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सात घंटे बंद रहा थल-मुनस्यारी मार्ग
ब्यूरो/अमर उजाला, नाचनी/धारचूला (पिथौरागढ़)।
Updated Fri, 19 Jun 2015 12:27 AM IST
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नाचनी और धारचूला में बुधवार रातभर जबरदस्त बारिश हुई। नाचनी क्षेत्र में तमाम आंतरिक सड़कें मलबा आने से बंद हो गई हैं। थल-मुनस्यारी सड़क हरड़िया में सात घंटे बंद रही।
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नाचनी में बुधवार शाम सात बजे से सुबह चार बजे तक लगातार बारिश होती रही। बारिश से रामगंगा का जलस्तर बढ़ गया है। नदी किनारे चल रहे तटबंध निर्माण के काम में व्यवधान आ गया है। थल-मुनस्यारी सड़क रात करीब 12 बजे हरड़िया में भारी मलबा आने से बंद हो गई।
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लोनिवि बृहस्पतिवार की सुबह सात बजे सड़क में यातायात बहाल कर पाया। भैंसकोट जाने वाली सड़क कुदीमा नाले के पास क्षतिग्रस्त हो गई है। तेजम-होकरा सड़क में जगह-जगह मलबा आ गया है। क्वीटी-सैंणराथी और नौलड़ा-नापड़ सड़क मलबे से पटी है। सड़क बंद होने से लोगों को कई किमी पैदल चलना पड़ रहा है। लोनिवि आंतरिक सड़कों को नहीं खोल सका है। उधर, धारचूला में रातभर रुक-रुककर हुई बारिश से कहीं नुकसान की खबर नहीं है। महाकाली नदी के जल स्तर में बढ़ोतरी हुई है।
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क्षेत्र में वर्षा होने से गर्मी से राहत मिली है और किसानों ने भी राहत की सांस ली है। बनबसा-टनकपुर क्षेत्र में 19 एमएम पानी बरसा है जो आम की फसल के लिए फायदेमंद बताया जा रहा है।
तड़के हुई वर्षा से मौसम सुहावना हो गया था। किसानों ने इस वर्षा को धान की पौध के लिए लाभदायक बताया। शारदा हेडवर्क्स के आंकड़ों के मुताबिक बृहस्पतिवार को क्षेत्र में 19 एमएम वर्षा रिकार्ड की गई है।
हालांकि अभी मानसून पहुंचने में समय है। राजकीय महाविद्यालय के भूगोल प्रवक्ता डा. एमएस चौहान ने बताया कि यह वर्षा लोकल रेन थी जिसे मैंगो शावर के नाम से जाना जाता है।
आम के पकने में इस वर्षा को लाभदायक माना जाता है। वर्षा से मौसम में कुछ समय ठंडक रही, लेकिन दोपहर बाद चटक धूप से उमस पैदा होने लगी थी।
विद्युत तारों पर पेड़ की टहनी गिरने से टनकपुर-बनबसा क्षेत्र में चार घंटे बिजली गुल रही। विभाग के अवर अभियंता परमिंदर सिंह ने बताया कि धनुषपुल के निकट सागौन के जंगलों में 33 हजार केवीए लाइन में पेड़ों की टहनी गिरने से लाइन क्षतिग्रस्त हो गई। सुबह 4.45 बजे से 8.35 बजे तक बिजली आपूर्ति ठप रही।