{"_id":"59de523a4f1c1bc1678b532a","slug":"91507742266-pithoragarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट के फैसले से ब्लाक प्रमुख को मिलती दिख रही राहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट के फैसले से ब्लाक प्रमुख को मिलती दिख रही राहत
Updated Wed, 11 Oct 2017 10:47 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिथौरागढ़। हाइकोर्ट द्वारा ब्लॉक प्रमुख खेमे के क्षेत्र पंचायत सदस्य मान सिंह की सदस्यता समाप्त करने के आदेश पर रोक लगाने से धारचूला के ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी की लड़ाई रोचक मोड़ पर पहुंच गई है। क्षेत्र पंचायत सदस्य की सदस्यता बरकरार रहने से ब्लॉक प्रमुख को फिलहाल राहत मिलती दिखाई दे रही है। मान सिंह ब्लॉक प्रमुख के खेमे के हैं। 38 सदस्यों के सदन में अब 13 सदस्य ब्लॉक प्रमुख के पाले में हैं।
26 सदस्यों ने ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था, इसमें से एक सदस्य की हाल में मृत्यु हो गई। इससे पहले भी एक सदस्य की कुर्सी मृत्यु के कारण रिक्त पड़ी है। इस प्रकार 40 के सदन में सदस्यों की संख्या 38 रह गई है। अविश्वास प्रस्ताव पर 12 अक्तूबर को चर्चा के बाद मतदान होना है। ब्लॉक प्रमुख कांग्रेसी खेमे के हैं। अविश्वास प्रस्ताव पेश करने वाले सदस्य भाजपा के प्रभाव में बताए जाते हैं।
ब्लॉक प्रमुख को कुर्सी बचाने के लिए एक तिहाई मतों की आवश्यकता है। भाजपाई खेमा 25 सदस्य अपने पास होने का दावा कर रहा है। कांग्रेस के पास मान सिंह समेत 13 सदस्य हैं। 38 के सदन में यदि 13 सदस्य ब्लॉक प्रमुख के पक्ष में खड़े हो गए तो अविश्वास प्रस्ताव गिर जाएगा।
विज्ञापन
10 अक्तूबर को पंचायतीराज निदेशक एचसी सेमवाल ने रांथी के क्षेत्र पंचायत सदस्य मान सिंह की सदस्यता एक समय में दो पदों का लाभ लेने की पुष्टि होने के बाद समाप्त कर दी थी। इस आदेश के खिलाफ क्षेत्र पंचायत सदस्य ने 10 अक्तूबर को ही हाइकोर्ट में याचिका दायर की थी। बुधवार को हाइकोर्ट ने पंचायतीराज निदेशक के आदेश पर रोक लगा दी। हाइकोर्ट की रोक से मान सिंह अविश्वास प्रस्ताव की कार्यवाही में चर्चा और मतदान के अधिकारी हो गए हैं।
सदस्यों के पाले में होने के दोनों खेमों के दावे सही हैं तो इन हालात में ब्लॉक प्रमुख अपनी कुर्सी बचा ले जाएंगे। यदि सदन में सदस्य पाला बदलते हैं तो स्थिति कुछ और भी हो सकती है। बहरहाल सबकी नजर बृहस्पतिवार को होने वाली अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान पर टिकी हुई है।
वहीं, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश पंत ने हाइकोर्ट के फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि भाजपा के लोग लोकतंत्र की हत्या करने पर तुले हैं। उन्होंने दावा किया कि बृहस्पतिवार को ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव गिर जाएगा और लोकतंत्र की जीत होगी।
विज्ञापन
26 सदस्यों ने ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था, इसमें से एक सदस्य की हाल में मृत्यु हो गई। इससे पहले भी एक सदस्य की कुर्सी मृत्यु के कारण रिक्त पड़ी है। इस प्रकार 40 के सदन में सदस्यों की संख्या 38 रह गई है। अविश्वास प्रस्ताव पर 12 अक्तूबर को चर्चा के बाद मतदान होना है। ब्लॉक प्रमुख कांग्रेसी खेमे के हैं। अविश्वास प्रस्ताव पेश करने वाले सदस्य भाजपा के प्रभाव में बताए जाते हैं।
विज्ञापन
ब्लॉक प्रमुख को कुर्सी बचाने के लिए एक तिहाई मतों की आवश्यकता है। भाजपाई खेमा 25 सदस्य अपने पास होने का दावा कर रहा है। कांग्रेस के पास मान सिंह समेत 13 सदस्य हैं। 38 के सदन में यदि 13 सदस्य ब्लॉक प्रमुख के पक्ष में खड़े हो गए तो अविश्वास प्रस्ताव गिर जाएगा।
विज्ञापन
10 अक्तूबर को पंचायतीराज निदेशक एचसी सेमवाल ने रांथी के क्षेत्र पंचायत सदस्य मान सिंह की सदस्यता एक समय में दो पदों का लाभ लेने की पुष्टि होने के बाद समाप्त कर दी थी। इस आदेश के खिलाफ क्षेत्र पंचायत सदस्य ने 10 अक्तूबर को ही हाइकोर्ट में याचिका दायर की थी। बुधवार को हाइकोर्ट ने पंचायतीराज निदेशक के आदेश पर रोक लगा दी। हाइकोर्ट की रोक से मान सिंह अविश्वास प्रस्ताव की कार्यवाही में चर्चा और मतदान के अधिकारी हो गए हैं।
सदस्यों के पाले में होने के दोनों खेमों के दावे सही हैं तो इन हालात में ब्लॉक प्रमुख अपनी कुर्सी बचा ले जाएंगे। यदि सदन में सदस्य पाला बदलते हैं तो स्थिति कुछ और भी हो सकती है। बहरहाल सबकी नजर बृहस्पतिवार को होने वाली अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान पर टिकी हुई है।
वहीं, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश पंत ने हाइकोर्ट के फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि भाजपा के लोग लोकतंत्र की हत्या करने पर तुले हैं। उन्होंने दावा किया कि बृहस्पतिवार को ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव गिर जाएगा और लोकतंत्र की जीत होगी।