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सड़क तो बना दी पर पुल नहीं बनाया
Updated Tue, 13 Jun 2017 10:48 PM IST
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सड़क तो बना दी पर पुल नहीं बनाया
थल (पिथौरागढ़)। लोक निर्माण विभाग ने थल से लेजम के लिए सड़क का निर्माण तो कर दिया, लेकिन लकड़ीगाड़ में पुल के निर्माण को छोड़ दिया है। इस पुल के न बनने से लेजम, आमथल, दड़मोली गांव के लोग सड़क की सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। विभाग के अधिकारी पुल निर्माण के लिए धन की कमी बताते हैं, जबकि स्थानीय लोगों को लोनिवि की मंशा पर संदेह है और वह पुल का निर्माण न होने के कारणों की जांच की मांग कर रहे हैं।
थल से लेजम तक सड़क 1999 में स्वीकृत हो गई थी। सड़क की स्वीकृति के समय ही लकड़ीगाड़ में पुल निर्माण की भी मंजूरी शासन ने दे दी थी। वर्ष 2005 में लोक निर्माण विभाग ने सड़क का निर्माण तो जैसे-तैसे कर दिया, लेकिन लकड़ीगाड़ में पुल नहीं बनाया। छह माह पूर्व लकड़ीगाड़ में पुल के निर्माण के नाम पर दोनों तरफ दीवारें लगा दी, लेकिन पुल का सामान अब तक नहीं पहुंचा है। लोनिवि के अधिशासी अभियंता पीसी जोशी का कहना है कि पुल निर्माण के लिए धन की कमी हो गई है। शासन से धन मिलते ही इसका निर्माण किया जाएगा।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता बसंत लोहनी का कहना है कि लोनिवि की कार्यशैली संदेहास्पद है। जब पुल ही नहीं बनेगा तो वाहनों का संचालन कैसे होगा। सड़क बनाने से पहले विभाग को पुल का निर्माण करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
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थल (पिथौरागढ़)। लोक निर्माण विभाग ने थल से लेजम के लिए सड़क का निर्माण तो कर दिया, लेकिन लकड़ीगाड़ में पुल के निर्माण को छोड़ दिया है। इस पुल के न बनने से लेजम, आमथल, दड़मोली गांव के लोग सड़क की सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। विभाग के अधिकारी पुल निर्माण के लिए धन की कमी बताते हैं, जबकि स्थानीय लोगों को लोनिवि की मंशा पर संदेह है और वह पुल का निर्माण न होने के कारणों की जांच की मांग कर रहे हैं।
थल से लेजम तक सड़क 1999 में स्वीकृत हो गई थी। सड़क की स्वीकृति के समय ही लकड़ीगाड़ में पुल निर्माण की भी मंजूरी शासन ने दे दी थी। वर्ष 2005 में लोक निर्माण विभाग ने सड़क का निर्माण तो जैसे-तैसे कर दिया, लेकिन लकड़ीगाड़ में पुल नहीं बनाया। छह माह पूर्व लकड़ीगाड़ में पुल के निर्माण के नाम पर दोनों तरफ दीवारें लगा दी, लेकिन पुल का सामान अब तक नहीं पहुंचा है। लोनिवि के अधिशासी अभियंता पीसी जोशी का कहना है कि पुल निर्माण के लिए धन की कमी हो गई है। शासन से धन मिलते ही इसका निर्माण किया जाएगा।
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स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता बसंत लोहनी का कहना है कि लोनिवि की कार्यशैली संदेहास्पद है। जब पुल ही नहीं बनेगा तो वाहनों का संचालन कैसे होगा। सड़क बनाने से पहले विभाग को पुल का निर्माण करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
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