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तालेश्वर मंदिर में मकर संक्रांति मेला कल
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झूलाघाट (पिथौरागढ़)। भारत-नेपाल के श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र तालेश्वर में मकर संक्रांति के पर्व पर लगने वाले मेले की तैयारियां जोरों से चल रही है। संक्रांति पर्व पर श्रद्धालु संगम पर पहुंच रेत से शिवलिंग बना कर पूजा करते हैं। बाद में भगवान सूर्य को अर्ध्य अर्पित किया जाता है।
नेपाल की ओर से आने वाली चमलिया और महाकाली नदी के संगम पर तालेश्वर में मकर संक्रांति पर्व पर श्रद्धालु तड़के से ही स्नान में जुट जाते हैं। पहले झूलाघाट से पांच किमी पैदल रास्ता था लेकिन अब सड़क बन जाने से श्रद्धालुओं के लिए काफी सुविधा हो गई है। श्रद्धालु सुबह नदी के साथ आने वाली रेत से शिवलिंग स्थापित करते हैं। हाथ में जलते दिए लेकर शिवलिंग की पूजा-अर्चना की जाती है। बाद में दीया और खिचड़ी भोग को नदी में विसर्जित किया जाता है। इसके बाद भगवान सूर्य की आराधना कर जल चढ़ाया जाता है।
कहा जाता है कि कुछ समय पूर्व तक संगम में नाग देव भी दर्शन देते थे जो अब नहीं दिखाई देते हैं। तालेश्वर में सीमांत जिले के साथ ही नेपाल, चंपावत, लोहाघाट आदि क्षेत्रों के श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में स्नान और पूजा-अर्चना को आते हैं। पूर्व प्रधान भीम सिंह गोबाड़ी ने बताया कि सोमवार की रात से मंदिर में अखंड धुनि जलाकर जागरण किया जाएगा और मंगलवार तड़के से ही स्नान शुरू हो जाएगा।
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नेपाल की ओर से आने वाली चमलिया और महाकाली नदी के संगम पर तालेश्वर में मकर संक्रांति पर्व पर श्रद्धालु तड़के से ही स्नान में जुट जाते हैं। पहले झूलाघाट से पांच किमी पैदल रास्ता था लेकिन अब सड़क बन जाने से श्रद्धालुओं के लिए काफी सुविधा हो गई है। श्रद्धालु सुबह नदी के साथ आने वाली रेत से शिवलिंग स्थापित करते हैं। हाथ में जलते दिए लेकर शिवलिंग की पूजा-अर्चना की जाती है। बाद में दीया और खिचड़ी भोग को नदी में विसर्जित किया जाता है। इसके बाद भगवान सूर्य की आराधना कर जल चढ़ाया जाता है।
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कहा जाता है कि कुछ समय पूर्व तक संगम में नाग देव भी दर्शन देते थे जो अब नहीं दिखाई देते हैं। तालेश्वर में सीमांत जिले के साथ ही नेपाल, चंपावत, लोहाघाट आदि क्षेत्रों के श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में स्नान और पूजा-अर्चना को आते हैं। पूर्व प्रधान भीम सिंह गोबाड़ी ने बताया कि सोमवार की रात से मंदिर में अखंड धुनि जलाकर जागरण किया जाएगा और मंगलवार तड़के से ही स्नान शुरू हो जाएगा।
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