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Pithoragarh News: जिस रास्ते पर आठ साल से कोई नहीं चलता वहां बन रहा लकड़ी का पुल
Tue, 25 Nov 2025 10:58 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 25 Nov 2025 10:58 PM IST
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बुंगबुंग गांव में कालकोदयारी गधेरे में बन रहा लकड़ी का कच्चा पुल। स्रोत:ग्रामीण
पिथौरागढ़। आठ साल पहले आपदा में बह गया झूलापुल अब तक नहीं बना। अब गांव तक सड़क भी पहुंच गई। अब सड़क पहुंचने के बाद जिस रास्ते पर कोई नहीं चलता वहां आपदा मद से लकड़ी का पुल बन रहा है। यह मामला धारचूला विकासखंड के बुंगबुंग गांव का है। इसकी हर तरफ चर्चा हो रही है।
दरअसल वर्ष 2013 की आपदा में धारचूला विकासखंड के बुंगबुंग में कालकोदयारी गधेरे पर बना झूलापुल बह गया था। पुल के साथ ही पैदल रास्ता भी क्षतिग्रस्त होकर रोखड़ में बदल गया। तब से लेकर आज तक यहां झूलापुल निर्माण करने की जरूरत किसी ने महसूस नहीं की। तब इस पैदल रास्ते पर आवाजाही करना असंभव हुआ तो ग्रामीणों को दूसरा रास्ता चुनना पड़ा। वर्ष 2022 में गांव तक सड़क पहुंची तो ग्रामीणों की पैदल रास्तों पर आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई। आरोप है कि जिस रास्ते पर पैदल चलना ही बंद हो गया, यहां आपदा मद से पांच लाख रुपये से लकड़ी के पुल का निर्माण हो रहा है।
ग्रामीणों ने खुद इस पर सवाल उठाए हैं और इसे सरकारी धन खपाने का जरिया बताया है। यह मामला चर्चाओं में है। ग्रामीणों ने इस मामले की जांच की मांग की है।
जहां हैं गरारी वहां बनाए जाएं पुल
सीमांत जिले में बंगापानी, मुनस्यारी, धारचूला क्षेत्र में कई ऐसे गधेरे और नदियां हैं जहां आवाजाही के लिए सिर्फ गरारी हैं। इन गरारी से हर रोज हजारों लोग जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं। गरारीं से गिरकर आए दिन लोगों के चोटिल होने की घटनाएं सामने आ रही हैं। क्षेत्र के लोग सालों से इन स्थानों पर पक्के पुलों के निर्माण की मांग कर रहे हैं।
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बुंगबुंग में जिस रास्ते का सालों से उपयोग नहीं हो रहा है वहां लकड़ी का पुल बन रहा है। यह सरकारी धन का दुरुपयोग है। इस मामले की जांच होनी चाहिए। - कुंदन सिंह भंडारी, पूर्व प्रधान, बुंगबुंग
कोट
ग्रामीणों की सहमति पर ही लकड़ी के पुल का प्रस्ताव तैयार किया और इसका निर्माण हो रहा है। इस रास्ते से ग्रामीणों के पालतू जानवर भी आवाजाही करते हैं। जानकारी लेने के बाद ये बातें सामने आई हैं। - अरुण कुमार, ईई, लोनिवि, अस्कोट
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दरअसल वर्ष 2013 की आपदा में धारचूला विकासखंड के बुंगबुंग में कालकोदयारी गधेरे पर बना झूलापुल बह गया था। पुल के साथ ही पैदल रास्ता भी क्षतिग्रस्त होकर रोखड़ में बदल गया। तब से लेकर आज तक यहां झूलापुल निर्माण करने की जरूरत किसी ने महसूस नहीं की। तब इस पैदल रास्ते पर आवाजाही करना असंभव हुआ तो ग्रामीणों को दूसरा रास्ता चुनना पड़ा। वर्ष 2022 में गांव तक सड़क पहुंची तो ग्रामीणों की पैदल रास्तों पर आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई। आरोप है कि जिस रास्ते पर पैदल चलना ही बंद हो गया, यहां आपदा मद से पांच लाख रुपये से लकड़ी के पुल का निर्माण हो रहा है।
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ग्रामीणों ने खुद इस पर सवाल उठाए हैं और इसे सरकारी धन खपाने का जरिया बताया है। यह मामला चर्चाओं में है। ग्रामीणों ने इस मामले की जांच की मांग की है।
जहां हैं गरारी वहां बनाए जाएं पुल
सीमांत जिले में बंगापानी, मुनस्यारी, धारचूला क्षेत्र में कई ऐसे गधेरे और नदियां हैं जहां आवाजाही के लिए सिर्फ गरारी हैं। इन गरारी से हर रोज हजारों लोग जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं। गरारीं से गिरकर आए दिन लोगों के चोटिल होने की घटनाएं सामने आ रही हैं। क्षेत्र के लोग सालों से इन स्थानों पर पक्के पुलों के निर्माण की मांग कर रहे हैं।
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बुंगबुंग में जिस रास्ते का सालों से उपयोग नहीं हो रहा है वहां लकड़ी का पुल बन रहा है। यह सरकारी धन का दुरुपयोग है। इस मामले की जांच होनी चाहिए। - कुंदन सिंह भंडारी, पूर्व प्रधान, बुंगबुंग
कोट
ग्रामीणों की सहमति पर ही लकड़ी के पुल का प्रस्ताव तैयार किया और इसका निर्माण हो रहा है। इस रास्ते से ग्रामीणों के पालतू जानवर भी आवाजाही करते हैं। जानकारी लेने के बाद ये बातें सामने आई हैं। - अरुण कुमार, ईई, लोनिवि, अस्कोट