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Pithoragarh News: लाखों के गबन के मामले में अपील खारिज
Mon, 01 Apr 2024 11:02 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Mon, 01 Apr 2024 11:02 PM IST
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पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ में सहकारी सचिवों के वेतन बिलों में हेराफेरी कर लाखों का गबन करने वाले जिला सहकारी समिति के कैडर सचिव की अपील को सत्र न्यायाधीश ने खारिज कर दिया है। सत्र न्यायालय ने इस मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की ओर से दी गई सजा को बरकरार रखा है।
जिला शासकीय अधिवक्ता प्रमोद पंत के अनुसार जिला सहकारी समिति पिथौरागढ़ में कैडर सचिव के पद पर कार्यरत कृष्ण कुमार बोरा ने सहकारी सचिवों के वेतन बिलों में हेराफेरी कर लाखों रुपये अपने खाते में हस्तांतरित करवा लिए थे। सहकारी बैंक की ओर से इस मामले में पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई गई। पुलिस ने मामले की विवेचना कर कृष्ण कुमार बोरा के अलावा पटल प्रभारी, कैशियर और कनिष्ठ शाखा प्रबंधक के खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की न्यायालय में मामला प्रस्तुत किया था।
कृष्ण कुमार बोरा काे धारा 408 के आरोप में दोषसिद्ध करते हुए तीन वर्ष सश्रम कारावास की सजा और 25 हजार का अर्थदंड, धारा 420 में तीन वर्ष के कारावास और पांच हजार का अर्थदंड, धारा 471 में दो वर्ष का सश्रम कारावास और दो हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई गई थी।
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तीन अन्य आरोपियों को भी न्यायालय ने दंडित किया था। बाद में बैंक ने तीन अन्य की गलती न मानते हुए धनराशि कपांउड करते हुए तीनों के खिलाफ केस वापस ले लिया था। इस मामले में कृष्ण कुमार बोरा की ओर से सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में अपील की गई। सत्र न्यायाधीश शंकर राज ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत की सजा को बरकरार रखते हुए कृष्ण कुमार बोरा की अपील को खारिज कर दिया।
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वन्यजीव अधिनियम में तीन साल का साधारण कारावास
चंपावत। न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने वन्यजीव अधिनियम के दो साल पुराने मामले में आरोपी को दोषसिद्ध करते हुए तीन साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। न्यायिक मजिस्ट्रेट जहांआरा अंसारी की अदालत ने दोषी भगवान सिंह निवासी ग्राम कटवाल खेतीखान को वन्यजीव अधिनियम 1972 की धारा 51 के तहत तीन वर्ष का साधारण कारावास और 10 हजार के जुर्माने से दंडित किया है। जुर्माने की राशि अदा नहीं करने पर 30 दिन का अतिरिक्त कारावास भोगना पड़ेगा। वर्ष 2022 में नलिया मोड़ देवीधुरा में पुलिस और वन विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से अभियान चलाते हुए अभियुक्त के कब्जे से शरीर में पारदर्शी पन्नी में छुपाई तेंदुए की खाल बरामद की थी। अभियुक्त की पैरवी अधिवक्ता मनीषा उप्रेती और विभाग की ओर से अधिवक्ता रमेश चंद्र उप्रेती ने की। संवाद
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जिला शासकीय अधिवक्ता प्रमोद पंत के अनुसार जिला सहकारी समिति पिथौरागढ़ में कैडर सचिव के पद पर कार्यरत कृष्ण कुमार बोरा ने सहकारी सचिवों के वेतन बिलों में हेराफेरी कर लाखों रुपये अपने खाते में हस्तांतरित करवा लिए थे। सहकारी बैंक की ओर से इस मामले में पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई गई। पुलिस ने मामले की विवेचना कर कृष्ण कुमार बोरा के अलावा पटल प्रभारी, कैशियर और कनिष्ठ शाखा प्रबंधक के खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की न्यायालय में मामला प्रस्तुत किया था।
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कृष्ण कुमार बोरा काे धारा 408 के आरोप में दोषसिद्ध करते हुए तीन वर्ष सश्रम कारावास की सजा और 25 हजार का अर्थदंड, धारा 420 में तीन वर्ष के कारावास और पांच हजार का अर्थदंड, धारा 471 में दो वर्ष का सश्रम कारावास और दो हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई गई थी।
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तीन अन्य आरोपियों को भी न्यायालय ने दंडित किया था। बाद में बैंक ने तीन अन्य की गलती न मानते हुए धनराशि कपांउड करते हुए तीनों के खिलाफ केस वापस ले लिया था। इस मामले में कृष्ण कुमार बोरा की ओर से सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में अपील की गई। सत्र न्यायाधीश शंकर राज ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत की सजा को बरकरार रखते हुए कृष्ण कुमार बोरा की अपील को खारिज कर दिया।
वन्यजीव अधिनियम में तीन साल का साधारण कारावास
चंपावत। न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने वन्यजीव अधिनियम के दो साल पुराने मामले में आरोपी को दोषसिद्ध करते हुए तीन साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। न्यायिक मजिस्ट्रेट जहांआरा अंसारी की अदालत ने दोषी भगवान सिंह निवासी ग्राम कटवाल खेतीखान को वन्यजीव अधिनियम 1972 की धारा 51 के तहत तीन वर्ष का साधारण कारावास और 10 हजार के जुर्माने से दंडित किया है। जुर्माने की राशि अदा नहीं करने पर 30 दिन का अतिरिक्त कारावास भोगना पड़ेगा। वर्ष 2022 में नलिया मोड़ देवीधुरा में पुलिस और वन विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से अभियान चलाते हुए अभियुक्त के कब्जे से शरीर में पारदर्शी पन्नी में छुपाई तेंदुए की खाल बरामद की थी। अभियुक्त की पैरवी अधिवक्ता मनीषा उप्रेती और विभाग की ओर से अधिवक्ता रमेश चंद्र उप्रेती ने की। संवाद