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दो साल पहले लिया प्रवेश अब जा रहे स्कूल
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Amarujala education Abhiyan in Pithauragarh
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पिथौरागढ़। दो साल पहले नर्सरी, यूकेजी, एलकेजी में प्रवेश लेने वाले बच्चे अब स्कूल जाने के लिए तैयार हैं। प्ले स्कूल के प्रबंधकों ने इसके लिए सभी तैयारी पूरी कर ली हैं। स्कूल में प्रवेश प्रक्रिया भी चल रही है। अभिभावक भी बच्चों को स्कूल भेजने के लिए पूरी तरह मन बना चुके हैं।
प्ले स्कूलों के हर कक्ष को पूरी तरह सैनिटाइज किया गया है। सुरक्षित दूरी का पालन का पूरा ध्यान स्कूल में रखा जा रहा है। शिक्षक-शिक्षिकाएं भी बच्चों को ज्ञान देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उनके मन में नन्हे बच्चों को पढ़ाने की जिज्ञासा है। प्ले स्कूलों में मिक्की माउस, स्लाइडर आदि खेल उपकरण बच्चों के लिए तैयार हैं। स्कूल विभिन्न खेल गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाने के लिए बेसब्री से बच्चों का इंतजार कर रहे हैं।
जो भी अभिभावक प्रवेश के लिए आ रहे हैं, उन्हें संक्रमण से बेफिक्र रहने के लिए आश्वास्त किया जा रहा है। बच्चों को खेल-खेल में सिखाने के सुझाव भी ले रहे हैं।
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- प्रदीप पांडेय, प्रबंधक, नॉर्थराइड स्कूल, पिथौरागढ़।
छोटे बच्चों को पढ़ाने के लिए पूरी तरह से मन बना लिया है। संक्रमण के दौर में हर किसी ने संघर्ष किया, लेकिन बच्चों को खेल गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। - अर्चना वल्दिया, नॉर्थराइड पब्लिक स्कूल, शिक्षक, पिथौरागढ़।
अब अपने बच्चों की देखभाल के साथ स्कूल में बच्चों को पढ़ाना एक चुनौती होगी। कोविड के दौर में खुद के बच्चे भी पढ़ाई से दूर हो गए थे। बच्चों को पढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। दीपा पाठक, नॉर्थराइड पब्लिक स्कूल, शिक्षक, पिथौरागढ़।
अभिभावकों की बैठक कर उनसे पढ़ाई को लेकर सुझाव लिए गए। छोटे बच्चों को विभिन्न खेल गतिविधियों से पढ़ाई कराई जा रही है। इससे उनमें पढ़ाई की प्रवृत्ति अधिक जाग सके। - अनिल वर्मा, ब्राइट माइंड, प्रबंधक, पिथौरागढ़।
कोविड ने बच्चों के जीवन को काफी प्रभावित किया है। छोटे बच्चों में पढ़ने की प्रवृति न के बराबर हो गई है। उन्हें बस मोबाइल में गेम्स, कार्टून ज्यादा पसंद आ रहे हैं। वंदना उप्रेती, ब्राइट माइंड प्ले स्कूल, शिक्षक, पिथौरागढ़।
बच्चे पढ़ाई के बदले मोबाइल में गेम्स, मूवी देखने में मशगूल हो गए हैं। ऐसे में उन्हें स्कूल भेजना बेहद जरूरी हो गया था। पूरा मन बनाकर उन्हें स्कूल भेजा है। स्कूल में सब अच्छा रहेगा। - अनुराग पांडेय, अभिभावक, पिथौरागढ़।
घर पर बच्चों को पढ़ाने की कोशिश की गई, लेकिन उनके स्तर में सुधार नहीं आया। अब संक्रमण कम होने लगा तो घरवालों की सहमति के बाद बच्चे को स्कूल भेजने का निर्णय लिया है। - नजराना, अभिभावक, पिथौरागढ़।
घर पर रहकर बच्चे को मोबाइल के अलावा कुछ नहीं सूझता था। बच्चे को लगता है मोबाइल अब उसके लिए बेहद जरूरी है। खाना भी खाना हो तो मोबाइल ही चाहिए। - अमित राना, अभिभावक, पिथौरागढ़।
स्कूलों में बढ़ीं ऑफलाइन शिक्षण गतिविधियां
चंपावत। कोरोना काल में बंद रहे स्कूलों के दो साल फिर से खुलने से ऑनलाइन शिक्षण संवाद के बजाय ऑफलाइन शिक्षण से संबंधित गतिविधियां अधिक होने लगी हैं। छात्र-छात्राओं को पढ़ाई लिखाई के साथ ही टीकाकरण कार्य से भी जुड़ना पड़ रहा है। इस कार्य में छात्र बड़ों की तरह ही टीकाकरण के लिए आगे आ रहे हैं।
ऑनलाइन पढ़ाई के समय में मिल टिप्स के जरिये बच्चों की ओर से टीका लगाने के लिए आसानी से पंजीकरण कराया जा रहा है। आजकल 12 से 14 वर्ष तक के किशोर-किशोरियों का टीकाकरण किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों की ओर से विभिन्न विद्यालयों में पहुंच कर 12 से 14 वर्ष और 15 से 18 वर्ष आयुवर्ग के किशोर-किशोरियों को कोरोना टीके की पहली और दूसरी डोज लगाई जा रही है। एबीसी अल्मामैटर स्कूल के प्रबंधक मदन महर के अनुसार बच्चे इस दौरान पठन-पाठन के साथ ही राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के संचालन में भी सहयोगी बने हैं। अभिभावक गोविंद बल्लभ, नरेश कुमार, हरीश चंद्र आदि का कहना है कि कोरोना काल में स्कूलों में छोटे बच्चों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के बाद ही प्रवेश दिलाया गया है।
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प्ले स्कूलों के हर कक्ष को पूरी तरह सैनिटाइज किया गया है। सुरक्षित दूरी का पालन का पूरा ध्यान स्कूल में रखा जा रहा है। शिक्षक-शिक्षिकाएं भी बच्चों को ज्ञान देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उनके मन में नन्हे बच्चों को पढ़ाने की जिज्ञासा है। प्ले स्कूलों में मिक्की माउस, स्लाइडर आदि खेल उपकरण बच्चों के लिए तैयार हैं। स्कूल विभिन्न खेल गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाने के लिए बेसब्री से बच्चों का इंतजार कर रहे हैं।
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जो भी अभिभावक प्रवेश के लिए आ रहे हैं, उन्हें संक्रमण से बेफिक्र रहने के लिए आश्वास्त किया जा रहा है। बच्चों को खेल-खेल में सिखाने के सुझाव भी ले रहे हैं।
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- प्रदीप पांडेय, प्रबंधक, नॉर्थराइड स्कूल, पिथौरागढ़।
छोटे बच्चों को पढ़ाने के लिए पूरी तरह से मन बना लिया है। संक्रमण के दौर में हर किसी ने संघर्ष किया, लेकिन बच्चों को खेल गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। - अर्चना वल्दिया, नॉर्थराइड पब्लिक स्कूल, शिक्षक, पिथौरागढ़।
अब अपने बच्चों की देखभाल के साथ स्कूल में बच्चों को पढ़ाना एक चुनौती होगी। कोविड के दौर में खुद के बच्चे भी पढ़ाई से दूर हो गए थे। बच्चों को पढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। दीपा पाठक, नॉर्थराइड पब्लिक स्कूल, शिक्षक, पिथौरागढ़।
अभिभावकों की बैठक कर उनसे पढ़ाई को लेकर सुझाव लिए गए। छोटे बच्चों को विभिन्न खेल गतिविधियों से पढ़ाई कराई जा रही है। इससे उनमें पढ़ाई की प्रवृत्ति अधिक जाग सके। - अनिल वर्मा, ब्राइट माइंड, प्रबंधक, पिथौरागढ़।
कोविड ने बच्चों के जीवन को काफी प्रभावित किया है। छोटे बच्चों में पढ़ने की प्रवृति न के बराबर हो गई है। उन्हें बस मोबाइल में गेम्स, कार्टून ज्यादा पसंद आ रहे हैं। वंदना उप्रेती, ब्राइट माइंड प्ले स्कूल, शिक्षक, पिथौरागढ़।
बच्चे पढ़ाई के बदले मोबाइल में गेम्स, मूवी देखने में मशगूल हो गए हैं। ऐसे में उन्हें स्कूल भेजना बेहद जरूरी हो गया था। पूरा मन बनाकर उन्हें स्कूल भेजा है। स्कूल में सब अच्छा रहेगा। - अनुराग पांडेय, अभिभावक, पिथौरागढ़।
घर पर बच्चों को पढ़ाने की कोशिश की गई, लेकिन उनके स्तर में सुधार नहीं आया। अब संक्रमण कम होने लगा तो घरवालों की सहमति के बाद बच्चे को स्कूल भेजने का निर्णय लिया है। - नजराना, अभिभावक, पिथौरागढ़।
घर पर रहकर बच्चे को मोबाइल के अलावा कुछ नहीं सूझता था। बच्चे को लगता है मोबाइल अब उसके लिए बेहद जरूरी है। खाना भी खाना हो तो मोबाइल ही चाहिए। - अमित राना, अभिभावक, पिथौरागढ़।
स्कूलों में बढ़ीं ऑफलाइन शिक्षण गतिविधियां
चंपावत। कोरोना काल में बंद रहे स्कूलों के दो साल फिर से खुलने से ऑनलाइन शिक्षण संवाद के बजाय ऑफलाइन शिक्षण से संबंधित गतिविधियां अधिक होने लगी हैं। छात्र-छात्राओं को पढ़ाई लिखाई के साथ ही टीकाकरण कार्य से भी जुड़ना पड़ रहा है। इस कार्य में छात्र बड़ों की तरह ही टीकाकरण के लिए आगे आ रहे हैं।
ऑनलाइन पढ़ाई के समय में मिल टिप्स के जरिये बच्चों की ओर से टीका लगाने के लिए आसानी से पंजीकरण कराया जा रहा है। आजकल 12 से 14 वर्ष तक के किशोर-किशोरियों का टीकाकरण किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों की ओर से विभिन्न विद्यालयों में पहुंच कर 12 से 14 वर्ष और 15 से 18 वर्ष आयुवर्ग के किशोर-किशोरियों को कोरोना टीके की पहली और दूसरी डोज लगाई जा रही है। एबीसी अल्मामैटर स्कूल के प्रबंधक मदन महर के अनुसार बच्चे इस दौरान पठन-पाठन के साथ ही राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के संचालन में भी सहयोगी बने हैं। अभिभावक गोविंद बल्लभ, नरेश कुमार, हरीश चंद्र आदि का कहना है कि कोरोना काल में स्कूलों में छोटे बच्चों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के बाद ही प्रवेश दिलाया गया है।