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धारचूला में बीएसएनएल की सेवा ठप
कृष्णा गर्ब्याल/अमर उजाला, धारचूला
Updated Mon, 13 Jul 2015 10:46 PM IST
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धारचूला के नेपाली संचार कंपनियों की सेवा लेने के लिए मजबूर हैं क्योंकि सुरक्षा कारणों का हवाला देकर यहां स्थापित बीएसएनएल के टावर काम ही नहीं करते हैं। अन्य निजी कंपनियों के टावर लगाने की अनुमति भी यहां नहीं है। इसके चलते धारचूला से हर महीने लाखों का राजस्व नेपाली संचार कंपनियों के खाते में जा रहा है।
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भारतीय नगर धारचूला से नेपाल के शहर दार्चुला की दूरी 500 मीटर है। बीच में झूलापुल है। लोगों का आवागमन निर्बाध रूप से होता रहता है। नेपाल ने दार्चुला जैसे सीमांत जिला मुख्यालय तक स्काई, नेरो, नमस्ते, नेपाल टेली कम्युनिकेशन का पुख्ता नेटवर्क स्थापित किया है। इसके विपरीत धारचूला में वर्ष 2009 में लगे बीएसएनएल के एक किलोवाट क्षमता वाले टावर की गत इतनी खराब है कि उससे बात कर पाना संभव नहीं है। धारचूला में बीएसएनएल का टावर लगाने के लिए भी बड़ा आंदोलन हुआ था। बाद में जब टावर लगाने की मंजूरी मिली तो सुरक्षा कारणों का रोना रोकर इसकी क्षमता बहुत कम कर दी गई। यह टावर मात्र दो किलोमीटर के रेंज में ही काम करता है। निजी कंपनियों ने धारचूला में अपना नेटवर्क स्थापित करने के प्रयास किए, लेकिन सुरक्षा कारणों से उनको भी अनुमति नहीं मिल पाई।
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अब धारचूला में स्थिति ऐसी है कि यहां पर सैकड़ों लोगों के पास नेपाल के स्काई, नमस्ते, नेपाल टेली कम्युनिकेशन की सिम हैं। अब बाजार में नेपाली सिम को रिचार्ज करने की सुविधा भी उपलब्ध है। यही नहीं चौदांस, व्यास, रांथी, जुम्मा, खेला, गलाती घाटी के लोगों के पास नेपाल के नेटवर्क वाले सिम ही मौजूद हैं। इससे एक सवाल यह खड़ा होता है कि जब धड़ल्ले से नेपाल के सिम प्रयोग में लाए जा रहे हैं तो उससे सुरक्षा का कोई खतरा नहीं हो सकता।
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व्यापार संघ ने छह माह पहले बीएसएनएल की लचर सेवाओं के खिलाफ व्यापक आंदोलन चलाया था। तब एसडीएम एके पांडे की की मध्यस्थता में हुई वार्ता में बीएसएनएल के महाप्रबंधक अशोक कुमार ने लिखित में आश्वासन दिया था कि ठाणीधार का नया टॉवर 10 जून से और कोटेरा का नया टावर एक जुलाई से काम करने लगेगा। लेकिन ये टावर अब तक काम नहीं कर रहे हैं। व्यापार संघ अध्यक्ष भूपेंद्र थापा ने कहा कि अब इन टॉवरों को संचालित करने की मांग को लेकर फिर से आंदोलन छेड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय संचार मंत्रालय को यह सोचना चाहिए कि हर महीने लाखों का राजस्व नेपाल की संचार कंपनियों को जा रहा है।
बैंकों का कामकाज ठप रहा
सोमवार को बीएसएनएल का नेटवर्क ठप होने से यहां बैंकों में कोर बैंकिंग सेवा ठप रही। स्टेट बैंक ने अपना वी-सेट अलग से लगा रखा है, लेकिन इसमें भी व्यवधान जारी रहा। अन्य बैंक पूरी तरह बीएसएनएल पर निर्भर हैं। उनका काम हमेशा ठप होता रहता है।