{"_id":"5be7109abdec2269774f1084","slug":"71541869722-pithoragarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अस्कोट क्षेत्र के कई गांव सड़क से वंचित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अस्कोट क्षेत्र के कई गांव सड़क से वंचित
Updated Sat, 10 Nov 2018 10:38 PM IST
विज्ञापन
अस्कोट (पिथौरागढ़)। कनालीछीना विकासखंड के अस्कोट क्षेत्र के कई गांव लंबे समय से सड़क की बाट जोह रहे हैं। सड़क नहीं बनने से कई गांवों से आधी से अधिक आबादी अन्यत्र जा चुकी है। गांवों में रह गए आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोग अब भी विकास की किरण पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं।
अस्कोट क्षेत्र का देवल, खोलिया गांव, दारती, खड़ियानी, छबीसा, बसौरा, सिरतोली, बसेड़ी, कूटा की करीब तीन हजार की आबादी पिछले कई वर्षों से सड़क का इंतजार कर रही है। ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए वर्ष 2011 में सड़क स्वीकृत हुई, लेकिन इस पर कार्य नहीं हो पाया। इसके बाद पूर्ववर्ती सरकार में देवल से दारती-कूटा के लिए 10 किमी सड़क स्वीकृत हुई। बावजूद इसके अब तक इसमें कार्य नहीं हो पाया। नतीजतन ग्रामीणों का गांवों छोड़कर जाने का क्रम जारी है। दारती गांव में करीब 35 परिवार थे, जिनमें से अब आधे ही रह गए हैं।
ग्रामीणों को जंगल के रास्ते गांव पहुंचना पड़ता है। ग्रामीण केशर सिंह, हीरा सिंह, आन सिंह, दान सिंह, पूरन सिंह आदि ने बताया कि सड़क नहीं होने से काफी परेशानी होती है। गांव में उपजाऊ जमीन है। फल, सब्जियां, फसल भी अच्छी होती है, लेकिन इनका लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पाता है। उन्होंने कहा कि यदि सड़क की सुविधा होती तो ग्रामीणों की आर्थिकी में इजाफा होता।
विज्ञापन
देवल-दारती-कूटा सड़क की वन भूमि मामले का निस्तारण हो गया है। सड़क के लिए धनराशि स्वीकृत होने के बाद कार्य शुरू कर दिया जाएगा। -हेमंत चंदोला, सहायक अभियंता, लोनिवि अस्कोट।
विज्ञापन
अस्कोट क्षेत्र का देवल, खोलिया गांव, दारती, खड़ियानी, छबीसा, बसौरा, सिरतोली, बसेड़ी, कूटा की करीब तीन हजार की आबादी पिछले कई वर्षों से सड़क का इंतजार कर रही है। ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए वर्ष 2011 में सड़क स्वीकृत हुई, लेकिन इस पर कार्य नहीं हो पाया। इसके बाद पूर्ववर्ती सरकार में देवल से दारती-कूटा के लिए 10 किमी सड़क स्वीकृत हुई। बावजूद इसके अब तक इसमें कार्य नहीं हो पाया। नतीजतन ग्रामीणों का गांवों छोड़कर जाने का क्रम जारी है। दारती गांव में करीब 35 परिवार थे, जिनमें से अब आधे ही रह गए हैं।
विज्ञापन
ग्रामीणों को जंगल के रास्ते गांव पहुंचना पड़ता है। ग्रामीण केशर सिंह, हीरा सिंह, आन सिंह, दान सिंह, पूरन सिंह आदि ने बताया कि सड़क नहीं होने से काफी परेशानी होती है। गांव में उपजाऊ जमीन है। फल, सब्जियां, फसल भी अच्छी होती है, लेकिन इनका लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पाता है। उन्होंने कहा कि यदि सड़क की सुविधा होती तो ग्रामीणों की आर्थिकी में इजाफा होता।
विज्ञापन
देवल-दारती-कूटा सड़क की वन भूमि मामले का निस्तारण हो गया है। सड़क के लिए धनराशि स्वीकृत होने के बाद कार्य शुरू कर दिया जाएगा। -हेमंत चंदोला, सहायक अभियंता, लोनिवि अस्कोट।