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छिपलाकेदार ट्रैकिंग रूट का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में
Updated Fri, 24 Nov 2017 10:43 PM IST
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पिथौरागढ़। कुमाऊं मंडल विकास निगम ने राज्य गठन से पहले 1999 में उत्तर प्रदेश सरकार के पास छिपलाकेदार तक ट्रैकिंग रूट बनाने का जो प्रस्ताव भेजा था, उसे अब तक मंजूरी नहीं मिल पाई है। राज्य गठन के बाद नए पर्यटन स्थलों को विकसित करने की दिशा में सरकार ने कितना ध्यान दिया, इसका प्रमाण इस प्रस्ताव के ठंडे बस्ते में चले जाने से मिल जाता है।
समुद्र सतह से 3920 मीटर की ऊंचाई पर स्थित छिपलाकेदार में पर्यटन की दृष्टि से आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करने के लिए 47.50 लाख रुपये का प्रस्ताव तैयार किया था। निगम के तत्कालीन अध्यक्ष रुद्र सिंह पंडा की ओर से भेजे गए इस प्रस्ताव में पैदल रास्ते को तैयार करने और रास्ते पर यात्रियों के लिए फाइबर हट्स बनाने का प्रस्ताव शामिल किया गया। तवाघाट से बनने वाले इस पैदल रास्ते पर खेला, तोलियाडुगड़ी, पिंगु गुफा, नौदेव, नाजुरीकुंड, काकरौल कुंड, राकवास, व्यारती, भुजानी, सेराटॉप, सेराकोट आदि प्रमुख स्थान पड़ते हैं। इन स्थानों पर पर्यटकों के लिए आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने संबंधी बातें भी शामिल की गई।
पंडा का कहना है कि यूपी के समय में तो इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल पाई, लेकिन उत्तराखंड बनने के बाद भी इस पर कोई गौर नहीं किया गया। उनका कहना है कि छिपलाकेदार का ग्लेशियर कुमाऊं का सबसे नजदीकी ग्लेशियर है। बरम, बंगापानी से छिपलाकेदार पहुंचने में मात्र 30 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। बर्फ की लाइन देखने के इच्छुक पर्यटकों और ट्रैकरों के लिए यह स्थान सबसे उत्तम है।
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छिपलाकेदार का विकास किया जाएगा
कुमाऊं मंडल विकास निगम के महाप्रबंधक टीएस मर्तोलिया का कहना है कि कुमाऊं में कुछ पर्यटन स्थलों के विकास की योजना है। इसमें छिपलाकेदार को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूर्व में भेजे गए प्रस्ताव पर क्यों अमल नहीं हो पाया, इसकी जानकारी ली जाएगी। आने वाले समय में छिपलाकेदार का पर्यटन की दृष्टि से अवश्य विकास किया जाएगा।
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समुद्र सतह से 3920 मीटर की ऊंचाई पर स्थित छिपलाकेदार में पर्यटन की दृष्टि से आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करने के लिए 47.50 लाख रुपये का प्रस्ताव तैयार किया था। निगम के तत्कालीन अध्यक्ष रुद्र सिंह पंडा की ओर से भेजे गए इस प्रस्ताव में पैदल रास्ते को तैयार करने और रास्ते पर यात्रियों के लिए फाइबर हट्स बनाने का प्रस्ताव शामिल किया गया। तवाघाट से बनने वाले इस पैदल रास्ते पर खेला, तोलियाडुगड़ी, पिंगु गुफा, नौदेव, नाजुरीकुंड, काकरौल कुंड, राकवास, व्यारती, भुजानी, सेराटॉप, सेराकोट आदि प्रमुख स्थान पड़ते हैं। इन स्थानों पर पर्यटकों के लिए आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने संबंधी बातें भी शामिल की गई।
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पंडा का कहना है कि यूपी के समय में तो इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल पाई, लेकिन उत्तराखंड बनने के बाद भी इस पर कोई गौर नहीं किया गया। उनका कहना है कि छिपलाकेदार का ग्लेशियर कुमाऊं का सबसे नजदीकी ग्लेशियर है। बरम, बंगापानी से छिपलाकेदार पहुंचने में मात्र 30 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। बर्फ की लाइन देखने के इच्छुक पर्यटकों और ट्रैकरों के लिए यह स्थान सबसे उत्तम है।
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छिपलाकेदार का विकास किया जाएगा
कुमाऊं मंडल विकास निगम के महाप्रबंधक टीएस मर्तोलिया का कहना है कि कुमाऊं में कुछ पर्यटन स्थलों के विकास की योजना है। इसमें छिपलाकेदार को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूर्व में भेजे गए प्रस्ताव पर क्यों अमल नहीं हो पाया, इसकी जानकारी ली जाएगी। आने वाले समय में छिपलाकेदार का पर्यटन की दृष्टि से अवश्य विकास किया जाएगा।