फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   सरकार की तिजोरी खाली, हंस ने बढ़ाए मदद को हाथ

सरकार की तिजोरी खाली, हंस ने बढ़ाए मदद को हाथ

Sat, 10 Feb 2018 10:58 PM IST
Updated Sat, 10 Feb 2018 10:58 PM IST
विज्ञापन
सरकार की तिजोरी खाली, हंस ने बढ़ाए मदद को हाथ
पिथौरागढ़। जिले में आईसीयू वार्ड की स्थापना को लेकर सरकार की कवायद महज जुबानी खर्च तक सीमित है। हकीकत में सरकार के पास योजना को मूर्त रूप देने के लिए बजट नहीं है। सरकार के दावों के इतर पिथौरागढ़ जिला अस्पताल में प्रस्तावित आईसीयू वार्ड और ट्रामा सेंटर की डीपीआर शासन में धूल फांक रही है। हालांकि रोगियों की परेशानी और सरकार की खाली तिजोरी को देखते हुए हंस फाउंडेशन ने मदद का हाथ बढ़ाया है। हंस के प्रयासों से पिथौरागढ़ में पांच बेड के आईसीयू वार्ड का निर्माण शुरू हो गया है।
विज्ञापन


सरकार के हर जिले में आईसीयू वार्ड खोलने की योजना और प्रचारित दावों की अमर उजाला ने पड़ताल की तो हकीकत अलग-अलग निकली। पिथौरागढ़ में आईसीयू वार्ड, ट्रामा सेंटर के साथ ही जिला अस्पताल में 50 बेडों के विस्तार की योजना पिछले वर्ष ही तैयार कर ली गई थी। जिला अस्पताल के प्रस्ताव पर कार्यदायी संस्था ब्रिडकुल 5.68 करोड़ की इस योजना की डीपीआर 27 अगस्त 2017 को तैयार कर चुकी है। इसके बाद डीपीआर मुख्यालय को भेज दी गई, लेकिन बजट के अभाव में इसे हरी झंडी नहीं मिल पाई। ये हाल तब हैं, जबकि सरकार ने पिथौरागढ़ में आईसीयू वार्ड की स्थापना का काम शीर्ष प्राथमिकता में शामिल किया है।
विज्ञापन


इसके इतर सीमांत की जरूरतों को देखते हुए हंस फाउंडेशन ने मदद का हाथ बढ़ाया है। हंस जिला अस्पताल में पांच बेड के आईसीयू वार्ड का निर्माण करा रहा है। इसके लिए अस्पताल का एक मेडिकल वार्ड फाउंडेशन को निर्माण के लिए दिया है। पिछले एक माह से भवन तैयार करने का काम चल रहा है। हंस द्वारा तैयार किए जा रहे आईसीयू वार्ड में चार बेड सामान्य, जबकि एक संक्रमित रोगी के लिए बनाया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


हर माह 45 रोगियों को आईसीयू की जरूरत
पिथौरागढ़ की पांच लाख की आबादी जिला अस्पताल पर सीधे तौर पर निर्भर है। इसके अलावा चंपावत, बागेश्वर, अल्मोड़ा की सीमा से लगते क्षेत्रों के रोगी भी यहां आते हैं। नेपाल के सीमावर्ती इलाकों के रोगी भी इलाज के लिए इस अस्पताल पर निर्भर हैं। अस्पताल में रोजाना 500 नए रोगी रिपोर्ट होते हैं, जबकि हर माह औसतन 45 ऐसे रोगी होते हैं, जिन्हें आईसीयू की सख्त जरूरत होती है। मजबूरन इन्हें रेफर करना पड़ता है। इनमें सिर की चोट, दिल की बीमारी, प्रसव आदि के गंभीर केस शामिल होते हैं।

आईसीयू से दूरी जान पर पड़ती है भारी
जिले में रोगियों के बड़े दबाव और आईसीयू न होने से हल्द्वानी, बरेली, दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ती है। आपात परिस्थितियों में पिथौरागढ़ से सुविधा संपन्न शहरों के बीच की दूरी जान पर भारी पड़ जाती है। हर माह 5-10 रोगी रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं, जबकि सुविधा संपन्न शहरों तक पहुंचते-पहुंचते बाकी रोगियों की हालत और बिगड़ जाती है। उनका इलाज एवं सुधार में ज्यादा वक्त और धन लगता है। गंभीर मामलों में समय पर इलाज न मिलने से ठीक होने की संभावना घटती जाती है।

आईसीयू के अभाव में शल्य क्रिया से कतराते हैं चिकित्सक
आईसीयू के अभाव में चिकित्सक शल्य क्रिया से कतराते हैं। जरा भी जोखिम नजर आने पर केस को हाथ तक नहीं लगाते। सड़क दुर्घटना समेत सिर की चोट, दिल की बीमारियों, हाईब्लड प्रेशर या फिर मिर्गी रोगियों की शल्य क्रिया नहीं की जाती। कई बार चिकित्सक मामूली सी शल्य क्रिया से भी हाथ खड़े कर देते हैं। नतीजतन चिकित्सकों के बीच जरा भी गंभीर मामले में तुरंत रेफर करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। इसका खामियाजा जरूरतमंदों को भुगततना पड़ता है। कई केसों में तुरंत शल्य क्रिया न होने से जान का खतरा बढ़ जाता है।


जिला अस्पताल में आईसीयू, ट्रामा सेंटर और 50 बेड के विस्तारीकरण की डीपीआर तैयार की थी। इसे मुख्यालय को भेजा जा चुका है। बजट न होने से निर्माण को मंजूरी नहीं मिल पाई है। अब अस्पताल में हंस फाउंडेशन की मदद से पांच बेड का आईसीयू वार्ड तैयार किया जा रहा है। -डॉ. एचएस खड़ायत, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, पिथौरागढ़।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed