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अब बच्चे तीन घंटे पहले ही पहुंच जाते हैं स्कूल
Sun, 21 Apr 2019 10:10 PM IST
kamlesh kamlesh
ब्यूरो/ अमर उजाला , मुनस्यारी (पिथौरागढ़)।
ब्यूरो/ अमर उजाला , मुनस्यारी (पिथौरागढ़)।
Published by: kamlesh kamlesh
Updated Sun, 21 Apr 2019 10:10 PM IST
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नीरज जानी, आर्किटेक्ट इंजीनियर।
- फोटो : पिथौरागढ़
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अहमदाबाद के आर्किटेक्ट नीरज ने मुनस्यारी के गांधीनगर गांव में बच्चों के पढ़ने और उन्हें पढ़ाने का तरीका ही बदल दिया। नीरज जानी की उपस्थिति का ही सबब है कि जिस स्कूल में बच्चे दस बजे तक भी नहीं पहुंचते थे, उसी स्कूल में बच्चे अब सुबह सात बजे से ही मंडराने लगते हैं।
अहमदाबाद के स्कूल ऑफ प्लानिंग से एमटेक (आर्किटेक्चर) नीरज जानी के मुताबिक मुनस्यारी के कई गांवों में शिक्षा की चिंताजनक स्थिति है। इस पर उन्होंने यहां आकर बच्चों को पढ़ाने का फैसला किया। दिसंबर 2018 में मुनस्यारी पहुंचकर जानकारी जुटाई और गांधीनगर गांव को चयनित किया। गांव पहुंचकर प्रधान बसंत राम से बातचीत कर गांव में ही रहने का निर्णय लिया। बकौल नीरज गांव में कोई अजनबी रहने लगे तो लोगों के मन में कई तरह की शंकाएं उत्पन्न होती हैं। उन्होंने उपजिलाधिकारी और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी से अनुमति ली और साथ ही पुलिस से सत्यापन के बाद गांधीनगर स्थित प्राथमिक विद्यालय पहुंच पढ़ाना शुरू किया।
उन्होंने बताया कि पहले सुबह नौ बजे स्कूल खुल जाता था और बच्चे 10 बजे तक भी स्कूल नहीं पहुंचते थे। अभिभावक भी अधिक जागरूक नहीं थे। इन तीन महीनों में बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों में भी बदलाव आया है। अब बच्चे सुबह सात बजे उनके पास पहुंच रहे हैं। उनके शैक्षिक स्तर में भी काफी सुधार देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि सुबह सात से शाम छह बजे तक वे बच्चों के ही बीच ही रहते हैं। लैपटॉप और टेबलेट से भी बच्चों को सिखाते हैं। अब उनके तीन मित्र भी उनके इस अभियान से जुड़ने सोमवार तक गांधीनगर पहुंचने वाले हैं। उनका कहना है कि जब तक बच्चों में सकारात्मक परिवर्तन नहीं आता है तब तक वे गांधीनगर में रहेंगे।
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अहमदाबाद के स्कूल ऑफ प्लानिंग से एमटेक (आर्किटेक्चर) नीरज जानी के मुताबिक मुनस्यारी के कई गांवों में शिक्षा की चिंताजनक स्थिति है। इस पर उन्होंने यहां आकर बच्चों को पढ़ाने का फैसला किया। दिसंबर 2018 में मुनस्यारी पहुंचकर जानकारी जुटाई और गांधीनगर गांव को चयनित किया। गांव पहुंचकर प्रधान बसंत राम से बातचीत कर गांव में ही रहने का निर्णय लिया। बकौल नीरज गांव में कोई अजनबी रहने लगे तो लोगों के मन में कई तरह की शंकाएं उत्पन्न होती हैं। उन्होंने उपजिलाधिकारी और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी से अनुमति ली और साथ ही पुलिस से सत्यापन के बाद गांधीनगर स्थित प्राथमिक विद्यालय पहुंच पढ़ाना शुरू किया।
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उन्होंने बताया कि पहले सुबह नौ बजे स्कूल खुल जाता था और बच्चे 10 बजे तक भी स्कूल नहीं पहुंचते थे। अभिभावक भी अधिक जागरूक नहीं थे। इन तीन महीनों में बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों में भी बदलाव आया है। अब बच्चे सुबह सात बजे उनके पास पहुंच रहे हैं। उनके शैक्षिक स्तर में भी काफी सुधार देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि सुबह सात से शाम छह बजे तक वे बच्चों के ही बीच ही रहते हैं। लैपटॉप और टेबलेट से भी बच्चों को सिखाते हैं। अब उनके तीन मित्र भी उनके इस अभियान से जुड़ने सोमवार तक गांधीनगर पहुंचने वाले हैं। उनका कहना है कि जब तक बच्चों में सकारात्मक परिवर्तन नहीं आता है तब तक वे गांधीनगर में रहेंगे।
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