना पड़ रहा है। ऐसे में नई बसें मिलने के बाद न तो डिपो को राहत मिली है और न यात्रियों को।
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कई बार चालकों की मांग कर चुका है डिपो
पिथौरागढ़। चालक न मिलने से डिपो के लिए सभी बसों को रूटों पर संचालित करना चुनौती बन गया है। डिपो लंबे समय से चालक और परिचालकों की मांग कर रहा है लेकिन अब तक कोई हल नहीं निकला। ऐसे में चालकों के बगैर बसों का संचालन न होने से डिपो को हर रोज डेढ़ लाख रुपये से अधिक का नुकसान झेलना पड़ रहा है।
पिथौरागढ़ डिपो के फोर मैन दीपक ज्याला का कहना है कि नई बस तो मिलीं लेकिन चालकों की कमी से पुरानी बसों का संचालन रोकना पड़ा है। करीब 28 बसों का संचालन प्रभावित हुआ है इससे निगम की आय भी घटी है। उम्मीद है डिपो को जल्द चालक मिलेंगे और सभी बसों का संचालन शुरू होगा।
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दरअसल पिथौरागढ़ डिपो को पांच साल बाद 28 नई बसें मिलीं हैं। अब डिपो के बेड़े में 86 बसें हैं। पहले से ही डिपो चालकों और परिचालकों की कमी से जूझ रहा है। डिपो में चालकों के 80 तो परिचालकों के 30 पद रिक्त हैं।
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ऐसे में नई बसों में चालक और परिचालक तैनात करने से पुरानी 28 बसें वर्कशॉप में खड़ी हो गई हैं। चालकों की कमी से डिपो के लिए इनका संचालन करना मुश्मिल हो गया है। बसों के वर्कशॉप में खड़ी होने से इनकी सड़कों पर कमी हो गई हैं इसकी मार यात्री सह रहे हैं। मजबूरन उन्हें टैक्सी के सहारे सफर करना पड़ रहा है। ऐसे में नई बसें मिलने के बाद न तो डिपो को राहत मिली है और न यात्रियों को।
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कई बार चालकों की मांग कर चुका है डिपो
पिथौरागढ़। चालक न मिलने से डिपो के लिए सभी बसों को रूटों पर संचालित करना चुनौती बन गया है। डिपो लंबे समय से चालक और परिचालकों की मांग कर रहा है लेकिन अब तक कोई हल नहीं निकला। ऐसे में चालकों के बगैर बसों का संचालन न होने से डिपो को हर रोज डेढ़ लाख रुपये से अधिक का नुकसान झेलना पड़ रहा है।
पिथौरागढ़ डिपो के फोर मैन दीपक ज्याला का कहना है कि नई बस तो मिलीं लेकिन चालकों की कमी से पुरानी बसों का संचालन रोकना पड़ा है। करीब 28 बसों का संचालन प्रभावित हुआ है इससे निगम की आय भी घटी है। उम्मीद है डिपो को जल्द चालक मिलेंगे और सभी बसों का संचालन शुरू होगा।