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थल-लेजम सड़क पर डामर नहीं

Sun, 10 Sep 2017 10:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
ब्यूरो/अमर उजाला, थल Updated Sun, 10 Sep 2017 10:27 PM IST
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Asphalt on the thal-lejam road
इस हाल में पहुंची थल-लेजम सड़क - फोटो : अमर उजाला

थल से लेजम के लिए पांच किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण राज्य गठन से पहले 1999 में हो गया था, लेकिन इतने वर्षों में इस सड़क पर डामर नहीं हो पाया है। यह स्थिति तब है, जबकि पूर्व विधायक नारायण राम आर्य ने दो वर्ष पहले लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता के साथ सड़क का निरीक्षण किया था और सड़क पर शीघ्र हॉटमिक्स करने के निर्देश दिए थे। इस सड़क की स्थिति यह है कि बारिश के मौसम में चलने लायक नहीं रहती। जगह-जगह गड्ढे बने हैं और नालियों का निर्माण न होने से पानी सड़क पर बहता रहता है। लोनिवि के अधिकारियों का कहना है कि शासन ने सड़क के हॉटमिक्स या डामर के लिए धन उपलब्ध नहीं कराया।

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पांच किलोमीटर लंबी इस सड़क के रास्ते गोल, गडेरा, आमथल, कौली, भनारकोट, खितोली, लेजम, सुनेती, कदम, दड़मोली, अधौली, चानीगांव, शौकियाथल के लोग और स्कूली बच्चे आवाजाही करते हैं। बारिश के मौसम में यह सड़क चलने लायक नहीं रहती। नाराज लोगों ने अब सड़क पर डामर करने की मांग को लेकर आंदोलन चलाने का फैसला लिया है। कहा है कि 18 वर्ष पहले बनी सड़क पर अब तक डामर न होना गंभीर चिंता का विषय है।
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सड़क निर्माण की उच्चस्तरीय जांच हो
स्थानीय निवासी गोपाल दत्त पुनेठा का कहना है कि थल-लेजम सड़क के निर्माण की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। यदि जांच हो जाए तो सारी गड़बड़ी सामने आ सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क का निर्माण मानक के हिसाब से नहीं हुआ है। इसमें नालियां नहीं बनी हैं और सड़क के किनारे पैरापिट भी नहीं बनाए गए हैं।
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आवाज उठाने पर भी कार्रवाई नहीं
लेजम के पूर्व प्रधान विनोद पंत का कहना है कि वह अपने कार्यकाल में सड़क को पक्का करने के लिए कई बार आवाज उठा चुके हैं, लेकिन किसी पर कोई असर नहीं पड़ा। वह कहते हैं कि मुख्य अभियंता के आदेश के बाद भी सड़क पर डामर न होना संदेह पैदा करता है। वह कहते हैं कि क्षेत्र के लोग फिर से आंदोलन करेंगे।


सरकार को क्षेत्र की कोई चिंता नहीं
स्थानीय निवासी जीत बहादुर चंद का कहना है कि सरकार कुछ इलाकों की हमेशा उपेक्षा करती है। थल-लेजम सड़क को देखकर तो यही लगता है कि सरकार को यहां के लोगों की चिंता नहीं है और उनको असुविधा में रहने के लिए मजबूर किया गया है। यदि जल्दी डामर नहीं हुआ तो वह भूख हड़ताल शुरू कर देंगे।

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