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प्राइवेट अस्पतालों में ताले, सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डाक्टर नहीं
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पिथौरागढ़। क्लीनिकल एस्टेब्लिसमेंट एक्ट (सीईए) को व्यावहारिक बनाने की मांग को लेकर निजी चिकित्सकों की हड़ताल जारी है। बुधवार को भी अस्पतालों के ताले नहीं खुले। निजी अस्पतालों में चिकित्सकों की हड़ताल के कारण सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों के अधिकांश पद रिक्त होने से मरीजों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
पिथौरागढ़ नगर में छोटे-बड़े सभी मिलाकर लगभग 14 नर्सिंग होम हैं। इनमें प्रतिदिन दो से ढाई हजार मरीजों की जांच और उपचार होता है। इन क्लीनिकों के बंद होने से जिला अस्पताल में मरीजों की काफी भीड़ उमड़ रही है। बुधवार को भी बड़ी संख्या में मरीज जिला अस्पताल पहुंचे। इनमें निजी अस्पतालों में एक सप्ताह पूर्व ऑपरेशन वाले मरीज भी शामिल रहे। अधिकांश मरीज ऑपरेशन के टॉके काटने पहुंचे।
जिला अस्पताल में बुधवार को जांच के लिए सात सौ मरीजों ने पंजीकरण कराया। इसके अलावा कई मरीज आपातकालीन विभाग में भी पहुंचे। बैठक में भाग लेने हरिद्वार गए आईएमए की पिथौरागढ़ जिला इकाई के सचिव डॉ.जेसी गड़कोटी ने बताया कि प्रांतीय बैठक में कार्य बहिष्कार जारी रखने पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पदाधिकारियों ने तय किया है कि कोरे आश्वासनों पर यह बंद स्थगित नहीं किया जाएगा। सरकार जब तक एक्ट में बदलाव नहीं करती अस्पताल बंद रखे जाएंगे।
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पिथौरागढ़ नगर में छोटे-बड़े सभी मिलाकर लगभग 14 नर्सिंग होम हैं। इनमें प्रतिदिन दो से ढाई हजार मरीजों की जांच और उपचार होता है। इन क्लीनिकों के बंद होने से जिला अस्पताल में मरीजों की काफी भीड़ उमड़ रही है। बुधवार को भी बड़ी संख्या में मरीज जिला अस्पताल पहुंचे। इनमें निजी अस्पतालों में एक सप्ताह पूर्व ऑपरेशन वाले मरीज भी शामिल रहे। अधिकांश मरीज ऑपरेशन के टॉके काटने पहुंचे।
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जिला अस्पताल में बुधवार को जांच के लिए सात सौ मरीजों ने पंजीकरण कराया। इसके अलावा कई मरीज आपातकालीन विभाग में भी पहुंचे। बैठक में भाग लेने हरिद्वार गए आईएमए की पिथौरागढ़ जिला इकाई के सचिव डॉ.जेसी गड़कोटी ने बताया कि प्रांतीय बैठक में कार्य बहिष्कार जारी रखने पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पदाधिकारियों ने तय किया है कि कोरे आश्वासनों पर यह बंद स्थगित नहीं किया जाएगा। सरकार जब तक एक्ट में बदलाव नहीं करती अस्पताल बंद रखे जाएंगे।
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