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हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल नरुवाघोल गांव हुआ वीरान 

Sun, 23 Jul 2017 11:19 PM IST
कुंदन मेहता , ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
कुंदन मेहता , ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Sun, 23 Jul 2017 11:19 PM IST
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An example of Hindu-Muslim unity, the deserted village of Naruwaghol
नरुवाघ्‍ााोल - फोटो : अमर उजाला
 हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल ब्रिटिशकालीन प्रमुख पड़ाव नरुवाघोल अब वीरान हो गया है। कभी 18 परिवारों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाले नरुवाघोल में अब दो ही परिवार रहते हैं। असुविधा की मार से लोग एक-एक कर गांव से पलायन कर गए। 
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अतीत में नरुवाघोल हिंदू और मुस्लिम परिवारों के मेलजोल के लिए जाना जाता था। अस्कोट-कर्णप्रयाग पैदल मार्ग का प्रमुख पड़ाव नरुवाघोल एक समय में काफी खुशहाल था। पड़ाव में चहलपहल बनी रहती थी। मुख्य सड़क से मात्र एक किमी की दूरी पर बसे नरुवाघोल गांव में लेकिन सरकार मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पाई। सरकार से सुविधाओं की उम्मीद टूटी तो 90 के दशक से गांव के लोगों ने पलायन करना शुरू कर दिया। गांव के कुशल सिंह, कुंवर सिंह और गंगा सिंह का परिवार ग्वाड़ी में बस गया। इसी तरह अबरार अहमद, भूपाल सिंह, पृथ्वीराज सिंह, जीवन सिंह आदि के परिवार दिल्ली और अल्मोड़ा बस में गए। गांव में अब एक हिंदू जसवंत सिंह पथनी, और एक मुस्लिम अब्दुल शाहिद का परिवार रह गया है। सलिया पोस्टऑफिस का लेटरबॉक्स नरुवाघोल में भी लगा था। लेटरबाक्स तो अब भी नरुवाघोल में ही है, लेकिन पत्र डालने वाला कोई नहीं रह गया है। नरुवाघोल अब नायल के लिए बन रही सड़क से जुड़ गया है। नरुवाघोल की रंगत फिर से लौटाने के लिए लोग इस सड़क का सेराघाट से मिलान चाहते हैं। 
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दो परिवारों में नौ लोग
नरुवाघोल में रह रहे जसवंत सिंह पथनी के परिवार में पत्नी, दो बेटे और और दो बेटियां हैं। बड़ा बेटा आशीष (36) मिनी सहकारी बैंक काम करता है। छोटे बेटे कमलेश (19) ने पॉलीटेक्निक किया है। बड़ी लड़की सुगंधा (24) का विवाह चुका है। छोटी लड़की सोनिया (21) ने बी.कॉम की पढ़ाई पूरी की है। इसी तरह अब्दुल शाहिद के परिवार में पत्नी और दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी रेशमा (12) कक्षा 6 में जबकि रुखसाना (7) कक्षा दो में पढ़ती है। 
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सरकार सुविधा दे तो खुशहाल हो सकता है नरुवाघोल 
गणाईगंगोली। नरुवाघोल में रह रहे पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य जसवंत सिंह पथनी और अब्दुल शाहिद बताते हैं कि वह लोग 40 साल से यहां रह रहे हैं। कहते हैं कि गांव से 16 परिवार चले गए। सरकार सुविधा दे तो नरुवाघोल फिर खुशहाल हो सकता है। गांव की रंगत लौट सकती है।  



 
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