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बेलपट्टी के शहीद का पार्थिव शरीर नहीं पहुंचा, घर में कोहराम

Wed, 09 Aug 2017 10:52 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गंगोलीहाट/पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, गंगोलीहाट/पिथौरागढ़ Updated Wed, 09 Aug 2017 10:52 PM IST
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Belpatti's martyr's body does not reach, Kohram in house
सेना की पोशाक में शहीद पवन - फोटो : अमर उजाला

गंगोलीहाट के सुगड़ी (बेलपट्टी) के लाल शहीद पवन सुगड़ा (21) के घर में कोहराम मचा है। परिजनों के करुण क्रंदन से माहौैल बेहद गमगीन हो गया। शहीद का पार्थिव शरीर मौसम खराब होने के कारण बुधवार को उनके घर नहीं पहुंच पाया। पार्थिव शरीर सेना मुख्यालय बरेली में रखा गया है, जो बृहस्पतिवार को सुगड़ी लाया जाएगा।

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मंगलवार देर शाम जैसे ही पवन के शहीद होने की सूचना मिली, घर में कोहराम मच गया। आसपास के लोग परिजनों को ढांढस बंधाने पहुंच गए। बुधवार सुबह से आसपास के लोग शहीद के घर पहुंचने लगे। जैसे ही कोई परिजन शहीद के घर पहुंचता, शहीद की मां देवकी देवी, पिता दान सिंह और भाई धीरज, अविवाहित बहन वंदना उनसे लिपट जाते और दहाड़ मारकर रो पड़ते। किसी तरह लोगों ने परिजनों को संभाला। शहीद के पिता, भाई बार-बार यही कहते कि खेलने, कूदने की उम्र में पवन संसार से चला गया। उसके बगैर वह लोग कैसे रह पाएंगे।
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दोपहर में शहीद की बुआ भागीरथी देवी सुगड़ी पहुंची तो शहीद की बहन वंदना उनसे लिपटकर रोने लगी। शहीद के पिता, भाई और बहन बार-बार शहीद का पार्थिव शरीर आने की आस में राह तकती रहीं। शहीद की मां देवकी देवी को लगातार बेहोशी के दौरे पड़ रहे थे। जब भी उन्हें होश आता पवन कहकर फिर निढाल हो जातीं। बहन वंदना रो-रोकर कह रहीं थी कि 13 जून को जब भैय्या डेढ़ महीने की छुट्टी काटकर जा रहे थे तो जल्दी मिलने का वादा किया था। उन्होंने अपना वादा पूरा नहीं किया।
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चार भाई-बहनों में सबसे छोटा पवन परिवार में सबका लाड़ला था। गांव का भी वह चहेता था। पवन का बड़ा भाई धीरज उत्तराखंड पुलिस हल्द्वानी में कार्यरत है। उससे छोटी बहन रेनू नरग्वाड़ी (बहिलकोट गंगोलीहाट) में ब्याही हैं। पवन से बड़ी बहन अविवाहित वंदना ने गंगोलीहाट महाविद्यालय से एमए पास किया है। पवन के पार्थिव शरीर के इंतजार में दिनभर लोग रहे। मौसम की खराबी के कारण हेलीकॉप्टर सुबह जम्मू से उड़ नहीं पाया। मौसम ठीक होने के बाद अपरान्ह करीब चार बजे पार्थिव शरीर बरेली पहुंचा। पिथौरागढ़ सैन्य मुख्यालय में सैन्य टुकड़ी शव का इंतजार करती रही। शाम को करीब पांच बजे मौसम खराबी के कारण हेलीकॉप्टर के न आ पाने की सूचना मिली। बताया गया कि बृहस्पतिवार सुबह 9 बजे शहीद का पार्थिव शरीर पिथौरागढ़ पहुंचेगा। पिथौरागढ़ से सड़क मार्ग से शहीद का पार्थिव शरीर सुगड़ी ले जाया जाएगा।

पासआउट होने के पांच महीने में शहीद हो गए पवन
गंगोलीहाट। परिवार के लाड़ले पवन पासआउट होने के मात्र पांच महीने में शहीद हो गए। पवन फरवरी 2016 में 20 कुमाऊं रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। मार्च 2017 में वह पासआउट हुए। मई 2017 में डेढ़ महीने के अवकाश पर घर आए। 13 जून 2017 को वह छुट्टी बिताकर घर से यूनिट में गए। उनकी ड्यूटी बार्डर पर लग गई। 08 अगस्त 2017 को अविवाहित पवन पाकिस्तान की गोलीबारी में शहीद हो गए।

बेहतरीन क्रिकेटर था पवन
गंगोलीहाट। शहीद पवन सुगड़ा क्रिकेट के बेहतरीन खिलाड़ी थे। फुटबाल भी उन्हें पसंद था। बचपन से सेना में जाने की चाह रखने वाले पवन की कक्षा 1 से 10 तक की पढ़ाई की। घर के नजदीक राजकीय इंटर कॉलेज चौरपाल से शिक्षा ग्रहण की। पवन ने इंटर की शिक्षा विवेकानंद इंटर कॉलेज से हासिल की। बीए द्वितीय वर्ष की पढ़ाई के दौरान वह सेना में भर्ती हो गए।

24 घंटे बाद पहुंचा शासन का प्रतिनिधि
गंगोलीहाट। पवन के शहीद होने के 24 घंटे बाद बुधवार शाम 4 बजे शासन के प्रतिनिधि के रूप में गंगोलीहाट के एसडीएम वैभव गुप्ता शहीद के घर पहुंचे। बुधवार शाम 7 बजे तक सेना का कोई प्रतिनिधि शहीद के घर नहीं पहुंचा था। 24 घंटे बाद शासन के प्रतिनिधि के शहीद के घर पहुंचने और सेना के किसी भी अधिकारी के घर न पहुंचने से शहीद के परिजनों के साथ ही गांव के लोगों में नाराजगी थी। जनप्रतिनिधियों की बेरुखी भी स्पष्ट रूप से सामने आई। जनप्रतिनिधि के रूप में केवल गंगोलीहाट की ब्लॉक प्रमुख गंगा बिष्ट शहीद के घर पहुंचीं।


सैनिकों को अत्याधुनिक हथियार दे सरकार : शहीद के भाई
गंगोलीहाट। शहीद पवन सुगड़ा के बड़े भाई उत्तराखंड पुलिस में कार्यरत धीरज सुगड़ा का कहना था कि सरकार को सैनिकों को अत्याधुनिक हथियार उपलब्ध कराने चाहिए। उन्होंने पासआउट होने के मात्र तीन महीने बाद नियंत्रण रेखा पर तैनाती पर भी सवाल उठाया। कहा कि बार्डर पर अनुभवी जवानों की तैनाती होनी चाहिए। धीरज रोते हुए कह रहे थे कि हमारा भाई तो चला गया, अन्य के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए।। शहीद के पिता पूर्व सैनिक दान सिंह कह रहे थे कि सरकार पाकिस्तान को करारा सबक सिखाए तभी उनके दिल की आग ठंडी पड़ेगी।

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