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Pithoragarh News: कादंबिनी गांगुली की तरह करें लोगों की सेवा
Tue, 03 Oct 2023 10:45 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 03 Oct 2023 10:45 PM IST
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पिथौरागढ़। देश की पहली प्रथम महिला चिकित्सक कादंबिनी गांगुली की तरह आगे बढ़कर अपराजिताओं को देश की सेवा करनी चाहिए। उन्होंने चहारदीवारी से निकलकर पढ़ाई की और मरीजों की सेवा का कदम उठाया। यह बातें मुख्य वक्ता सामाजिक चिंतक डॉक्टर तारा सिंह ने सोर वैली पब्लिक स्कूल में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स कार्यक्रम में कहीं।
मंगलवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से सोर वैली पब्लिक स्कूल में अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स कार्यक्रम का शुभारंभ स्कूल निदेशक डॉक्टर उमा पाठक ने किया। उन्होंने कहा कि अमर उजाला की यह पहल निश्चित तौर पर अपराजिताओं को आगे बढ़ाने में मददगार साबित होगी। इस तरह के कार्यक्रम निरंतर होने चाहिए। मुख्य वक्ता तारा सिंह ने बताया कि डॉक्टर कादंबिनी का जन्म 1861 में हुआ। जब संसाधन सीमित थे, लड़कियां स्कूल नहीं जातीं थी। उनके पिता ने उनका पूरा समर्थन किया।
उन्होंने 1883 में स्नातक की डिग्री प्राप्त की और मेडिकल की पढ़ाई कर देश की पहली चिकित्सक बनी। इस दौर में महिलाओं को बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी, इन सबके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और चिकित्सक बन मरीजों की सेवा का संकल्प लिया और तीन अक्तूबर 1923 को उन्होंने अंतिम सांस ली। प्रधानाचार्य लीलावती जोशी ने कहा कि अमर उजाला फाउंडेशन महिलाओं को जागरूक कर समाज में उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है। यह पहल मील का पत्थर साबित होगी। इस दौरान वरिष्ठ शिक्षक ललित पाटनी, शिक्षिका किरन भंडारी शामिल रहे।
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मंगलवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से सोर वैली पब्लिक स्कूल में अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स कार्यक्रम का शुभारंभ स्कूल निदेशक डॉक्टर उमा पाठक ने किया। उन्होंने कहा कि अमर उजाला की यह पहल निश्चित तौर पर अपराजिताओं को आगे बढ़ाने में मददगार साबित होगी। इस तरह के कार्यक्रम निरंतर होने चाहिए। मुख्य वक्ता तारा सिंह ने बताया कि डॉक्टर कादंबिनी का जन्म 1861 में हुआ। जब संसाधन सीमित थे, लड़कियां स्कूल नहीं जातीं थी। उनके पिता ने उनका पूरा समर्थन किया।
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उन्होंने 1883 में स्नातक की डिग्री प्राप्त की और मेडिकल की पढ़ाई कर देश की पहली चिकित्सक बनी। इस दौर में महिलाओं को बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी, इन सबके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और चिकित्सक बन मरीजों की सेवा का संकल्प लिया और तीन अक्तूबर 1923 को उन्होंने अंतिम सांस ली। प्रधानाचार्य लीलावती जोशी ने कहा कि अमर उजाला फाउंडेशन महिलाओं को जागरूक कर समाज में उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है। यह पहल मील का पत्थर साबित होगी। इस दौरान वरिष्ठ शिक्षक ललित पाटनी, शिक्षिका किरन भंडारी शामिल रहे।
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